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चयन के बाद स्वास्थ्य विभाग को झटका दे गए 40 डॉक्टर

Sat, 19 Sep 2020 02:00 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2020 02:00 AM IST
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40 doctors did not join health department even after selection
कौशल कुमार ओझा
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कोरोना महामारी के काल में भी स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं। आलम यह है कि चयन के बाद भी पिछले दो महीनों के दौरान 40 डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग को अंगूठा दिखाकर चले गए। इतना ही नहीं प्रतिदिन पांच हजार रुपये देने की पेशकश के बावजूद कोई निजी डाक्टर सामने नहीं आया।
स्वास्थ्य विभाग में पहले से ही डॉक्टरों की भारी कमी है। कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद डॉक्टरों की सख्त जरूरत महसूस हुई। जेएन मेडिकल कॉलेज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय, 100 बेड अस्पताल अतरौली, सीएचसी हरदुआगंज, खेरेश्वर रोड स्थित जीवन ज्योति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, छेरत स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को कोविड-19 अस्पताल में तब्दील किया गया। यहां पर उपचार के लिए पर्याप्त संख्या में चिकित्सक नहीं थे। विशेषज्ञ चिकित्सकों की सख्त जरूरत है। महानगर के अस्पतालों एवं सीएचसी तथा पीएचसी पर भी चिकित्सकों की भारी कमी है।
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अगस्त में संविदा पर विभिन्न विभागों के चिकित्सकों के 24 पदों के लिए साक्षात्कार हुए। इसमें 18 चिकित्सकों का चयन किया गया। शासन से उनमें से 15 चिकित्सकों की तैनाती के लिए हरी झंडी मिल गई। ज्वाइनिंग का वक्त आया तो एक भी चिकित्सक तैयार नहीं हुआ। इसी तरह अगस्त में ही चिकित्सकों के 22 पदों के लिए साक्षात्कार हुए। इसमें चार बेहोशी, छह फिजीशियन एवं 12 मेडिकल ऑफिसर के पद थे। इसमें भी वहीं हुआ और चयनित चिकित्सकों ने ज्वाइनिंग से मुंह फेर लिया। कोरोना महामारी को देखते हुए शासन द्वारा निजी चिकित्सकों को भी ऑफर दिया गया था कि महीने में 15 दिन कोविड-19 अस्पताल में आकर सेवा दें। प्रत्येक दिन पांच हजार यानी महीने में 15 दिन के 75 हजार रुपये वेतन के रूप में देंगे, लेकिन एक भी निजी चिकित्सक तैयार नहीं हुए।
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डॉक्टरों के 193 में से 132 पद खाली
सीएमओ के अधीन डॉक्टरों के 193 पद है। इनमें से 132 पद खाली है। 61 डॉक्टरों के भरोसे लाखों की आबादी है। 61 डॉक्टरों में सीएमओ, एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ व अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। हालत यह है कि एसीएमओ के नौ पद है, जिसमें आठ खाली है। जिला एवं मंडल स्तरीय अस्पतालों मे स्वीकृत 81 पदों में से करीब 35 रिक्त हैं।
23 डॉक्टरों के चयन के लिए 25 को साक्षात्कार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत विभिन्न चिकित्सा इकाइयों में संविदा पर 23 चिकित्सकों की तैनाती के लिए 25 सितंबर 2020 को साक्षात्कार होना है। साक्षात्कार विकास भवन स्थित मुख्य विकास अधिकारी के कार्यालय में होगी।
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक के प्रति जनता का रवैया बहुत अच्छा नहीं है। मामूली बात पर लोग धमकाने लगते हैं। सरकारी विभाग के चिकित्सकों को काम के लिए वक्त निर्धारित नहीं है। गांव में जाने से चिकित्सक कतराते हैं। आवासीय व अन्य कई तरह की सुविधाओं का अभाव है। पैसा भी एक वजह है।
- डॉ. बीपी सिंह कल्याणी, सीएमओ
सेंट्रल यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजीडेंट एवं सीनियर रेजीडेंट को क्रमश: 90-95 हजार से लेकर 1.20 लाख रुपये तक हर महीने मिलते हैं। ऐसे में युवा 55 हजार रुपये की संविदा की नौकरी क्यों करने जाएगा। भ्रष्टाचार व अन्य कई बुराइयां भी है, जिसकी वजह से वे अपना भविष्य सुरक्षित नहीं समझते।

- डॉ. हमजा मलिक, अध्यक्ष आरडीए, जेएनएमसी
इसके बहुत सारे कारण है। जो ज्ञान अर्जित किया है, उसे अपडेट करतेे रहने का वहां मौका नहीं मिलता है। अस्पतालों में नया सीखने का कोई मौका नहीं है। वेतन कम है। वातावरण भी अच्छा नहीं है। संविदा की नौकरी में भविष्य सुरक्षित नहीं लगता। सरकारी डॉक्टर को मूल काम छोड़कर प्रशासनिक काम ज्यादा करने पड़ते हैं।
- डॉ. अम्मर, जेएनएमसी
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