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...दोस्तों मेरा मोमिनों वाली गली में मकान है
Updated Thu, 14 Dec 2017 01:21 AM IST
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दोस्तों मेरा मोमिनों वाली गली में मकान है
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
बसपा पार्षद मुशर्रफ हुसैन महजर के उर्दू में शपथ लेने और नगर निगम शपथ ग्रहण समारोह में इसको लेकर हुए हंगामे को अलीगढ़ के शायरों ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। इससे पहले नगर निगम के 22 साल के इतिहास में भाषाई विवाद कभी सामने नहीं आया। जिन पार्षद मुशर्रफ हुसैन का नाम विवाद के साथ जुड़ा है, वह खुद भी शायर हैं। अलीगढ़ के शायरों ने एक से बढ़कर एक उर्दू के शेर रचे हैं। इसमें से एक अरुण साहिबाबादी का शेर है कि ‘मुझे फारसी का इल्म है और उर्दू का भी ज्ञान है, दोस्तों मेरा मोमिनों वाली गली में मकान है’।
वर्जन
उर्दू हिंदुस्तान की भाषा है। आज भी कचहरियों और पुलिस थानों में उर्दू में भी कामकाज होता है। कभी यह आम लोगों की जुबान थी। अशोक साहिल का एक मशहूर शेर ‘मेरी उर्दू को दहशतगर्द जिसने भी कहा होगा, उसे तो अपनी मां का दूध भी कड़वा लगा होगा’। यह शेर भारत की सांझा भाषाई विरासत की मिसाल है। अगर पार्षद ने उर्दू में शपथ ले भी ली, तो उसे तूल देना बेहद गलत है।
- सुरेश कुमार, गजलकार
गुलजार जिनका नाम संपूर्ण नंद कालरा है, उन्होंने लिखा है कि ‘वो यार मेरा खुशबू की तरह, है उसकी जुबां उर्दू की तरह’ इस तरह के जज्बात हिंदुस्तान में रहे हैं। उर्दू को लेकर कुछ लोगों का संकीर्ण नजरिया उनकी मानसिकता को बता देता है। हिंदुस्तान की आम जनता अपनी रोजाना की जिंदगी में हिंदी के साथ उर्दू के अल्फाज भी बोलती है। और यह सब सहज रूप से हो जाता है।
विज्ञापन
- बाबर इलियास, शायर
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
बसपा पार्षद मुशर्रफ हुसैन महजर के उर्दू में शपथ लेने और नगर निगम शपथ ग्रहण समारोह में इसको लेकर हुए हंगामे को अलीगढ़ के शायरों ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। इससे पहले नगर निगम के 22 साल के इतिहास में भाषाई विवाद कभी सामने नहीं आया। जिन पार्षद मुशर्रफ हुसैन का नाम विवाद के साथ जुड़ा है, वह खुद भी शायर हैं। अलीगढ़ के शायरों ने एक से बढ़कर एक उर्दू के शेर रचे हैं। इसमें से एक अरुण साहिबाबादी का शेर है कि ‘मुझे फारसी का इल्म है और उर्दू का भी ज्ञान है, दोस्तों मेरा मोमिनों वाली गली में मकान है’।
वर्जन
उर्दू हिंदुस्तान की भाषा है। आज भी कचहरियों और पुलिस थानों में उर्दू में भी कामकाज होता है। कभी यह आम लोगों की जुबान थी। अशोक साहिल का एक मशहूर शेर ‘मेरी उर्दू को दहशतगर्द जिसने भी कहा होगा, उसे तो अपनी मां का दूध भी कड़वा लगा होगा’। यह शेर भारत की सांझा भाषाई विरासत की मिसाल है। अगर पार्षद ने उर्दू में शपथ ले भी ली, तो उसे तूल देना बेहद गलत है।
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- सुरेश कुमार, गजलकार
गुलजार जिनका नाम संपूर्ण नंद कालरा है, उन्होंने लिखा है कि ‘वो यार मेरा खुशबू की तरह, है उसकी जुबां उर्दू की तरह’ इस तरह के जज्बात हिंदुस्तान में रहे हैं। उर्दू को लेकर कुछ लोगों का संकीर्ण नजरिया उनकी मानसिकता को बता देता है। हिंदुस्तान की आम जनता अपनी रोजाना की जिंदगी में हिंदी के साथ उर्दू के अल्फाज भी बोलती है। और यह सब सहज रूप से हो जाता है।
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- बाबर इलियास, शायर