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भारत में आधुनिक शिक्षा के विस्तार में एएमयू का सक्रिय योगदान
Updated Tue, 09 Jan 2018 01:49 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि भारत में आधुनिक शिक्षा के विस्तार में एएमयू का सक्रिय योगदान रहा है। हमलोग सर सैयद के मिशन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएंगे।
प्रो. मंसूर सोमवार को एएमयू के स्ट्रेची हॉल में एएमयू उर्दू अकादमी एवं एनसीपीयूएल नई दिल्ली के सहयोग से सर सैयद अहमद खान पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना दिवस (8 जनवरी 1877) के अवसर पर आयोजित किया गया है।
सह कुलपति प्रो. तबस्सुम शहाब ने कहा कि 1857 के बाद मुस्लिम समाज हर क्षेत्र में पूरी तरह पिछड़ गया था और सर सैयद ने इस समाज को उभारने के लिए जो कार्य किया वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता। प्रो. शहाब ने कहा कि सर सैयद के जीवन के अनेक अन छुए पहलु जो अभी तक हमारे सामने नहीं आए हैं उन्हें सामने लाना होगा।
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एनसीपीयूएल के निदेशक प्रो. इरतजा करीम ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सर सैयद की रणनीति क्या होती, इस पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम को प्रो. एआर किदवई, प्रो. शान मोहम्मद, डॉ. जुबैर शादाब खान आदि ने संबोधित किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. राहत अबरार एवं संचालन डॉ. शारिक अकील ने किया।
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एएमयू कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने कहा कि भारत में आधुनिक शिक्षा के विस्तार में एएमयू का सक्रिय योगदान रहा है। हमलोग सर सैयद के मिशन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएंगे।
प्रो. मंसूर सोमवार को एएमयू के स्ट्रेची हॉल में एएमयू उर्दू अकादमी एवं एनसीपीयूएल नई दिल्ली के सहयोग से सर सैयद अहमद खान पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना दिवस (8 जनवरी 1877) के अवसर पर आयोजित किया गया है।
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सह कुलपति प्रो. तबस्सुम शहाब ने कहा कि 1857 के बाद मुस्लिम समाज हर क्षेत्र में पूरी तरह पिछड़ गया था और सर सैयद ने इस समाज को उभारने के लिए जो कार्य किया वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता। प्रो. शहाब ने कहा कि सर सैयद के जीवन के अनेक अन छुए पहलु जो अभी तक हमारे सामने नहीं आए हैं उन्हें सामने लाना होगा।
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एनसीपीयूएल के निदेशक प्रो. इरतजा करीम ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सर सैयद की रणनीति क्या होती, इस पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम को प्रो. एआर किदवई, प्रो. शान मोहम्मद, डॉ. जुबैर शादाब खान आदि ने संबोधित किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. राहत अबरार एवं संचालन डॉ. शारिक अकील ने किया।