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पशुओं का हर इलाज अब पॉली क्लीनिक में
Updated Thu, 12 Apr 2018 01:56 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
बांझपन, कृत्रिम गर्भाधान, हड्डी टूटने पर एक्सरे, पेट खराब होने पर अल्ट्रा सोनोग्राफी, गंभीर चोट या किसी खास बीमारी पर छोटा या बड़ा ऑपरेशन। दूध, खून, गोबर, मल और मूत्र की जांच हो या ब्लड प्रेशर। बेजुबान पशु पक्षियों की तमाम बीमारियों का इलाज अब आधुनिक पॉली क्लीनिक में होगा। जरूरत पड़ने पर यहां पशुओं को भर्ती भी कराया जा सकेगा।
वर्तमान में जिले के तकरीबन 15.40 लाख पशु पक्षियों के मालिक इस अस्पताल की सुविधाओं का लाभ उठा कर अपने पशुओं का इलाज करा सकेंगे। यहां गाय, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गा, सुअर, कुत्ता, घरेलू पालतू जानवर, पक्षियों सहित अन्य आवारा जानवरों का हर तरह का इलाज हो सकेगा।
ये पॉली क्लीनिक क्वार्सी कृषि फार्म स्थित सूकर पालन केंद्र के पास बन कर तैयार हो गया है। 6 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत का ये अस्पताल जल्द ही चालू हो जाएगा। एक सुपरिंटेंडेंट, चार पशु चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक लैब तकनीशियन सहित एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी यहां तैनात किया जाएगा। एक आधुनिक लैब में पशुओं के सभी रोगों की हर तरह की जांच होगी। उनकी हर तरीके की सर्जरी भी यहां होगी।
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अब पशुपालकों को मवेशियों की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना होगा। पॉली क्लीनिक के साथ ही यहां पर एक मीट टेस्टिंग लैब भी बन कर तैयार है। पशु पालन निदेशालय के निर्देश पर एपीडा की देखरेख में यहां मांस की गुणवत्ता की जांच होगी।
अलीगढ़ में संचालित मीट एक्सपोर्ट यूनिटों में तैयार होने वाले एक्सपोर्ट क्वालिटी मीट की यहां गुणवत्ता जांच हो सकेगी, जो अभी तक दूसरे शहरों में कराई जाती है। इसके साथ ही देहलीगेट स्थित सदर पशु अस्पताल में भी 35 लाख रुपये की लागत से पशु रोग निदान प्रयोगशाला बन कर तैयार है। यहां भी पशुओं की बीमारी पर सभी तरह की जांच होगी।
इस वर्ष पशुगणना की तैयारी
हर पांच वर्ष बाद होने वाली पशु गणना की तैयारी हो रही है। वर्ष 2018 में पशु गणना की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2012 में गणना की गई थी। इस वर्ष पशुओं की संख्या बढ़ने का अनुमान है। अभी तक शासन से इसके लिए आदेश नहीं आए हैं।
वर्तमान में पशुओं की संख्या
गोवंश 2 लाख दो हजार 810
मर्हिष वंशी 11 लाख 30 हजार 904
बकरी 1 लाख 73 हजार 119
सुअर 19 हजार 140
भेड़ 10 हजार 463
मुर्गी मुर्गा 2 लाख 3 हजार 924
(स्रोत : पशुगणना 2012 के अनुसार)
वर्ष 2007 में पशुओं की संख्या
गोवंश 1 लाख 53 हजार 453
मर्हिष वंशी 8 लाख 41 हजार 392
बकरी 1 लाख 72 हजार 196
सुअर 25 हजार 711
भेड़ 11 हजार 841
मुर्गी मुर्गा 2 लाख 30 हजार 846
(स्रोत : पशुगणना 2007 के अनुसार)
12 लाख 68 हजार पशुओं का टीकाकरण जारी
खुरपका और मुंहपका रोग नियंत्रण टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो गया है। जिसमें 34 टीमें बनाई गई हैं। इसमें 34 पशु चिकित्साधिकारी, 70 पशु धन प्रसार अधिकारी और 80 पशु मित्रों के साथ 34 चतुर्थ श्रेणी कर्मी कार्य कर रहे हैं। इसके लिए दस बहुउद्देशीय पशु चिकित्सा वाहन (टाटा सूमो) लगाए गए हैं। जिले में 12 लाख 68 हजार पशुओं का टीकाकरण होना है।
अब बकरी पालन का प्रशिक्षण भी अलीगढ़ में..
बकरी पालन करने के इच्छुक लोगों को अब मथुरा तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उनको अलीगढ़ में ही पशु पालन विभाग की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए नये बने पॉली क्लीनिक भवन में व्यवस्था की जा रही है। निदेशालय से इस संबंध में अनुमति मांगी गई है। अभी तक अलीगढ़ के लोग मथुरा के फरह स्थित सेंट्रल बोर्ड ऑफ रिसर्च इंस्टीट्यूट सीजीआरआई में प्रशिक्षण लेने जाते थे। ये प्रशिक्षण दस दिवसीय होता हैै।
जिले के लाखों पशुपालकों के लिए पॉली क्लीनिक, सदर अस्पताल की लैब एक बड़ी सुविधा साबित होगी। इस वर्ष में इसको चालू करा दिया जाएगा। पॉली क्लीनिक में बकरी प्रशिक्षण केंद्र शुरू कराने के लिए निदेशालय को प्रस्ताव भेज रहे हैं। पशुगणना भी इस वर्ष होनी है।
-डा. केपी वार्ष्णेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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बांझपन, कृत्रिम गर्भाधान, हड्डी टूटने पर एक्सरे, पेट खराब होने पर अल्ट्रा सोनोग्राफी, गंभीर चोट या किसी खास बीमारी पर छोटा या बड़ा ऑपरेशन। दूध, खून, गोबर, मल और मूत्र की जांच हो या ब्लड प्रेशर। बेजुबान पशु पक्षियों की तमाम बीमारियों का इलाज अब आधुनिक पॉली क्लीनिक में होगा। जरूरत पड़ने पर यहां पशुओं को भर्ती भी कराया जा सकेगा।
वर्तमान में जिले के तकरीबन 15.40 लाख पशु पक्षियों के मालिक इस अस्पताल की सुविधाओं का लाभ उठा कर अपने पशुओं का इलाज करा सकेंगे। यहां गाय, भैंस, बकरी, भेड़, मुर्गा, सुअर, कुत्ता, घरेलू पालतू जानवर, पक्षियों सहित अन्य आवारा जानवरों का हर तरह का इलाज हो सकेगा।
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ये पॉली क्लीनिक क्वार्सी कृषि फार्म स्थित सूकर पालन केंद्र के पास बन कर तैयार हो गया है। 6 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत का ये अस्पताल जल्द ही चालू हो जाएगा। एक सुपरिंटेंडेंट, चार पशु चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक लैब तकनीशियन सहित एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी यहां तैनात किया जाएगा। एक आधुनिक लैब में पशुओं के सभी रोगों की हर तरह की जांच होगी। उनकी हर तरीके की सर्जरी भी यहां होगी।
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अब पशुपालकों को मवेशियों की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों में नहीं जाना होगा। पॉली क्लीनिक के साथ ही यहां पर एक मीट टेस्टिंग लैब भी बन कर तैयार है। पशु पालन निदेशालय के निर्देश पर एपीडा की देखरेख में यहां मांस की गुणवत्ता की जांच होगी।
अलीगढ़ में संचालित मीट एक्सपोर्ट यूनिटों में तैयार होने वाले एक्सपोर्ट क्वालिटी मीट की यहां गुणवत्ता जांच हो सकेगी, जो अभी तक दूसरे शहरों में कराई जाती है। इसके साथ ही देहलीगेट स्थित सदर पशु अस्पताल में भी 35 लाख रुपये की लागत से पशु रोग निदान प्रयोगशाला बन कर तैयार है। यहां भी पशुओं की बीमारी पर सभी तरह की जांच होगी।
इस वर्ष पशुगणना की तैयारी
हर पांच वर्ष बाद होने वाली पशु गणना की तैयारी हो रही है। वर्ष 2018 में पशु गणना की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2012 में गणना की गई थी। इस वर्ष पशुओं की संख्या बढ़ने का अनुमान है। अभी तक शासन से इसके लिए आदेश नहीं आए हैं।
वर्तमान में पशुओं की संख्या
गोवंश 2 लाख दो हजार 810
मर्हिष वंशी 11 लाख 30 हजार 904
बकरी 1 लाख 73 हजार 119
सुअर 19 हजार 140
भेड़ 10 हजार 463
मुर्गी मुर्गा 2 लाख 3 हजार 924
(स्रोत : पशुगणना 2012 के अनुसार)
वर्ष 2007 में पशुओं की संख्या
गोवंश 1 लाख 53 हजार 453
मर्हिष वंशी 8 लाख 41 हजार 392
बकरी 1 लाख 72 हजार 196
सुअर 25 हजार 711
भेड़ 11 हजार 841
मुर्गी मुर्गा 2 लाख 30 हजार 846
(स्रोत : पशुगणना 2007 के अनुसार)
12 लाख 68 हजार पशुओं का टीकाकरण जारी
खुरपका और मुंहपका रोग नियंत्रण टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हो गया है। जिसमें 34 टीमें बनाई गई हैं। इसमें 34 पशु चिकित्साधिकारी, 70 पशु धन प्रसार अधिकारी और 80 पशु मित्रों के साथ 34 चतुर्थ श्रेणी कर्मी कार्य कर रहे हैं। इसके लिए दस बहुउद्देशीय पशु चिकित्सा वाहन (टाटा सूमो) लगाए गए हैं। जिले में 12 लाख 68 हजार पशुओं का टीकाकरण होना है।
अब बकरी पालन का प्रशिक्षण भी अलीगढ़ में..
बकरी पालन करने के इच्छुक लोगों को अब मथुरा तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उनको अलीगढ़ में ही पशु पालन विभाग की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए नये बने पॉली क्लीनिक भवन में व्यवस्था की जा रही है। निदेशालय से इस संबंध में अनुमति मांगी गई है। अभी तक अलीगढ़ के लोग मथुरा के फरह स्थित सेंट्रल बोर्ड ऑफ रिसर्च इंस्टीट्यूट सीजीआरआई में प्रशिक्षण लेने जाते थे। ये प्रशिक्षण दस दिवसीय होता हैै।
जिले के लाखों पशुपालकों के लिए पॉली क्लीनिक, सदर अस्पताल की लैब एक बड़ी सुविधा साबित होगी। इस वर्ष में इसको चालू करा दिया जाएगा। पॉली क्लीनिक में बकरी प्रशिक्षण केंद्र शुरू कराने के लिए निदेशालय को प्रस्ताव भेज रहे हैं। पशुगणना भी इस वर्ष होनी है।
-डा. केपी वार्ष्णेय, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी