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बेटे के दाखिले के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही महिला
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में एक महिला केंद्रीय विद्यालय देवसैनी में अपने बेटे का दाखिला करवाने के लिए चक्कर काट रही है। लेकिन उसका दाखिला नहीं हो रहा है। असल में बच्चे का नाम तो शार्ट लिस्ट में आ गया था। लेकिन तय मानक से अधिक दूरी होने के चलते दाखिला निरस्त हो गया है।
पुराने छर्रा अड्डा निकट नगला ताड़ स्थित सीमा ने अपने बेटे मयंक के दाखिले के लिए केंद्रीय विद्यालय में आवेदन किया था। उसका नंबर भी आ गया। मयंक का नाम शार्ट लिस्ट में आ गया। लेकिन वेरिफिकेशन के समय केंद्रीय विद्यालय से मयंक के घर की दूरी छह किलोमीटर निकली।
जबकि आवेदन के समय यह दूरी पांच किलोमीटर बताई गई। ऐसे में यह दाखिला निरस्त हो गया। इसके बाद मयंक की मां सीमा अपने बच्चे के दाखिले के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही है। लेकिन उसका दाखिला नहीं हो रहा है।
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प्रधानाचार्या प्राची दीक्षित के मुताबिक वेरिफिकेशन के समय ही महिला को बता दिया गया था कि आवेदन निरस्त किया जा रहा है। गलत सूचना भरने पर साफ्टवेयर द्वारा आवेदन तो स्वीकृत हो गया। लेकिन हम तय मानक के विपरीत दाखिला नहीं ले सकते हैं।
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जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में एक महिला केंद्रीय विद्यालय देवसैनी में अपने बेटे का दाखिला करवाने के लिए चक्कर काट रही है। लेकिन उसका दाखिला नहीं हो रहा है। असल में बच्चे का नाम तो शार्ट लिस्ट में आ गया था। लेकिन तय मानक से अधिक दूरी होने के चलते दाखिला निरस्त हो गया है।
पुराने छर्रा अड्डा निकट नगला ताड़ स्थित सीमा ने अपने बेटे मयंक के दाखिले के लिए केंद्रीय विद्यालय में आवेदन किया था। उसका नंबर भी आ गया। मयंक का नाम शार्ट लिस्ट में आ गया। लेकिन वेरिफिकेशन के समय केंद्रीय विद्यालय से मयंक के घर की दूरी छह किलोमीटर निकली।
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जबकि आवेदन के समय यह दूरी पांच किलोमीटर बताई गई। ऐसे में यह दाखिला निरस्त हो गया। इसके बाद मयंक की मां सीमा अपने बच्चे के दाखिले के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रही है। लेकिन उसका दाखिला नहीं हो रहा है।
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प्रधानाचार्या प्राची दीक्षित के मुताबिक वेरिफिकेशन के समय ही महिला को बता दिया गया था कि आवेदन निरस्त किया जा रहा है। गलत सूचना भरने पर साफ्टवेयर द्वारा आवेदन तो स्वीकृत हो गया। लेकिन हम तय मानक के विपरीत दाखिला नहीं ले सकते हैं।