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अलीगढ़ बरेली ट्रैक की स्पीड बढ़ी

Wed, 11 Apr 2018 02:00 AM IST
Updated Wed, 11 Apr 2018 02:00 AM IST
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अलीगढ़ बरेली ट्रैक की स्पीड बढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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अलीगढ़ से अतरौली ब्रांच लाइन रेलवे ट्रैक पर ट्रेनोें के संचालन के लिए अंग्रेजों के जमाने का टोकन सिस्टम हटा लिया गया है। अब इसको पैनल सिस्टम में तब्दील किया गया है।

अलीगढ़ से मंजूरगढ़ी के बीच ये सिस्टम दिसंबर 2017 में लगा दिया गया था। अब मंजूरगढ़ी से हरदुआगंज और हरदुआगंज से अतरौली के बीच इसका काम पूरा कर दिया गया है। इस तरह से अलीगढ़ से अतरौली तक का ट्रैक नए सिस्टम से लैस हो गया है।
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पुराने सिस्टम में इस 26 किमी के रास्ते को तय करने में एक घंटे से ज्यादा का समय लगता था, लेकिन अब ये दूरी लगभग 35 मिनट में पूरी होगी। तकरीबन 25 मिनट का समय बचेगा।
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हरदुआगंज स्टेशन में बने पूर्वी और पश्चिमी दोनों केबिन समाप्त कर दिए गए हैं। यहां तैनात सात कर्मियों में से तीन को टूंडला और बाकी को हरदुआगंज में ही शिफ्ट कर दिया गया है। डीटीएम टूंडला समर्थ गुप्ता और सीनियर डिवीजनल सिग्नल एंड टेलीकम्यूनिकेशन इंजीनियर मुकेश कुमार की देखरेख में ये काम पूरा किया गया है।

अलीगढ़ को बरेली और मुरादाबाद से जोड़ने वाला ये ट्रैक सिंगल है। अलीगढ़ से चंदौसी पहुंचने के बाद वहां से बरेली और मुरादाबाद की अलग-अलग रेल लाइन निकलती है। हरदुआगंज तक का सेक्शन इलाहाबाद मंडल में आता है। हरदुआगंज और अतरौली के बीच से ही मुरादाबाद मंडल शुरू हो जाता है।

1- टोकन सिस्टम... इसको रेलवे की भाषा में अथारिटी टू प्रोसिड यानी ट्रेन चलाने की अनुमति कहते हैं, जो संबंधित ट्रेन के ड्राइवर को दी जाती है। सिंगल लाइन रेलवे ट्रैक, जहां अप और डाउन दोनों तरह की ट्र्रेनें चलती हैं। वहां ट्रेन एक्सीडेंट को रोकने के लिए टोकन सिस्टम को लागू किया गया था। इस सिस्टम में दो स्टेशनों के बीच चलने वाली ट्रेन के ड्राइवर को स्टेशन मास्टर कार्यालय में लगी एक खास मशीन से निकाल कर एक टोकन दिया जाता था। ये टोकन मिलने के बाद ही ड्राइवर उस स्टेशन से आगे के स्टेशन का सफर करता था। अगले स्टेशन पर पहुंचकर वहां के स्टेशन मास्टर को पहला टोकन देकर दूसरा टोकन लेना पड़ता था। इसी तरह से हर दो स्टेशन पर एक खास टोकन से केवल एक ट्रेन चलती थी। इसमें ये भी खास बात थी कि जिन दो स्टेशनों के बीच एक ट्रेन को चलने का टोकन दिया जाता था। उन दोनों स्टेशनों की टोकन मशीन ऑटोमैटिकली लॉक हो जाती थी। उससे दूसरा टोकन नहीं निकल सकता था। जब तक कि उन स्टेशनों के बीच चल रही ट्रेन संबंधित गंतव्य स्टेशन तक न पहुंच जाए। इसमें टोकन लेने और देने में काफी समय लगता था। इस ट्रैक पर स्टैंडर्ड स्पीड 50 किमी प्रति घंटा तक रहती थी।

2- पैनल सिस्टम... ये एसएसआई यानी सालिड स्टेट इंटरलॉकिंग सिस्टम है। जिसमें एक आधुनिक प्वाइंट मोटर रेलवे ट्रैक को सेट कर उसका सिग्नल भी सेट कर देती है। इसके लिए स्टेशन मास्टर कक्ष में एक आधुनिक सिस्टम लगता है। इसमें केबिन की व्यवस्था भी खत्म हो जाती है। सारा काम एक बटन दबाने से हो जाता है। इसमें स्टैंडर्ड टू से ट्रेनें दौड़ती हैं, जिसमें 100 किमी तक स्पीड होती है। अलीगढ़ से हरदुआगंज के बीच सिंगल ओएचई होने से स्पीड अभी ज्यादा नहीं बढ़ेगी, लेकिन हरदुआगंज से चंदौसी के बीच डबल ओएचई लाइन होने से वहां स्पीड 100 किमी प्रति घंटा रहेगी।


1- अलीगढ़ से मंजूरगढ़ी की दूरी 8.3 किमी
2- मंजूरगढ़ी से हरदुआगंज की दूरी 4.5 किमी
3- हरदुआगंज से अतरौली की दूरी 13.5 किमी

अंग्रेजों के जमाने के टोकन सिस्टम की जगह आधुनिक पैनल सिस्टम लगने से ट्रेनों की स्पीड बढ़ेगी। मुसाफिरों को अलीगढ़ से अतरौली के बीच पहले के मुकाबले कम समय लगेगा।
- एआर खान, पूर्व एसएस अलीगढ़।
अप्रैल में इस नए पैनल सिस्टम को चालू कर दिया गया है। जिससे अब अलीगढ़ से अतरौली तक का सफर कम समय में तय होगा।
- डीके गौतम, एसएस अलीगढ़।
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