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जिला अस्पात में एंटी रैबीज नहीं युवती को बंदर ने काटा
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
प्रदेश स्तर से ही आपूर्ति नहीं होने से जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। इससे कुत्ता या बंदर के काटने के बाद यहां इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पहासू हाउस के पास टोडर सिंह कंपाउंड की रहने वाली एक युवती मथुरा के एक शिक्षण संस्थान में टीचर है। वह यहां पर अपने घर पर आई थी। युवती को बंदर ने काट लिया। जिसके बाद उसे मलखान सिंह जिला अस्पताल ले जाया गया।
जब यहां पर बताया गया कि एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। इसके बाद वहां पर कुछ लोगों ने सलाह दी कि तीन मरीज और तलाश लें, जिसके बाद एक वायल खरीद कर चार मरीजों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। जिससे खर्चा चार जगह बंट जाएगा। लेकिन इस प्रस्ताव को नकारते हुए युवती के परिजन उसे निजी क्लीनिक में ले गए।
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प्रदेश स्तर से ही आपूर्ति नहीं होने से जिला अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। इससे कुत्ता या बंदर के काटने के बाद यहां इंजेक्शन लगवाने के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पहासू हाउस के पास टोडर सिंह कंपाउंड की रहने वाली एक युवती मथुरा के एक शिक्षण संस्थान में टीचर है। वह यहां पर अपने घर पर आई थी। युवती को बंदर ने काट लिया। जिसके बाद उसे मलखान सिंह जिला अस्पताल ले जाया गया।
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जब यहां पर बताया गया कि एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। इसके बाद वहां पर कुछ लोगों ने सलाह दी कि तीन मरीज और तलाश लें, जिसके बाद एक वायल खरीद कर चार मरीजों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। जिससे खर्चा चार जगह बंट जाएगा। लेकिन इस प्रस्ताव को नकारते हुए युवती के परिजन उसे निजी क्लीनिक में ले गए।
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