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जाति-धर्म के समीकरण में उलझ रहा मेयर का चुनाव

Thu, 16 Nov 2017 02:10 AM IST
Updated Thu, 16 Nov 2017 02:10 AM IST
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जाति-धर्म के समीकरण में उलझ रहा मेयर का चुनाव
जाति-धर्म के समीकरण में उलझ रहा मेयर का चुनाव
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।

मेयर चुनाव का प्रचार अब हर दिन के साथ जोर पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस ने ब्राह्मण समुदाय के मेयर प्रत्याशी मधुकर शर्मा के प्रचार को और तेज करने के लिए प्रमोद तिवारी को बुलाने की योजना बना ली है, ताकि ब्राह्मणों के बीच पैठ बन सके। पार्टी ने मेयर प्रत्याशी के रूप में मधुकर शर्मा को उतार कर ब्राह्मण कार्ड पहले ही खेल दिया है। शहर और कोल विधानसभा के ब्राह्मणों को एकजुट कर पार्टी बेहद मजबूत मुसलिम वोट बैंक को संदेश देना चाहती है कि वह लड़ाई में निर्णायक स्थिति में है, अगर मुसलमान भी साथ दें तो मेयर का चुनाव जीता जा सकता है।

कांग्रेस महानगर अध्यक्ष विवेक बंसल और जिलाध्यक्ष चौ. बिजेंद्र सिंह ने हाल ही में अपना चुनावी एजेंडा जारी करते हुए कहा था कि मेयर सीट पर लगभग 60 हजार वोट ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखता है। इस समुदाय को भी नगर निगम में पूरी राजनीतिक भागीदारी देने के लिए कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी इस समुदाय से चुना है। उन्होंने ये भी कहा था कि कांग्रेस का निष्ठावान हर जाति, समुदाय और हर धर्म का वोट भी उन्हें मिला तो कांग्रेस मजबूत स्थिति में आ जाएगी। इधर, कांग्रेसियों ने शहर में चार बड़े ब्राह्मण सम्मेलन कराने की योजना बनाई है। पहला सम्मेलन रघुवीर धर्मशाला में 18 नवंबर को होने जा रहा है, जिसका संयोजक विनोद पांडेय को बनाया गया है। बाकी तीन सम्मेलनाें का स्थान भी जल्द ही तय होगा। पार्टी को ब्राह्मण समुदाय के कुछ संगठनों का भी साथ मिल रहा है।
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जानकारों की मानें तो मुसलिम समुदाय के लोग मेयर के चुनाव में उस पार्टी को अपना समर्थन दे सकते हैं, जो भाजपा को हराने का दमखम रखती हो। मुसलिम मोहल्लों में हर चौराहे और नुक्कड़ पर इसको लेकर चर्चाएं हो रही हैं। मुसलमान समुदाय के वोटर अभी सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों की मजबूती को परख रहे हैं। जिसकी स्थिति मजबूत होगी ये बड़ा वोट बैंक उसकी तरफ खिसक सकता है। ऐसे में सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों ही अपने बेस वोट की मजबूती दिखाकर मुसलिम समुदाय को अपनी तरफ खींचने में लगे हैं। बसपा दलित वोटों का बेस बता कर रिझा रही है तो सपा यादव और पिछड़ी जातियों का वोट बेस दिखाकर मुसलिमों को लुभा रही है। सपा के नेता विधानसभा चुनाव में शहर और कोल विधानसभा सीट पर मिले कुल वोटों का हवाला देकर भी चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत बता रही है। यही नहीं तीनों पार्टियों के साथ भाजपा भी ब्राह्मण वोटों को आसानी से खिसकने नहीं देगी। ऐसे में ब्राह्मण समुदाय के निर्णय पर भी सबकी नजर है। बहरहाल, गैर भाजपाई दलों ने मुसलिम समुदाय में अपने खास स्थानीय नेताओं, समर्थकों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया है। मुसलिम समुदाय के रुझान को हर दिन टटोला जा रहा है, ताकि तेजी से बदल रहे प्रचार प्रसार में कहीं कोई पीछे न रह जाए।
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