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बिजली के इंतजार में जमीन हुई बंजर
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
अतरौली के विष्णु दयाल को नलकूप के लिए बिजली का कनेक्शन नहीं मिला। जिसके चलते उनकी 18 बीघा जमीन को पानी नहीं मिलने के चलते जमीन बंजर हो गई। फसलें भी नहीं बो सके। जिसके चलते पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। अब विभाग ने उनके आवेदन की ओरिजिनल फाइल भी खो दी है। इसी तरह गंगीरी के कालीचरन भी पिछले 10 महीने से नलकूप के लिए बिजली को भटक रहे हैं। इसके चलते वह मक्का, गेंहू, धान की फसल वह बो नहीं सके हैं।
बिजली अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक चुके विष्णु दयाल कहते हैं कि सन 2017 में उन्होंने नलकूप के लिए आवेदन किया था। उम्मीद थी कि खेत को पानी मिलेगा तो घर में भी हरियाली छाएगी। लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया वहीं पर है जहां पर शुरू की थी क्योंकि विभाग ने उनकी ओरिजिनल फाइल खो दी है। अब डुप्लीकेट फाइल तैयार की जा रही है। इन दो सालों में वह कितने चक्कर विभाग के काट चुके हैें, याद नहीं है। एक बार आने जाने में ही 200 से 250 रुपये खर्च हो जाते हैं। इस दौरान वह खेत में कोई फसल नहीं बो सके हैं।
गंगीरी के गांव मिरगौल के रहने वाले कालीचरन भी पिछले 10 महीने से नलकूप के लिए बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं। पानी नहीं होने से मक्का, गेंहू, धान जैसी फसलें वह नहीं बो सके। कालीचरन कहते हैं कि वह कुल 29325 रुपये जमा कर चुके हैं। सभी औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी हैं। विभाग की दलील है कि स्टाक में सामान नहीं है इसलिए कनेक्शन में देरी हो रही है। लेकिन कनेक्शन में हो रही देरी से इन किसानों की जमीनें बंजर हो रही हैं।
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अतरौली के विष्णु दयाल को नलकूप के लिए बिजली का कनेक्शन नहीं मिला। जिसके चलते उनकी 18 बीघा जमीन को पानी नहीं मिलने के चलते जमीन बंजर हो गई। फसलें भी नहीं बो सके। जिसके चलते पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। अब विभाग ने उनके आवेदन की ओरिजिनल फाइल भी खो दी है। इसी तरह गंगीरी के कालीचरन भी पिछले 10 महीने से नलकूप के लिए बिजली को भटक रहे हैं। इसके चलते वह मक्का, गेंहू, धान की फसल वह बो नहीं सके हैं।
बिजली अधिकारियों के कार्यालय के चक्कर काट काट कर थक चुके विष्णु दयाल कहते हैं कि सन 2017 में उन्होंने नलकूप के लिए आवेदन किया था। उम्मीद थी कि खेत को पानी मिलेगा तो घर में भी हरियाली छाएगी। लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी प्रक्रिया वहीं पर है जहां पर शुरू की थी क्योंकि विभाग ने उनकी ओरिजिनल फाइल खो दी है। अब डुप्लीकेट फाइल तैयार की जा रही है। इन दो सालों में वह कितने चक्कर विभाग के काट चुके हैें, याद नहीं है। एक बार आने जाने में ही 200 से 250 रुपये खर्च हो जाते हैं। इस दौरान वह खेत में कोई फसल नहीं बो सके हैं।
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गंगीरी के गांव मिरगौल के रहने वाले कालीचरन भी पिछले 10 महीने से नलकूप के लिए बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं। पानी नहीं होने से मक्का, गेंहू, धान जैसी फसलें वह नहीं बो सके। कालीचरन कहते हैं कि वह कुल 29325 रुपये जमा कर चुके हैं। सभी औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी हैं। विभाग की दलील है कि स्टाक में सामान नहीं है इसलिए कनेक्शन में देरी हो रही है। लेकिन कनेक्शन में हो रही देरी से इन किसानों की जमीनें बंजर हो रही हैं।
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