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सातों विधायक हुए पास, बरौली ने तोड़ा रिकार्ड
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न्यूज डेस्क, अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
देश में भाजपा ने जो भी लकीर खींची हो, मगर यहां सतीश गौतम ने एक ऐसी लकीर खींची है, जिससे उन्होंने खुद का ही रिकार्ड तो तोड़ा ही है। साथ में आजादी के बाद पहली बार सर्वाधिक वोट हासिल करने वाले सांसद भी बन गए हैं।
साथ में भाजपा के दूसरे ऐसे प्रत्याशी हैं जो लगातार दूसरी बार सांसद बनकर दिल्ली पहुंच रहे हैं। सतीश गौतम की चुनावी दौड़ पर गौर करें तो पहले राउंड के परिणाम में उन्होंने करीब 11 हजार 552 वोटों की बढ़त बनाई, जिस पर पांचवें राउंड में कुछ झटका लगा और सतीश 1341 वोटों से पीछे हुए।
फिर उन्होंने बढ़त बनाई तो 11वें राउंड में वह 785 वोटों से पीछे हुए, मगर 13वें और 14वें राउंड में पीछे रहने के बाद जब उन्होंने 15वें राउंड में बढ़त बनाई तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और इसी बीच हालात ऐसे बन गए कि बसपा प्रत्याशी अजीत बालियान ने खुद को हारा मानते हुए भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम को हाथ मिलाकर जीत की अग्रिम बधाई देकर खुद को हारा हुआ मान लिया।
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नरदेव, शिवकुमार और शीला के बाद सतीश
अलीगढ़ सीट पर आजादी के बाद से लेकर अब तक के सांसदों की लगातार दूसरी जीत पर गौर करें तो सबसे पहले सांसद नरदेव स्नातक लगातार दो बार सांसद हुए। इसके बाद 1967 और 1971 में शिवकुमार शास्त्री लगातार दो बार सांसद बने। इसके बाद 1991 से 1999 तक भाजपा से शीला गौैतम चार बार सांसद रहीं और अब सतीश गौतम भी भाजपा से ही ऐसे नेता हैं जो लगाता दूसरी बार सांसद बने हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में कुल 514622 वोट हासिल कर सर्वाधिक वोट पाने का रिकार्ड बनाया था। मगर इस बार के चुनाव में अपना ही रिकार्ड 6 लाख से अधिक वोट हासिल कर तोड़ दिया है।
शहर और कोल में बनाई थी अजीत ने बढ़ाई
पांचवें और फिर 11वें, 13वें और 14वें राउंड में करीब आधा घंटे के लिए शहर व कोल विधानसभा के एजेंटों के उस समय पसीने छूट गए थे, जब शहर व कोल को मिलाकर बसपा प्रत्याशी अजीत बालियान ने करीब 50 हजार वोटों की बढ़त बनाई थी। हालांकि इससे उलट बरौली व खैर में उनके वोटों का अंतर इतना अधिक था कि सतीश को ज्यादा पीछे नहीं खिसका सका। इस दौरान जानकार यही कहते रहे कि यह शहर व कोल के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के वोट खुले हैं। इस दौरान अजीत ने बढ़त बनाई है। मगर 15वें राउंड के बाद सतीश फिर आगे हो गए।
जिले पर भाजपा का कब्जा बरकरार है। यह बात इस बार के लोकसभा चुनाव में तय हो गई। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर आसीन भाजपा को मेयर चुनाव में झटका लगा था और किला दरकने का अहसास हुआ था। मगर उस चुनाव में हार का बदला भाजपा ने फिर से जिले पर अपना कब्जा कर विपक्षियों से ले लिया है। अलीगढ़ लोकसभा सीट पर पांचों और हाथरस सीट पर दोनों विधायकों को मिलाकर बात करें तो सातों विधायक सांसद को जिताने में पास हुए हैं।
अलीगढ़ सीट के पांच विधायकों की बात करें तो बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह ने इस बार सारे रिकार्ड ध्वस्त कर अकेले अपनी विधानसभा से सतीश गौतम को 82160 मतों से बढ़त दिलाई है और खुद को मिले वोटों से अतिरिक्त वोट पांचों विधायकों ने सतीश गौतम को दिलवाने का रिकार्ड दर्ज किया है।
हालांकि मतदान के बाद से ही राजनीतिक जानकार यह कहते सुने गए थे इस बार सतीश गौतम को बरौली विधानसभा से सर्वाधिक मत मिलेंगे और हुआ भी यही है। दलवीर सिंह को 2017 के विधानसभा में जितने वोट मिले थे, उससे अधिक वोट सतीश को मिले हैं और जिले की सबसे अधिक वोट देने वाली विधानसभा बरौली बनी है।
इसके बाद दूसरा नंबर खैर, तीसरा अतरौली, चौथा शहर व पांचवां नंबर कोल विधानसभा का आया है, जबकि खैर, अतरौली कोल को लेकर जानकार यह कह रहे थे कि मुसलिम वोटों के ध्रुवीकरण, अंतरविरोध के चलते इन तीनों विधानसभा से सतीश के लिए जीतना संभव नहीं होगा। मगर इस तरह के सभी एग्जिक्ट पोल धरे रह गए। जिन के सिर विरोध का ठीकरा फूट रहा था, वह लोग भी इस परिणाम से आश्चर्यचकित हैं।
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देश में भाजपा ने जो भी लकीर खींची हो, मगर यहां सतीश गौतम ने एक ऐसी लकीर खींची है, जिससे उन्होंने खुद का ही रिकार्ड तो तोड़ा ही है। साथ में आजादी के बाद पहली बार सर्वाधिक वोट हासिल करने वाले सांसद भी बन गए हैं।
साथ में भाजपा के दूसरे ऐसे प्रत्याशी हैं जो लगातार दूसरी बार सांसद बनकर दिल्ली पहुंच रहे हैं। सतीश गौतम की चुनावी दौड़ पर गौर करें तो पहले राउंड के परिणाम में उन्होंने करीब 11 हजार 552 वोटों की बढ़त बनाई, जिस पर पांचवें राउंड में कुछ झटका लगा और सतीश 1341 वोटों से पीछे हुए।
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फिर उन्होंने बढ़त बनाई तो 11वें राउंड में वह 785 वोटों से पीछे हुए, मगर 13वें और 14वें राउंड में पीछे रहने के बाद जब उन्होंने 15वें राउंड में बढ़त बनाई तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और इसी बीच हालात ऐसे बन गए कि बसपा प्रत्याशी अजीत बालियान ने खुद को हारा मानते हुए भाजपा प्रत्याशी सतीश गौतम को हाथ मिलाकर जीत की अग्रिम बधाई देकर खुद को हारा हुआ मान लिया।
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नरदेव, शिवकुमार और शीला के बाद सतीश
अलीगढ़ सीट पर आजादी के बाद से लेकर अब तक के सांसदों की लगातार दूसरी जीत पर गौर करें तो सबसे पहले सांसद नरदेव स्नातक लगातार दो बार सांसद हुए। इसके बाद 1967 और 1971 में शिवकुमार शास्त्री लगातार दो बार सांसद बने। इसके बाद 1991 से 1999 तक भाजपा से शीला गौैतम चार बार सांसद रहीं और अब सतीश गौतम भी भाजपा से ही ऐसे नेता हैं जो लगाता दूसरी बार सांसद बने हैं। उन्होंने पिछले चुनाव में कुल 514622 वोट हासिल कर सर्वाधिक वोट पाने का रिकार्ड बनाया था। मगर इस बार के चुनाव में अपना ही रिकार्ड 6 लाख से अधिक वोट हासिल कर तोड़ दिया है।
शहर और कोल में बनाई थी अजीत ने बढ़ाई
पांचवें और फिर 11वें, 13वें और 14वें राउंड में करीब आधा घंटे के लिए शहर व कोल विधानसभा के एजेंटों के उस समय पसीने छूट गए थे, जब शहर व कोल को मिलाकर बसपा प्रत्याशी अजीत बालियान ने करीब 50 हजार वोटों की बढ़त बनाई थी। हालांकि इससे उलट बरौली व खैर में उनके वोटों का अंतर इतना अधिक था कि सतीश को ज्यादा पीछे नहीं खिसका सका। इस दौरान जानकार यही कहते रहे कि यह शहर व कोल के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के वोट खुले हैं। इस दौरान अजीत ने बढ़त बनाई है। मगर 15वें राउंड के बाद सतीश फिर आगे हो गए।
जिले पर भाजपा का कब्जा बरकरार है। यह बात इस बार के लोकसभा चुनाव में तय हो गई। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर आसीन भाजपा को मेयर चुनाव में झटका लगा था और किला दरकने का अहसास हुआ था। मगर उस चुनाव में हार का बदला भाजपा ने फिर से जिले पर अपना कब्जा कर विपक्षियों से ले लिया है। अलीगढ़ लोकसभा सीट पर पांचों और हाथरस सीट पर दोनों विधायकों को मिलाकर बात करें तो सातों विधायक सांसद को जिताने में पास हुए हैं।
अलीगढ़ सीट के पांच विधायकों की बात करें तो बरौली विधायक ठा.दलवीर सिंह ने इस बार सारे रिकार्ड ध्वस्त कर अकेले अपनी विधानसभा से सतीश गौतम को 82160 मतों से बढ़त दिलाई है और खुद को मिले वोटों से अतिरिक्त वोट पांचों विधायकों ने सतीश गौतम को दिलवाने का रिकार्ड दर्ज किया है।
हालांकि मतदान के बाद से ही राजनीतिक जानकार यह कहते सुने गए थे इस बार सतीश गौतम को बरौली विधानसभा से सर्वाधिक मत मिलेंगे और हुआ भी यही है। दलवीर सिंह को 2017 के विधानसभा में जितने वोट मिले थे, उससे अधिक वोट सतीश को मिले हैं और जिले की सबसे अधिक वोट देने वाली विधानसभा बरौली बनी है।
इसके बाद दूसरा नंबर खैर, तीसरा अतरौली, चौथा शहर व पांचवां नंबर कोल विधानसभा का आया है, जबकि खैर, अतरौली कोल को लेकर जानकार यह कह रहे थे कि मुसलिम वोटों के ध्रुवीकरण, अंतरविरोध के चलते इन तीनों विधानसभा से सतीश के लिए जीतना संभव नहीं होगा। मगर इस तरह के सभी एग्जिक्ट पोल धरे रह गए। जिन के सिर विरोध का ठीकरा फूट रहा था, वह लोग भी इस परिणाम से आश्चर्यचकित हैं।