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अलीगढ़... 2009 के बाद कभी किसी चुनाव में टिकट नहीं मांगा: जफर आलम
Updated Wed, 25 Oct 2017 01:30 AM IST
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2009 के बाद कभी किसी चुनाव में टिकट नहीं मांगा : जफर आलम
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
समाजवादी पार्टी के अलीगढ़ निकाय चुनाव पर्यवेक्षक डा. दीप सिंह पाल के समक्ष अपना आवेदन नहीं देने वाले मेयर पद के प्रबल दावेदार पूर्व शहर विधायक जफर आलम ने कहा कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने किसी भी चुनाव में टिकट के लिए अपना आवेदन नहीं किया है। पार्टी निर्देश देती है, तो चुनाव लड़ते हैं।
जफर आलम ने कहा कि 28 अक्तूबर तक सपा में प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद है। जफर आलम ने भाजपा की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि हाल ही में जीवन हास्पिटल में कन्या भ्रूण लिंग परीक्षण का खुलासा होने के प्रकरण में शहर विधायक संजीव राजा और कोल विधायक अनिल पाराशर ने आरोपी डाक्टर जयंत शर्मा और उनकी पत्नी डा. दिव्या चौधरी को बचाया।
भाजपा के ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ अभियान की यही कड़वी हकीकत है। जिसमें भाजपा के विधायक ही लिंग परीक्षण के प्रकरण में बिना किसी जांच के सिफारिश कर रहे हैं। जनता ने केंद्र और यूपी में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, लेकिन अब वही जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है।
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हकीकत ये है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश की आर्थिक विकास दर नीचे आई है। इसीलिए भाजपा नेता अपने गलत फैसलों को सही ठहराने के लिए आंकड़ों की सफाई पेश करने में जुटे हैं। कुछ और सवालों पर उन्होंने जवाब दिए।
अमर उजाला : यूपी के निकाय चुनाव, गुजरात विधानसभा चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव पर क्या असर डालेंगे?
जवाब : गुजरात में भाजपा की साख दांव पर लगी है। मोदी का ग्राफ गिर रहा है, इसलिए योगी को वहां घुमाया जा रहा है। यूपी के निकाय चुनाव में भी भाजपा का ग्राफ गिरना तय है। लोगों का रुझान सपा की ओर है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपने गलत फैसलों का हिसाब जनता को देना होगा।
अमर उजाला : आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के निर्माण की जांच कराने वाली भाजपा सरकार ने ही इसी रोड पर एयरफोर्स के लड़ाकू जहाजों को टच डाउन एक्सरसाइज करने की अनुमति दी है। क्या कहेंगे।
जवाब : यही भाजपा का दोहरा चेहरा है। अगर वह रोड गुणवत्तापूर्ण नहीं है, तो उस पर एयरफोर्स दूसरी बार एक्सरसाइज क्यों कर रही है? पूर्व सीएम अखिलेश यादव की सरकार में यमुना एक्सप्रेस वे में मिराज विमान और आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर भी लड़ाकू विमान टचडाउन की एक्सरसाइज कर चुके हैं। दोनों सड़कें विश्वस्तरीय गुणवत्ता के साथ बनी हैं। हर काम की, हर बात की जांच कराना भाजपा सरकार का एक चलन है।
अमर उजाला : योगी सरकार बीफ बैन कर बूचड़खानों पर कार्रवाई को बड़ा कदम बता रही है। आप क्या सोचते हैं?
जवाब : भाजपा की सरकार बनाने के लिए यूपी में बीफ बैन और बूचड़खानों पर कार्रवाई हुई। अब वही भाजपा मेघालय में सरकार बनाने के लिए बीफ बैन पर रोक नहीं लगाएगी। सरकार बनाने के लिए भाजपा हर हथकंडा अपना रही है।
अमर उजाला : नोटबंदी और जीएसटी के बाद कारोबार की अब क्या हालात है? रोजगार की हालत पर क्या कहेंगे?
जवाब : नोटबंदी और जीएसटी के बाद असंगठित उद्योग की कमर टूट चुकी है। मैं खुद ताला कारोबारी हूं, इसलिए जानता हूं कि फैक्ट्री कैसे चलती है। अलीगढ़ में कारपोरेट सेक्टर नहीं है। असंगठित उद्योग ही सबसे ज्यादा रोजगार देता है। जब इसमें ही उत्पादन कम होगा तो रोजगार कैसे बढ़ेगा?
दो दिन में पार्षद के आवेदनों की होगी स्क्रीनिंग
अलीगढ़। सपा में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों से पार्षद पद के लिए अब तक 200 से अधिक आवेदन आए हैं। जिनकी छंटनी हो रही है। छंटनी के बाद ही इनकी लिस्ट बनाई जाएगी, जिसको सार्वजनिक किया जाएगा। जिलाध्यक्ष की टीम इस काम में लगी है। सबसे ज्यादा आवेदन अलीगढ़ नगर निगम में है।
चार नगर पंचायतों में दावेदारों की तलाश
अलीगढ़। जिले की पिलखना, बेसवां, इगलास और जट्टारी चार नगर पंचायत ऐसी हैं, जिसमें सपा की ओर से कोई भी अध्यक्ष पद का दावेदार सामने नहीं आया है। ये खबर मंगलवार के अमर उजाला के अंक में पेज नंबर दो पर प्रमुखता से छपी, तो पार्टी में हलचल शुरू हुई। जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने बताया कि चारों नगर पंचायतों में मजबूत प्रत्याशियों की तलाश की जा रही है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
समाजवादी पार्टी के अलीगढ़ निकाय चुनाव पर्यवेक्षक डा. दीप सिंह पाल के समक्ष अपना आवेदन नहीं देने वाले मेयर पद के प्रबल दावेदार पूर्व शहर विधायक जफर आलम ने कहा कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने किसी भी चुनाव में टिकट के लिए अपना आवेदन नहीं किया है। पार्टी निर्देश देती है, तो चुनाव लड़ते हैं।
जफर आलम ने कहा कि 28 अक्तूबर तक सपा में प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद है। जफर आलम ने भाजपा की नीतियों पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि हाल ही में जीवन हास्पिटल में कन्या भ्रूण लिंग परीक्षण का खुलासा होने के प्रकरण में शहर विधायक संजीव राजा और कोल विधायक अनिल पाराशर ने आरोपी डाक्टर जयंत शर्मा और उनकी पत्नी डा. दिव्या चौधरी को बचाया।
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भाजपा के ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’ अभियान की यही कड़वी हकीकत है। जिसमें भाजपा के विधायक ही लिंग परीक्षण के प्रकरण में बिना किसी जांच के सिफारिश कर रहे हैं। जनता ने केंद्र और यूपी में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई, लेकिन अब वही जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है।
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हकीकत ये है कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश की आर्थिक विकास दर नीचे आई है। इसीलिए भाजपा नेता अपने गलत फैसलों को सही ठहराने के लिए आंकड़ों की सफाई पेश करने में जुटे हैं। कुछ और सवालों पर उन्होंने जवाब दिए।
अमर उजाला : यूपी के निकाय चुनाव, गुजरात विधानसभा चुनाव आगामी लोकसभा चुनाव पर क्या असर डालेंगे?
जवाब : गुजरात में भाजपा की साख दांव पर लगी है। मोदी का ग्राफ गिर रहा है, इसलिए योगी को वहां घुमाया जा रहा है। यूपी के निकाय चुनाव में भी भाजपा का ग्राफ गिरना तय है। लोगों का रुझान सपा की ओर है। लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपने गलत फैसलों का हिसाब जनता को देना होगा।
अमर उजाला : आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे के निर्माण की जांच कराने वाली भाजपा सरकार ने ही इसी रोड पर एयरफोर्स के लड़ाकू जहाजों को टच डाउन एक्सरसाइज करने की अनुमति दी है। क्या कहेंगे।
जवाब : यही भाजपा का दोहरा चेहरा है। अगर वह रोड गुणवत्तापूर्ण नहीं है, तो उस पर एयरफोर्स दूसरी बार एक्सरसाइज क्यों कर रही है? पूर्व सीएम अखिलेश यादव की सरकार में यमुना एक्सप्रेस वे में मिराज विमान और आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर भी लड़ाकू विमान टचडाउन की एक्सरसाइज कर चुके हैं। दोनों सड़कें विश्वस्तरीय गुणवत्ता के साथ बनी हैं। हर काम की, हर बात की जांच कराना भाजपा सरकार का एक चलन है।
अमर उजाला : योगी सरकार बीफ बैन कर बूचड़खानों पर कार्रवाई को बड़ा कदम बता रही है। आप क्या सोचते हैं?
जवाब : भाजपा की सरकार बनाने के लिए यूपी में बीफ बैन और बूचड़खानों पर कार्रवाई हुई। अब वही भाजपा मेघालय में सरकार बनाने के लिए बीफ बैन पर रोक नहीं लगाएगी। सरकार बनाने के लिए भाजपा हर हथकंडा अपना रही है।
अमर उजाला : नोटबंदी और जीएसटी के बाद कारोबार की अब क्या हालात है? रोजगार की हालत पर क्या कहेंगे?
जवाब : नोटबंदी और जीएसटी के बाद असंगठित उद्योग की कमर टूट चुकी है। मैं खुद ताला कारोबारी हूं, इसलिए जानता हूं कि फैक्ट्री कैसे चलती है। अलीगढ़ में कारपोरेट सेक्टर नहीं है। असंगठित उद्योग ही सबसे ज्यादा रोजगार देता है। जब इसमें ही उत्पादन कम होगा तो रोजगार कैसे बढ़ेगा?
दो दिन में पार्षद के आवेदनों की होगी स्क्रीनिंग
अलीगढ़। सपा में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों से पार्षद पद के लिए अब तक 200 से अधिक आवेदन आए हैं। जिनकी छंटनी हो रही है। छंटनी के बाद ही इनकी लिस्ट बनाई जाएगी, जिसको सार्वजनिक किया जाएगा। जिलाध्यक्ष की टीम इस काम में लगी है। सबसे ज्यादा आवेदन अलीगढ़ नगर निगम में है।
चार नगर पंचायतों में दावेदारों की तलाश
अलीगढ़। जिले की पिलखना, बेसवां, इगलास और जट्टारी चार नगर पंचायत ऐसी हैं, जिसमें सपा की ओर से कोई भी अध्यक्ष पद का दावेदार सामने नहीं आया है। ये खबर मंगलवार के अमर उजाला के अंक में पेज नंबर दो पर प्रमुखता से छपी, तो पार्टी में हलचल शुरू हुई। जिलाध्यक्ष अशोक यादव ने बताया कि चारों नगर पंचायतों में मजबूत प्रत्याशियों की तलाश की जा रही है।