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एएमयू के शिक्षक और छात्रों के दिल के करीब थे जस्टिस सच्चर
Updated Sat, 21 Apr 2018 02:44 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सच्चर कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस राजेंद्र सच्चर के निधन की खबर से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शोक की लहर दौड़ गई है। वह कई बार अलीगढ़ आए थे।
एएमयू के कई शिक्षक, छात्र एवं पूर्व छात्रों से उनके गहरे ताल्लुकात थे। छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने उनके अंतिम संस्कार में शामिल होकर एएमयू की तरफ से श्रद्धासुमन अर्पित किए।
जस्टिस सच्चर की पहचान एक न्यायाधीश के साथ ही शीर्ष मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर होती है। उन्होंने अल्पसंख्यकों की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति पर चर्चित रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से जाना जाता है। इसमें देश में मुस्लिमों की स्थिति अनुसूचित जाति और जनजाति से भी बदतर बताई गई थी।
राजेंद्र सच्चर न सिर्फ न्यायपालिका बल्कि मानवता के स्तंभ थे। वह अल्पसंख्यकों के प्रवक्ता भी थे। कमेटी के अध्यक्ष बने तो सीधे फोन कर मुझसे भारत के मुसलमानों के उत्थान के लिए सुझाव मांगे थे। हमने एक देशभक्त एवं कानून का जानकार खो दिया।
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- प्रो. एम शब्बीर, एएमयू विधि विभाग के पूर्व डीन।
राजेंद्र सच्चर जैसा दूसरा इंसान अब पैदा नहीं होगा। उन्होंने अपनी रिपोर्ट के माध्यम से देश के मुस्लिमों की आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति की तस्वीर तस्वीर पेश की और उसे दूर करने के सुझाव भी दिए। मेरा सौभाग्य है कि उनके करीब रहने का मौका मिला।
- उमर सलीम पीरजादा, एएमयू पीआरओ।
जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने मुस्लिम व अनुसूचित जाति के लिए अनमोल कार्य किए। उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने दिल्ली आया हूं। उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। हम सरकार से मांग करते हैं कि वह सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करे।
- मशकूर अहमद उस्मानी, अध्यक्ष एएमयू छात्र संघ ।
राजेंद्र सच्चर 1990 के दंगे के बाद अलीगढ़ आए थे और कई दिनों तक रहकर पीयूसीएल के लिए जांच की थी। उस समय प्रो. एमएम फारूकी एएमयू वीसी थे। एएमयू के कार्यक्रमों में वह कई बार शामिल हुए। वह मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहते थे। उनसे कई बार मिल चुका हूं।
- डॉ. राहत अबरार, एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक, पूर्व पीआरओ।
न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर का चले जाना एक अपूरणीय क्षति है। वाकई में यह उन तमाम लोगों के लिए एक गहरा झटका है जो इंसाफ पसंद है और संविधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले एक महान व्यक्ति चले गए हैं। नवजवानों से उन्हें बहुत उम्मीद थी।
- दीबा नियाजी, एएमयू शोध छात्रा।
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सच्चर कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस राजेंद्र सच्चर के निधन की खबर से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शोक की लहर दौड़ गई है। वह कई बार अलीगढ़ आए थे।
एएमयू के कई शिक्षक, छात्र एवं पूर्व छात्रों से उनके गहरे ताल्लुकात थे। छात्र संघ के अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी ने उनके अंतिम संस्कार में शामिल होकर एएमयू की तरफ से श्रद्धासुमन अर्पित किए।
जस्टिस सच्चर की पहचान एक न्यायाधीश के साथ ही शीर्ष मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर होती है। उन्होंने अल्पसंख्यकों की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक स्थिति पर चर्चित रिपोर्ट पेश की थी, जिसे सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से जाना जाता है। इसमें देश में मुस्लिमों की स्थिति अनुसूचित जाति और जनजाति से भी बदतर बताई गई थी।
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राजेंद्र सच्चर न सिर्फ न्यायपालिका बल्कि मानवता के स्तंभ थे। वह अल्पसंख्यकों के प्रवक्ता भी थे। कमेटी के अध्यक्ष बने तो सीधे फोन कर मुझसे भारत के मुसलमानों के उत्थान के लिए सुझाव मांगे थे। हमने एक देशभक्त एवं कानून का जानकार खो दिया।
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- प्रो. एम शब्बीर, एएमयू विधि विभाग के पूर्व डीन।
राजेंद्र सच्चर जैसा दूसरा इंसान अब पैदा नहीं होगा। उन्होंने अपनी रिपोर्ट के माध्यम से देश के मुस्लिमों की आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक स्थिति की तस्वीर तस्वीर पेश की और उसे दूर करने के सुझाव भी दिए। मेरा सौभाग्य है कि उनके करीब रहने का मौका मिला।
- उमर सलीम पीरजादा, एएमयू पीआरओ।
जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने मुस्लिम व अनुसूचित जाति के लिए अनमोल कार्य किए। उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करने दिल्ली आया हूं। उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुए। हम सरकार से मांग करते हैं कि वह सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करे।
- मशकूर अहमद उस्मानी, अध्यक्ष एएमयू छात्र संघ ।
राजेंद्र सच्चर 1990 के दंगे के बाद अलीगढ़ आए थे और कई दिनों तक रहकर पीयूसीएल के लिए जांच की थी। उस समय प्रो. एमएम फारूकी एएमयू वीसी थे। एएमयू के कार्यक्रमों में वह कई बार शामिल हुए। वह मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहते थे। उनसे कई बार मिल चुका हूं।
- डॉ. राहत अबरार, एएमयू उर्दू अकादमी के निदेशक, पूर्व पीआरओ।
न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर का चले जाना एक अपूरणीय क्षति है। वाकई में यह उन तमाम लोगों के लिए एक गहरा झटका है जो इंसाफ पसंद है और संविधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मानवाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले एक महान व्यक्ति चले गए हैं। नवजवानों से उन्हें बहुत उम्मीद थी।
- दीबा नियाजी, एएमयू शोध छात्रा।