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यूपी एवं उतराखंड के 39 जिलों मे भगवाकरण के खिलाफ आंदोलन का ऐलान
Updated Tue, 28 Aug 2018 02:04 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) ने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के 39 जिलों में भगवाकरण के खिलाफ आंदोलन चलाने का ऐलान किया है। इसकी घोषणा सोमवार को शमशाद मार्केट स्थित कार्यालय में प्रांतीय अध्यक्ष एहसानुल हक ने की।
उन्होंने कहा कि ‘शिक्षा के आंतरिक उपनिवेशीकरण का विरोध : पिछड़ों के अधिकारों की मांग’ अभियान 25 अगस्त से 10 सितंबर तक उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के 39 जिलों में चलाया जा रहा है। संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सीधे छात्रों के बीच जाकर कार्यक्रम, असेंबली सदस्यों से मुलाकात, भारत के शिक्षा मंत्री को ज्ञापन, रैली, कारवां, सेमिनार, संगोष्ठी आदि का आयोजन किया जाएगा।
एसआईओ की प्रमुख मांगों में फेलोशिप के लिए बजट आवंटन में वृद्धि, एससी, एसटी एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा को रोकने के लिए रोहित अधिनियम को लागू करना, शिक्षा का भगवाकरण बंद करना, यूजीसी एवं इसकी सभी शक्तियों को बहाल करने, शिक्षा में सरकारी सेवा सुनिश्चित करने और वित्तीय स्वायत्ता निरस्त करने आदि शामिल है।
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प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद एससी, एसटी एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा बढ़ गई है। इस क्रम में उन्होंने रोहित वेमुला, नजीब अहमद एवं डॉक्टर फैयाज की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने उच्च शिक्षा पर आधारित एक सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि 2016-17 में मुस्लिम विद्यार्थियों का अनुपात उनकी 14 प्रतिशत आबादी के मुकाबले केवल 4.9 प्रतिशत था। इस अवसर पर बिलाल अहमद, कामरान अजीज आदि मौजूद थे।
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स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) ने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के 39 जिलों में भगवाकरण के खिलाफ आंदोलन चलाने का ऐलान किया है। इसकी घोषणा सोमवार को शमशाद मार्केट स्थित कार्यालय में प्रांतीय अध्यक्ष एहसानुल हक ने की।
उन्होंने कहा कि ‘शिक्षा के आंतरिक उपनिवेशीकरण का विरोध : पिछड़ों के अधिकारों की मांग’ अभियान 25 अगस्त से 10 सितंबर तक उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के 39 जिलों में चलाया जा रहा है। संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सीधे छात्रों के बीच जाकर कार्यक्रम, असेंबली सदस्यों से मुलाकात, भारत के शिक्षा मंत्री को ज्ञापन, रैली, कारवां, सेमिनार, संगोष्ठी आदि का आयोजन किया जाएगा।
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एसआईओ की प्रमुख मांगों में फेलोशिप के लिए बजट आवंटन में वृद्धि, एससी, एसटी एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा को रोकने के लिए रोहित अधिनियम को लागू करना, शिक्षा का भगवाकरण बंद करना, यूजीसी एवं इसकी सभी शक्तियों को बहाल करने, शिक्षा में सरकारी सेवा सुनिश्चित करने और वित्तीय स्वायत्ता निरस्त करने आदि शामिल है।
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प्रांतीय अध्यक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद एससी, एसटी एवं अल्पसंख्यकों के खिलाफ व्यवस्थित हिंसा बढ़ गई है। इस क्रम में उन्होंने रोहित वेमुला, नजीब अहमद एवं डॉक्टर फैयाज की घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने उच्च शिक्षा पर आधारित एक सर्वेक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि 2016-17 में मुस्लिम विद्यार्थियों का अनुपात उनकी 14 प्रतिशत आबादी के मुकाबले केवल 4.9 प्रतिशत था। इस अवसर पर बिलाल अहमद, कामरान अजीज आदि मौजूद थे।