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पश्चिमी उ.प्र में स्थापित की जाए हाईकोर्ट की खंडपीठ
Updated Sat, 16 Sep 2017 02:16 AM IST
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पश्चिमी उ.प्र में स्थापित की जाए हाईकोर्ट की खंडपीठ
ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
पश्चिमी उ.प्र. में हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना की मांग को लेकर सिविल बार के अधिवक्ता शुक्रवार को कार्य से विरत रहे। यहां अधिवक्ताओं ने यह मांग भी की कि पश्चिमी उ.प्र.में अलीगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ के लिए सर्वोत्तम स्थान है। इसलिए यहां खंडपीठ स्थापित की जाए।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सूरजपाल सिंह एडवोकेट की अध्यक्षता में बैठक हुई। संचालन महासचिव रामकिशन सिंह तोमर ने किया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
इस पर सरकारों ने कोई गौर नहीं किया है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की सूक्ति न्याय चला निर्धन से मिलने अब कागजों में सिमट कर रह गई है। अलीगढ़ से इलाहाबाद पांच सौ किमी दूर है।
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उच्च न्यायालय में याचिका करते समय वादकारी की उपस्थिति, फोटो, आईडी अनिवार्य कर दी गई है। इससे लोगों को यहां से इतनी दूर जाना पड़ता है। उच्च न्यायालय में काफी मुकदमे लंबित हैं। इसके कारण मुकदमों की सुनवाई में भी काफी देरी होेती है।
वक्ताओं ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने चुनाव से पहले आश्वासन दिया था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित की जाएगी, लेकिन उन्होंने इसे लेकर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि अलीगढ़ इस खंडपीठ के लिए सर्वोत्तम स्थान है। रेल व सड़क मार्ग से यहां सभी पड़ोसी जिलों के लोग आ सकते हैं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि इस प्रस्ताव पर गौर नहीं किया तो तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
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ब्यूरो,अमर उजाला, अलीगढ़।
पश्चिमी उ.प्र. में हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना की मांग को लेकर सिविल बार के अधिवक्ता शुक्रवार को कार्य से विरत रहे। यहां अधिवक्ताओं ने यह मांग भी की कि पश्चिमी उ.प्र.में अलीगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ के लिए सर्वोत्तम स्थान है। इसलिए यहां खंडपीठ स्थापित की जाए।
सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सूरजपाल सिंह एडवोकेट की अध्यक्षता में बैठक हुई। संचालन महासचिव रामकिशन सिंह तोमर ने किया। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
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इस पर सरकारों ने कोई गौर नहीं किया है। वक्ताओं ने कहा कि सरकार की सूक्ति न्याय चला निर्धन से मिलने अब कागजों में सिमट कर रह गई है। अलीगढ़ से इलाहाबाद पांच सौ किमी दूर है।
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उच्च न्यायालय में याचिका करते समय वादकारी की उपस्थिति, फोटो, आईडी अनिवार्य कर दी गई है। इससे लोगों को यहां से इतनी दूर जाना पड़ता है। उच्च न्यायालय में काफी मुकदमे लंबित हैं। इसके कारण मुकदमों की सुनवाई में भी काफी देरी होेती है।
वक्ताओं ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने चुनाव से पहले आश्वासन दिया था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित की जाएगी, लेकिन उन्होंने इसे लेकर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि अलीगढ़ इस खंडपीठ के लिए सर्वोत्तम स्थान है। रेल व सड़क मार्ग से यहां सभी पड़ोसी जिलों के लोग आ सकते हैं। वक्ताओं ने यह भी कहा कि यदि इस प्रस्ताव पर गौर नहीं किया तो तीव्र आंदोलन किया जाएगा।