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रजवाहे में कभी नहीं आया पानी, सफाई पर हो रहे लाखों खर्च
Updated Sun, 18 Jun 2017 02:15 AM IST
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रजवाहे में कभी नहीं आया पानी, सफाई पर हो रहे लाखों खर्च
ब्यूरो, अमर उजाला, अतरौली।
सरकार चाहे किसी की भी हो, लेकिन कुछ विभागों में सरकारी धन के बंदरबांट की मानसिकता नहीं बदल रही है। सरकारी धन के गोलमाल का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिन नहर और रजवाहों में कभी पानी की एक बूंद तक न आई हो, वहां लाखों रुपये सफाई पर खर्च किए जा रहे हैं।
सफाई भी मनरेगा मजदूरों की जगह जेसीबी से हो रही है। किसानों का इस पर सवाल उठाना भी लाजिमी है। किसानों की मांग है कि सफाई पर लाखों रुपये खर्च करने से पहले रजवाहों में पानी की व्यवस्था तो की जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई विभाग को आदेश दिए हैं कि नहर रजवाहे सूखे नहीं रहने चाहिए। पानी छोड़ने से पहले रजवाहों और नहरों की खुदाई का काम शुरू हो गया है। लेकिन मानगढ़ी माइनर, नौरथा बंबा, मऊपुर रजवाहा सहित आधा दर्जन रजवाहे और नहर तो ऐसी हैं, जिनमें कभी एक बूंद पानी तक नहीं आया और न ही इनमें पानी आने की कोई उम्मीद है। क्योंकि किसान बताते हैं कि कुछ रजवाहों में खोदते समय पानी के बहाव का ढाल विपरीत दिशा में है।
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अब इन रजवाहों की सफाई भी कराई जा रही है। सफाई के नाम पर भी खाना पूर्ति हो रही है। जेसीबी बस हल्की मिट्टी निकालकर ऊपर डाल देती है। माइनर व बंबा की कई जगह से पटरी तक गायब हैं। उनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। किसानों का कहना है कि जब इन बंबों में पानी आएगा ही नहीं तो सफाई के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी क्यों की जा रही है?
सबसे पहले बंबा और माइनर में पानी छोड़ने की व्यवस्था बनाई जाए। हमने पंत भवन में हुई किसान गोष्ठी में अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया है। सफाई के नाम पर गोलमाल न करें किसानों को पानी दें। - चौ. नवाब सिंह, भाकियू
नहर बंबों की सफाई मनरेगा मजदूरों से कराई जाए। जिन नहर बंबों में पानी आया ही नहीं। उनकी सफाई कराना सरकारी धन का दुरुपयोग है। किसानों की सिंचाई व्यवस्था बनाने में विभाग फेल साबित हो रहे हैं। - सुखराम सिंह, जरारा
सरकारी धन के बंदरबांट का किसान लगा रहे आरोप
मनरेगा मजदूरों की जगह जेसीबी से करा रहे सफाई
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ब्यूरो, अमर उजाला, अतरौली।
सरकार चाहे किसी की भी हो, लेकिन कुछ विभागों में सरकारी धन के बंदरबांट की मानसिकता नहीं बदल रही है। सरकारी धन के गोलमाल का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिन नहर और रजवाहों में कभी पानी की एक बूंद तक न आई हो, वहां लाखों रुपये सफाई पर खर्च किए जा रहे हैं।
सफाई भी मनरेगा मजदूरों की जगह जेसीबी से हो रही है। किसानों का इस पर सवाल उठाना भी लाजिमी है। किसानों की मांग है कि सफाई पर लाखों रुपये खर्च करने से पहले रजवाहों में पानी की व्यवस्था तो की जाए।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंचाई विभाग को आदेश दिए हैं कि नहर रजवाहे सूखे नहीं रहने चाहिए। पानी छोड़ने से पहले रजवाहों और नहरों की खुदाई का काम शुरू हो गया है। लेकिन मानगढ़ी माइनर, नौरथा बंबा, मऊपुर रजवाहा सहित आधा दर्जन रजवाहे और नहर तो ऐसी हैं, जिनमें कभी एक बूंद पानी तक नहीं आया और न ही इनमें पानी आने की कोई उम्मीद है। क्योंकि किसान बताते हैं कि कुछ रजवाहों में खोदते समय पानी के बहाव का ढाल विपरीत दिशा में है।
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अब इन रजवाहों की सफाई भी कराई जा रही है। सफाई के नाम पर भी खाना पूर्ति हो रही है। जेसीबी बस हल्की मिट्टी निकालकर ऊपर डाल देती है। माइनर व बंबा की कई जगह से पटरी तक गायब हैं। उनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। किसानों का कहना है कि जब इन बंबों में पानी आएगा ही नहीं तो सफाई के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी क्यों की जा रही है?
सबसे पहले बंबा और माइनर में पानी छोड़ने की व्यवस्था बनाई जाए। हमने पंत भवन में हुई किसान गोष्ठी में अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया है। सफाई के नाम पर गोलमाल न करें किसानों को पानी दें। - चौ. नवाब सिंह, भाकियू
नहर बंबों की सफाई मनरेगा मजदूरों से कराई जाए। जिन नहर बंबों में पानी आया ही नहीं। उनकी सफाई कराना सरकारी धन का दुरुपयोग है। किसानों की सिंचाई व्यवस्था बनाने में विभाग फेल साबित हो रहे हैं। - सुखराम सिंह, जरारा
सरकारी धन के बंदरबांट का किसान लगा रहे आरोप
मनरेगा मजदूरों की जगह जेसीबी से करा रहे सफाई