{"_id":"5c608d2fbdec2273724c4d1c","slug":"201549831471-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाषा विज्ञानी पद्मश्री प्रो. अनविता अब्बी को अवार्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाषा विज्ञानी पद्मश्री प्रो. अनविता अब्बी को अवार्ड
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अलीगढ़।
भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए कार्य करने वाली जेएनयू की भाषा विज्ञानी पद्मश्री प्रो. अनविता अब्बी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रो. अब्बी ने ‘भारतीय भाषाई विविधता हमसे क्या कहती है’ विषय पर व्याख्यान भी दिया।
एएमयू के समाज विज्ञान संकाय में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. अब्बी को कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने सम्मानित किया। प्रो. अब्बी ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता देश को एक विशिष्ट चरित्र प्रदान करती है और इस तथ्य के बावजूद कि भारतीय संविधान में केवल 22 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को सरकारी भाषाओं का दर्जा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि देश में 1368 मातृ भाषाएं प्रचलित हैं। इसके बावजूद लोग दूसरी भाषाओं के प्रति भी आदर रखते हैं तथा उन्हें प्रयोग में लाते हैं। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने प्रो. अनविता अब्बी से एएमयू के भाषा विज्ञान विभाग में एडजंट फैकल्टी के रूप में सेवाएं देने का आग्रह किया।
विज्ञापन
भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एस इम्तियाज हसनैन ने कहा कि प्रोफेसर अब्बी ने अंडमानी भाषा पर गहरा शोध कार्य किया है तथा उनके प्रयत्नों से अंडमानी भाषाओं जरावा तथा ओंगे को नए भारतीय भाषाई परिवार के रूप में पहचान मिली है।
विज्ञापन
भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए कार्य करने वाली जेएनयू की भाषा विज्ञानी पद्मश्री प्रो. अनविता अब्बी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस मौके पर प्रो. अब्बी ने ‘भारतीय भाषाई विविधता हमसे क्या कहती है’ विषय पर व्याख्यान भी दिया।
एएमयू के समाज विज्ञान संकाय में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. अब्बी को कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने सम्मानित किया। प्रो. अब्बी ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता देश को एक विशिष्ट चरित्र प्रदान करती है और इस तथ्य के बावजूद कि भारतीय संविधान में केवल 22 राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को सरकारी भाषाओं का दर्जा दिया गया है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि देश में 1368 मातृ भाषाएं प्रचलित हैं। इसके बावजूद लोग दूसरी भाषाओं के प्रति भी आदर रखते हैं तथा उन्हें प्रयोग में लाते हैं। कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने प्रो. अनविता अब्बी से एएमयू के भाषा विज्ञान विभाग में एडजंट फैकल्टी के रूप में सेवाएं देने का आग्रह किया।
विज्ञापन
भाषा विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एस इम्तियाज हसनैन ने कहा कि प्रोफेसर अब्बी ने अंडमानी भाषा पर गहरा शोध कार्य किया है तथा उनके प्रयत्नों से अंडमानी भाषाओं जरावा तथा ओंगे को नए भारतीय भाषाई परिवार के रूप में पहचान मिली है।