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आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी व्रती महिलाएं
Updated Tue, 13 Nov 2018 01:21 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
रविवार से शुरू हुआ चार दिवसीय छठ पर्व के दूसरे दिन सोमवार को महिलाओं ने खरना की प्रसादी पाकर सूर्य पूजा की टकटकी लगाना प्रारंभ कर दिया। सूर्य पूजा के लिए महिलाएं उत्साहित हैं। वहीं आज (मंगलवार) डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए शहर के बदरबाग व टीकाराम मंदिर में विभिन्न तैयारिया कर ली गई हैं।
टीकाराम मंदिर व बदरबाग स्थित मंदिर में आज बनाए गए घाट पर छट पर्व मनाने वाली महिलाएं शाम सूर्य डूबने से पहले ही पहुंच जाएंगी। इसके बाद डूबते हुए सूर्य की उपासना करके अर्घ्य दिया जाएगा। आज पूजा के दौरान जरूरत पड़ने वाली हर एक सामिग्री महिलाओं ने सोमवार को ही व्यवस्थित कर ली थी।
वहीं छोटी मोटी जो वस्तुएं रह गई हैं, उन्हें परिजन दोपहर तक पूरी कर देंगे। इसके बाद शाम को सूर्य डूबने पर अर्घ्य देकर बुधवार सुबह उदय होने वाले सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न होगा। इसके बाद सभी परिजन एक साथ मिलकर प्रसाद ग्रहण करेंगे और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करेंगे।
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मैने दस साल पहले से पूजा उठाई थी। यह पूजा मैने मन्नत पूरी होने के बाद से शुरू की। अब सब कुछ सामान्य लगता है। मन्नत पूरी होने वाली महिलाएं बैंड बाजों के साथ कोसी भरकर घाट पर जाती हैं। यह पूजा हमारे परिवार के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है।- संगीता, निवासी बदरबाग
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रविवार से शुरू हुआ चार दिवसीय छठ पर्व के दूसरे दिन सोमवार को महिलाओं ने खरना की प्रसादी पाकर सूर्य पूजा की टकटकी लगाना प्रारंभ कर दिया। सूर्य पूजा के लिए महिलाएं उत्साहित हैं। वहीं आज (मंगलवार) डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए शहर के बदरबाग व टीकाराम मंदिर में विभिन्न तैयारिया कर ली गई हैं।
टीकाराम मंदिर व बदरबाग स्थित मंदिर में आज बनाए गए घाट पर छट पर्व मनाने वाली महिलाएं शाम सूर्य डूबने से पहले ही पहुंच जाएंगी। इसके बाद डूबते हुए सूर्य की उपासना करके अर्घ्य दिया जाएगा। आज पूजा के दौरान जरूरत पड़ने वाली हर एक सामिग्री महिलाओं ने सोमवार को ही व्यवस्थित कर ली थी।
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वहीं छोटी मोटी जो वस्तुएं रह गई हैं, उन्हें परिजन दोपहर तक पूरी कर देंगे। इसके बाद शाम को सूर्य डूबने पर अर्घ्य देकर बुधवार सुबह उदय होने वाले सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न होगा। इसके बाद सभी परिजन एक साथ मिलकर प्रसाद ग्रहण करेंगे और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करेंगे।
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मैने दस साल पहले से पूजा उठाई थी। यह पूजा मैने मन्नत पूरी होने के बाद से शुरू की। अब सब कुछ सामान्य लगता है। मन्नत पूरी होने वाली महिलाएं बैंड बाजों के साथ कोसी भरकर घाट पर जाती हैं। यह पूजा हमारे परिवार के लिए अत्यंत ही महत्वपूर्ण है।- संगीता, निवासी बदरबाग