जिनको था राय बहादुर का खिताब: उनकी हवेली में तीन करोड़ की चोरी का नहीं सुराग, मुकदमा बंद कर भूल गई पुलिस
चोरी गए सामान में 11 एंटिक विदेशी हथियारों में 7 लाइसेंसी व 4 ऐसे हथियार जिन्हें लाइसेंस की जरूरत नहीं थी। इनमें 12 बोर की तीन बंदूक, 32 बोर की दो रिवाल्वर, दो रायफल आदि शामिल हैं। इनके साथ ही 500 ग्राम सोना जड़ित दो और चांदी जड़ित पांच बेशकीमती विदेशी ट्राफियां, चांदी के बर्तन-सिक्के, जेवरात शामिल हैं।
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अलीगढ़ में पिसावा रियासत (दोआब स्टेट) की हवेली से तीन करोड़ की बेशकीमती ट्रॉफियां, हथियार व जेवरात की चोरी शायद ही कोई भूला हो, लेकिन थाना पुलिस इस चोरी को भूल गई। 10 वर्ष पहले हुई चोरी में तीन साल तक चले प्रयास के बाद भी पुलिस कोई सुराग नहीं तलाश पाई। अंतत: मुकदमा बंद कर अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई।
जिले के बुलंदशहर बॉर्डर के कस्बा पिसावा की रियासत (दोआब स्टेट) के स्वामी स्व. शिवदान सिंह को अंग्रेजी शासनकाल में राय बहादुर के खिताब से नवाजा गया था। बाद में दो हिस्सों में बंटी दोआब स्टेट के एक हिस्से के वारिस कुंवर यादवेंद्र सिंह हैं। वे लंबे समय से परिवार सहित दिल्ली में रहते हैं। अपनी हवेली में चोरी के संबंध में 22 मार्च 2015 को उन्होंने पिसावा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
उन्होंने बताया था कि वे मां की बीमारी के चलते तीन माह तक पिसावा हवेली नहीं आए। 21 मार्च को यहां पहुंचे तो पता चला कि उनकी हवेली से बेशकीमती हथियार-ट्राफियां, जेवरात आदि चोरी हो गए हैं। उन्होंने मुकदमे में यह भी बताया कि किला व हवेली की निगरानी-देखभाल रायपुर निवासी जगदीश सिंह समेत पांच नौकर करते हैं। चाबियां जगदीश के पास रहती हैं।
हमने इस चोरी के खुलासे के लिए हर स्तर पर दस्तक दी। पुलिस किसी तरह की मदद नहीं कर पाई। आज तक चोरी का राज उजागर नहीं हुआ। कम से कम हमें चोरी करने वाले का नाम व हमारा बेशकीमती सामान मिल जाता, जो हमारे खानदान की निशानियां थीं। - कुंवर यादवेंद्र सिंह, पिसावा रियासत
इस तरह की पुरानी घटनाओं में एफआर के बाद भी पड़ताल और खोजबीन जारी रहती है। समय-समय पर इस तरह की घटनाओं की समीक्षा होती है। इस विषय में नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। - अमृत जैन, पुलिस अधीक्षक देहात
इस तरह घटनाक्रम
- 21 मार्च 2015 को 3 माह बाद स्टेट स्वामी कुंवर हवेली पहुंचे
- 22 मार्च 2015 को उन्होंने चोरी का मुकदमा दर्ज कराया
- 2015 अगस्त में इस मुकदमे की जांच क्राइम ब्रांच को दी गई
- 2018 जून माह में पुलिस ने साक्ष्य न मिलने पर एफआर लगा दी
ये गया था चोरी
चोरी गए सामान में 11 एंटिक विदेशी हथियारों में 7 लाइसेंसी व 4 ऐसे हथियार जिन्हें लाइसेंस की जरूरत नहीं थी। इनमें 12 बोर की तीन बंदूक, 32 बोर की दो रिवाल्वर, दो रायफल आदि शामिल हैं। इनके साथ ही 500 ग्राम सोना जड़ित दो और चांदी जड़ित पांच बेशकीमती विदेशी ट्राफियां, चांदी के बर्तन-सिक्के, जेवरात शामिल हैं।
विवेचना में ये हुए प्रयास
पुलिस ने हवेली के कर्मचारियों व उनके रिश्तेदारों तक अपनी पूछताछ सीमित रखी। थाना स्तर पर जब विवेचना आगे नहीं बढ़ी तो कुंवर यादवेंद्र ने लखनऊ में डीजीपी से मुलाकात कर शिकायत की। विवेचना जिला स्तर पर क्राइम ब्रांच को दे दी गई। क्राइम ब्रांच ने भी कर्मचारियों व उनके रिश्तेदारों को पूछताछ के लिए बुलाया। तीन वर्ष तक चले प्रयास में कोई सुराग नहीं मिलने पर पुलिस ने जून 2018 में अंतिम रिपोर्ट दे दी। पुलिस के इस रवैये से खफा स्टेट स्वामी कुंवर यादवेंद्र सिंह भी बेशक थककर रह गए, लेकिन अंग्रेजी शासन काल की रियासत से बेशकीमती विरासत की चोरी का दर्द आज भी उनके सीने में है।