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पांच हजार का ब्याज सवा लाख..और कितना दूं
Updated Tue, 04 Jul 2017 11:55 PM IST
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पांच हजार का ब्याज सवा लाख..और कितना दूं
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
पांच हजार रुपये का ब्याज सवा लाख दे चुका हूं और कितना दे दूं जो मेरा खाता बंद हो जाए। साहूकार के मंकड़जाल में छटपटा रहे एक पीड़ित के यह शब्द न केवल उसकी पीड़ा बयां करते नजर आते हैं, बल्कि वर्तमान व्यवस्था पर भी गहरी चोट करते हैं। एक तरफ जहां डिजीटलाइजेशन की बात होती है कैश लेस व्यवस्था का सपना दिखाया जा रहा है, बैंक आधुनिकता के रंग में रंगे हैं ऐसे में इस तरह के कृत्य समाज के लिए कलंक नहीं तो क्या हैं।
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पंजीकृत हैं मात्र 108 साहूकार
अलीगढ़। सरकारी दस्तावेजों में करीब तीन दशक से महानगर में 108 साहूकार ही पंजीकृत हैं। लेकिन शासन प्रशासन की अनदेखी के चलते हजारों लोग बगैर लाइसेंस ही इस दमनकारी वर्षों पुरानी साहूकारी व्यवस्था को चला रहे हैं। पूर्व में सक्रिय साहूकारों का निशाना महानगर के गांधी पार्क, सासनीगेट, देहलीगेट, रेलवे रोड इलाके में रहने वाले रेलवे, नगर निगम एवं अन्य सरकारी विभागों के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ही होते थे। आज तो पूरे शहर में सक्रिय हजारों साहूकारों ने निमभन मध्यम वर्ग को अपने जाल में कस रखा है।
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साहूकार ने पलट दी ढकेल
अलीगढ़। साहूकार के उत्पीड़न का ताजा मामला मंगलवार सायं गठित हुआ। कोयले वाली गली रेलवे रोड पर परांठे की दुकान चलाने वाले महेंद्र नगर निवासी गौरव को नेताजी के नाम से जाने जाने वाले साहूकार ने ब्याज का पैसा अदा न करने पर न केवल पीटा, बल्कि उसकी ढकेल ही पलट दी।
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पूर्व में भी एक परिवार हो चुका है खत्म
अलीगढ़। पूर्व में साहूकार की ब्याज चुकाते चुकाते जिंदगी से निराश डोरीनगर के एक पूरे परिवार ने खुदकुशी कर ली थी। मामले को लेकर जमकर हो-हल्ला मचा था, लेकिन फिर मामले पर वक्त की गर्द जम गई।
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साहूकारों से निपटने को पुलिस ने सेल गठित की
अलीगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने बताया कि साहूकारों से निपटने एवं गरीबों को उनके मंकड़जाल से बचाने के लिए एक नई सेल गठित की गई है। यह सेल सुरागकशी कर धौंस देकर वसूली करने वालों का चिन्हांकन करेगी और उसके बाद धारा 384 में उनके चालान कर जेल भिजवाएगी।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
पांच हजार रुपये का ब्याज सवा लाख दे चुका हूं और कितना दे दूं जो मेरा खाता बंद हो जाए। साहूकार के मंकड़जाल में छटपटा रहे एक पीड़ित के यह शब्द न केवल उसकी पीड़ा बयां करते नजर आते हैं, बल्कि वर्तमान व्यवस्था पर भी गहरी चोट करते हैं। एक तरफ जहां डिजीटलाइजेशन की बात होती है कैश लेस व्यवस्था का सपना दिखाया जा रहा है, बैंक आधुनिकता के रंग में रंगे हैं ऐसे में इस तरह के कृत्य समाज के लिए कलंक नहीं तो क्या हैं।
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पंजीकृत हैं मात्र 108 साहूकार
अलीगढ़। सरकारी दस्तावेजों में करीब तीन दशक से महानगर में 108 साहूकार ही पंजीकृत हैं। लेकिन शासन प्रशासन की अनदेखी के चलते हजारों लोग बगैर लाइसेंस ही इस दमनकारी वर्षों पुरानी साहूकारी व्यवस्था को चला रहे हैं। पूर्व में सक्रिय साहूकारों का निशाना महानगर के गांधी पार्क, सासनीगेट, देहलीगेट, रेलवे रोड इलाके में रहने वाले रेलवे, नगर निगम एवं अन्य सरकारी विभागों के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी ही होते थे। आज तो पूरे शहर में सक्रिय हजारों साहूकारों ने निमभन मध्यम वर्ग को अपने जाल में कस रखा है।
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साहूकार ने पलट दी ढकेल
अलीगढ़। साहूकार के उत्पीड़न का ताजा मामला मंगलवार सायं गठित हुआ। कोयले वाली गली रेलवे रोड पर परांठे की दुकान चलाने वाले महेंद्र नगर निवासी गौरव को नेताजी के नाम से जाने जाने वाले साहूकार ने ब्याज का पैसा अदा न करने पर न केवल पीटा, बल्कि उसकी ढकेल ही पलट दी।
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पूर्व में भी एक परिवार हो चुका है खत्म
अलीगढ़। पूर्व में साहूकार की ब्याज चुकाते चुकाते जिंदगी से निराश डोरीनगर के एक पूरे परिवार ने खुदकुशी कर ली थी। मामले को लेकर जमकर हो-हल्ला मचा था, लेकिन फिर मामले पर वक्त की गर्द जम गई।
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साहूकारों से निपटने को पुलिस ने सेल गठित की
अलीगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडेय ने बताया कि साहूकारों से निपटने एवं गरीबों को उनके मंकड़जाल से बचाने के लिए एक नई सेल गठित की गई है। यह सेल सुरागकशी कर धौंस देकर वसूली करने वालों का चिन्हांकन करेगी और उसके बाद धारा 384 में उनके चालान कर जेल भिजवाएगी।