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तब हॉकी में कलात्मकता थी, मगर अब उसकी जगह तेजी ने ले ली है: नेहा
डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
Updated Tue, 23 Oct 2018 03:07 PM IST
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हॉकी के मैदान में हॉकी की ‘महारथी’ ने भी माना है कि हॉकी बदल रही है। वे कहती हैं कि वक्त के साथ हॉकी खेल ने भी अपना चोला बदला है। पहले हॉकी में कलात्मकता थी, अब तेजी है। यह ‘महारथी’ डीएस कॉलेज में चल रही अखिल भारतीय आमंत्रण महिला हॉकी प्रतियोगिता में खेल रही हैं। इनमें नेहा सिंह भी हैं, जो टीम इंडिया (2005) की कप्तान के साथ हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की नातिन भी हैं।
अपनी भांजी (बहन की बेटी) नेहा के खेल के ओलंपियन अशोक कुमार कायल रहे। बीच-बीच में उनका हौसला भी बढ़ाते रहे। कभी मामा (अशोक कुमार) को हॉकी खेलते नेहा ने देखा था, तो रविवार को नेहा के खेल को मामा देख रहे थे। नेहा, अर्जुन अवार्डी प्रीतम व एशियन गेम्स की सिल्वर मेडल विजेता टीम की सदस्य कमला दलाल ने अमर उजाला को बताया कि पहले की हॉकी में खूबसूरती थी। नजाकत थी। मूवमेंट था। अब केवल तेजी है।
अगर फिटनेस है, तो गेम में बने रहेंगे। संयोग से तीनों नार्दर्न रेलवे से खेल रही हैं। नेहा ने कहा कि महिला हॉकी का लगातार ग्राफ बढ़ रहा है। सरकारों सहित सभी का सहयोग मिल रहा है। लड़कियां इस खेल में तेजी से आ रही हैं, जो महिला हॉकी के लिए शुभ संकेत है। बेटी अब बेटी नहीं रही, बल्कि परिवार के लिए अभिमान बन चुकी हैं। अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं।
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अपनी भांजी (बहन की बेटी) नेहा के खेल के ओलंपियन अशोक कुमार कायल रहे। बीच-बीच में उनका हौसला भी बढ़ाते रहे। कभी मामा (अशोक कुमार) को हॉकी खेलते नेहा ने देखा था, तो रविवार को नेहा के खेल को मामा देख रहे थे। नेहा, अर्जुन अवार्डी प्रीतम व एशियन गेम्स की सिल्वर मेडल विजेता टीम की सदस्य कमला दलाल ने अमर उजाला को बताया कि पहले की हॉकी में खूबसूरती थी। नजाकत थी। मूवमेंट था। अब केवल तेजी है।
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अगर फिटनेस है, तो गेम में बने रहेंगे। संयोग से तीनों नार्दर्न रेलवे से खेल रही हैं। नेहा ने कहा कि महिला हॉकी का लगातार ग्राफ बढ़ रहा है। सरकारों सहित सभी का सहयोग मिल रहा है। लड़कियां इस खेल में तेजी से आ रही हैं, जो महिला हॉकी के लिए शुभ संकेत है। बेटी अब बेटी नहीं रही, बल्कि परिवार के लिए अभिमान बन चुकी हैं। अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रही हैं।
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