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नाम कटने के डर से बच्चे नहीं छोड़ेंगे स्कूल
Updated Mon, 10 Dec 2018 01:31 AM IST
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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
राज्य सरकार द्वारा विगत दिनों जारी किए गए नए आदेशों से जिले में अब बच्चे स्कूल को नहीं छोड़ेंगे। 45 दिन बच्चों के स्कूल न आने पर नाम काट दिया जाएगा। जिसके बाद लर्निंग आउट कम का दायित्व अब शिक्षकों का बड़ा दायित्व भी बनेगा। वहीं रिजल्ट को ग्रेडिंग का आधार बनाने पर भी शिक्षकों की शिक्षा शैली का मापन होगा। बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि सरकार का निर्णय अच्छा है। बच्चों के नाम कटने का डर अभिभावक को लगने लगेगा तो बच्चा स्कूल ही नहीं छोड़ेगा। वहीं शिक्षकों की नामांकन संख्या कम हो जाएगी तो उनका लर्निंग आउटकम का दायित्व भी बढ़ जाएगा।
बता दें कि अभी हाल ही में शासन ने बेसिक शिक्षा परिषद में कई अहम फैसले लिए। जिसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाला बच्चा यदि 45 दिन तक स्कूल नहीं आता है तो उसका नाम काट दिया जाएगा। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संयुक्त मंत्री मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों के स्कूल से गायब रहने के मामले अब कम हो जाएंगे। हालांकि कई स्थितियों में शिक्षकों को कठिनाई का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन जब अभिभावक को पता चल जाएगा कि नि:शुल्क शिक्षा से उनका बच्चा बिना स्कूल जाए वंचित हो जाएगा तो वह अपने बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजेंगे। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया है कि बच्चों के मन से शिक्षक का डर खत्म हो गया था। इसलिए बच्चे स्कूल कम आते थे, लेकिन सरकार के इस फैसले से अब बच्चे डरने लगेंगे कि उनका नाम स्कूल न जाने पर कट जाएगा। साथ ही कहा कि सरकार को 45 दिन की जगह 15 दिन स्कूल न आने पर बच्चों के नाम काटने का आदेश देना चाहिए। क्योंकि जब अभिभावकों को मालूम होगा कि बच्चे के स्कूल न जाने से वजीफा, स्कूल बैग, ड्रेस सहित नि:शुल्क शिक्षा नहीं मिलेगी तो बच्चों की संख्या स्कूल में यथावत रहेगी।
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राज्य सरकार द्वारा विगत दिनों जारी किए गए नए आदेशों से जिले में अब बच्चे स्कूल को नहीं छोड़ेंगे। 45 दिन बच्चों के स्कूल न आने पर नाम काट दिया जाएगा। जिसके बाद लर्निंग आउट कम का दायित्व अब शिक्षकों का बड़ा दायित्व भी बनेगा। वहीं रिजल्ट को ग्रेडिंग का आधार बनाने पर भी शिक्षकों की शिक्षा शैली का मापन होगा। बीएसए डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि सरकार का निर्णय अच्छा है। बच्चों के नाम कटने का डर अभिभावक को लगने लगेगा तो बच्चा स्कूल ही नहीं छोड़ेगा। वहीं शिक्षकों की नामांकन संख्या कम हो जाएगी तो उनका लर्निंग आउटकम का दायित्व भी बढ़ जाएगा।
बता दें कि अभी हाल ही में शासन ने बेसिक शिक्षा परिषद में कई अहम फैसले लिए। जिसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाला बच्चा यदि 45 दिन तक स्कूल नहीं आता है तो उसका नाम काट दिया जाएगा। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला संयुक्त मंत्री मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बच्चों के स्कूल से गायब रहने के मामले अब कम हो जाएंगे। हालांकि कई स्थितियों में शिक्षकों को कठिनाई का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन जब अभिभावक को पता चल जाएगा कि नि:शुल्क शिक्षा से उनका बच्चा बिना स्कूल जाए वंचित हो जाएगा तो वह अपने बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजेंगे। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने बताया है कि बच्चों के मन से शिक्षक का डर खत्म हो गया था। इसलिए बच्चे स्कूल कम आते थे, लेकिन सरकार के इस फैसले से अब बच्चे डरने लगेंगे कि उनका नाम स्कूल न जाने पर कट जाएगा। साथ ही कहा कि सरकार को 45 दिन की जगह 15 दिन स्कूल न आने पर बच्चों के नाम काटने का आदेश देना चाहिए। क्योंकि जब अभिभावकों को मालूम होगा कि बच्चे के स्कूल न जाने से वजीफा, स्कूल बैग, ड्रेस सहित नि:शुल्क शिक्षा नहीं मिलेगी तो बच्चों की संख्या स्कूल में यथावत रहेगी।
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