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जान लेने की कोशिश के मामले में पांच को सजा
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क्राइम न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़।
18 साल पहले अतरौली में जान लेने की कोशिश के एक मामले में दोनों पक्षों पर चल रहे मुकदमों में एडीजे-तीन संजय कुमार सप्तम की अदालत ने एक पक्ष को दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया, जबकि दूसरे पक्ष को दोषी मानते हुए पांच आरोपियों में से एक को पांच वर्ष की कैद और चार को सात सात वर्ष की कैद की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी प्रमेंद्र जैन व जेपी राजपूत के 9 सितंबर 2001 को अतरौली के गांव अशरफाबाद में एक घटना हुई। इसमें गांव के दो पक्षों में खेत को लेकर विवाद हुआ, जिसमें एक पक्ष योगेश ने गांव के ही सात लोगों के खिलाफ धारा 307 में मुकदमा दर्ज कराया।
इसी प्रकरण में दूसरे पक्ष ने क्रास एफआईआर दर्ज कराते हुए पहले पक्ष के चार लोगों को नामजद किया। मामले की सुनवाई अदालत में हुई। सुनवाई के बाद योगेश पक्ष को आरोपों से बरी कर दिया। जबकि जगदीश पक्ष के ओमवीर को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई है।
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जबकि जगदीश, श्यामवीर, उमाकांत और शक्ति सिंह को सात सात वर्ष कैद की सजा सुनाई है। इस पक्ष के दो आरोपियों की मौत हो गई है। उन्हें ट्रायल से अलग किया गया है। इस मामले में बरी किए गए पक्ष की पैरवी दिनेश कुमार शर्मा एडवोकेट ने की।
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18 साल पहले अतरौली में जान लेने की कोशिश के एक मामले में दोनों पक्षों पर चल रहे मुकदमों में एडीजे-तीन संजय कुमार सप्तम की अदालत ने एक पक्ष को दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया, जबकि दूसरे पक्ष को दोषी मानते हुए पांच आरोपियों में से एक को पांच वर्ष की कैद और चार को सात सात वर्ष की कैद की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी प्रमेंद्र जैन व जेपी राजपूत के 9 सितंबर 2001 को अतरौली के गांव अशरफाबाद में एक घटना हुई। इसमें गांव के दो पक्षों में खेत को लेकर विवाद हुआ, जिसमें एक पक्ष योगेश ने गांव के ही सात लोगों के खिलाफ धारा 307 में मुकदमा दर्ज कराया।
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इसी प्रकरण में दूसरे पक्ष ने क्रास एफआईआर दर्ज कराते हुए पहले पक्ष के चार लोगों को नामजद किया। मामले की सुनवाई अदालत में हुई। सुनवाई के बाद योगेश पक्ष को आरोपों से बरी कर दिया। जबकि जगदीश पक्ष के ओमवीर को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई है।
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जबकि जगदीश, श्यामवीर, उमाकांत और शक्ति सिंह को सात सात वर्ष कैद की सजा सुनाई है। इस पक्ष के दो आरोपियों की मौत हो गई है। उन्हें ट्रायल से अलग किया गया है। इस मामले में बरी किए गए पक्ष की पैरवी दिनेश कुमार शर्मा एडवोकेट ने की।