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राष्ट्रीय आंदोलन में आरएसएस के मुकाबले देवबंदी ज्यादा रहे

Mon, 04 Mar 2019 01:35 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 04 Mar 2019 01:35 AM IST
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राष्ट्रीय आंदोलन में आरएसएस के मुकाबले देवबंदी ज्यादा रहे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब का कहना है कि राष्ट्रीय आंदोलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुकाबले देवबंदी ज्यादा रहे।
जैश-ए-मोहम्मद का आतंकवादी पकड़े जाने के बाद देवबंद को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं। प्रो. इरफान हबीब कहते हैं कि गदर (1857) के बाद दारुल उलूम देवबंद कायम हुआ था। इसका उद्देश्य मुसलमानों को धार्मिक शिक्षा प्रदान करना था। इसमें अहले हदीस को अहमियत दी गई। यानी शरीयत को समझने और उसके ढंग से पालन के लिए सीधे कुरान और हदीस का अध्ययन करना चाहिए।


प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि एएमयू संस्थापक सर सैयद अहमद खान देवबंद के खिलाफ थे। उनका मानना था कि दीनियात पढ़ाकर कोई फायदा नहीं। देवबंद के स्कालरों ने मुस्लिम लीग के खिलाफ कांग्रेस का पूरा साथ दिया। 1946 में तो मुस्लिम लीग के खिलाफ पंफलेट भी निकाला गया। इसकी वजह से देश की आजादी के बाद इनकी बहुत इज्जत हुई। ये लोग सरकारी ग्रांट नहीं लेते हैं।
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