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शीशे में बार-बार चेहरा देखना पर संतुष्ट नहीं होना मानसिक बीमारी
Updated Tue, 05 Sep 2017 01:47 AM IST
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शीशे में बार-बार चेहरा देखना और संतुष्ट नहीं होना मानसिक बीमारी
ब्यूरो,अमर उजाला ,अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसए आजमी ने कहा कि शीशे के सामने दिन में अनेकों बार जाकर अपने शरीर और चेहरे को देखना फिर भी संतुष्ट नहीं होना एक मानसिक बीमारी है। इस बीमारी को ओसीडी स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के नाम से जाता है।
प्रो. आजमी आगरा में इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (सेंट्रल जोन) के तत्वावधान में एसएन मेडिकल कॉलेज द्वारा आब्सेसिव कंपल्सीव डिसऑर्डर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने एक सत्र की अध्यक्षता भी की।
उन्होंने कहा कि अपनी त्वचा को बार-बार खींचना या चिकोटी काटना, बाल का बार-बार नोचना या तोड़ना तथा उसे खा लेना भी इसी बीमारी के लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि चेहरे या शरीर में विकृति महसूस करना तथा अनावश्यक वस्तुओं को इकट्ठा करना और उन्हें अपने पास रखना भी मानसिक बीमारी है।
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इस अवसर पर ओसीडी पर आयोजित प्रतियोगिता में जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉ. श्रवण कुमार ने इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (सेंट्र जोन) में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। मानसिक रोग विभाग के चेयरमैन प्रो. एसए आजमी एवं स्टॉफ ने डॉ. कुमार के द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर हर्ष व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल जोन में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड एवं छत्तीसगढ़ आते हैं।
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ब्यूरो,अमर उजाला ,अलीगढ़।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. एसए आजमी ने कहा कि शीशे के सामने दिन में अनेकों बार जाकर अपने शरीर और चेहरे को देखना फिर भी संतुष्ट नहीं होना एक मानसिक बीमारी है। इस बीमारी को ओसीडी स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर के नाम से जाता है।
प्रो. आजमी आगरा में इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (सेंट्रल जोन) के तत्वावधान में एसएन मेडिकल कॉलेज द्वारा आब्सेसिव कंपल्सीव डिसऑर्डर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने एक सत्र की अध्यक्षता भी की।
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उन्होंने कहा कि अपनी त्वचा को बार-बार खींचना या चिकोटी काटना, बाल का बार-बार नोचना या तोड़ना तथा उसे खा लेना भी इसी बीमारी के लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि चेहरे या शरीर में विकृति महसूस करना तथा अनावश्यक वस्तुओं को इकट्ठा करना और उन्हें अपने पास रखना भी मानसिक बीमारी है।
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इस अवसर पर ओसीडी पर आयोजित प्रतियोगिता में जेएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉ. श्रवण कुमार ने इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (सेंट्र जोन) में द्वितीय स्थान प्राप्त किया। मानसिक रोग विभाग के चेयरमैन प्रो. एसए आजमी एवं स्टॉफ ने डॉ. कुमार के द्वितीय स्थान प्राप्त करने पर हर्ष व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल जोन में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड एवं छत्तीसगढ़ आते हैं।