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बुखार बना जानलेवा, चार साल की मासूम बच्ची की मौत
Updated Fri, 26 Oct 2018 11:49 PM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
सादाबाद। नगर और क्षेत्र में संक्रामक रोग फैलना शुरू हो गए हैं। बुखार घर-घर फैल रहा है। शुक्रवार को नगर में बुखार से एक मासूम बच्ची की हालत खराब हो गई। परिजन बच्ची को डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद परिजनों में कोहराम मचा रहा।
बारिश के बाद अब संक्रमण फैल रहा है। गांव-गांव मच्छरों का प्रकोप शुरू हो गया है। ऐसे में निजी और सरकारी अस्पतालों में पीड़ितों की लाइन लग रही हैं। सबसे अधिक बुखार, सर्दी, जुकाम के रोगी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों और वृद्धों की संख्या अधिक है। काफी संख्या में बच्चों को अस्पतालों में भर्ती भी किया जा रहा है।
पुराना डाकखाना गली निवासी आशिक की चार वर्षीय बेटी आयशा को दो दिन पहले बुखार आया था। आशिक के मुताबिक, बच्ची का उपचार निजी डॉक्टर से कराया गया, लेकिन आयशा की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार की तड़के करीब साढ़े तीन बजे उसकी तबियत अचानक अधिक खराब हो गई। परिजन बच्ची को एक निजी डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन डॉक्टर ने वहां बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इससे परिजनों में कोहराम मचा रहा।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बच्चे जल्द ही मौसमी बदलाव की चपेट में आते हैं, इसलिए बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। उनके खान-पान का ध्यान रखें। इस मौसम में ठंडी चीजें नहीं दें। झोलाछापों पर नहीं, बल्कि योग्य डॉक्टर पर ही उपचार कराएं।
-डॉ. दानवीर सिंह, सीएचसी प्रभारी
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सादाबाद। नगर और क्षेत्र में संक्रामक रोग फैलना शुरू हो गए हैं। बुखार घर-घर फैल रहा है। शुक्रवार को नगर में बुखार से एक मासूम बच्ची की हालत खराब हो गई। परिजन बच्ची को डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन डॉक्टर ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद परिजनों में कोहराम मचा रहा।
बारिश के बाद अब संक्रमण फैल रहा है। गांव-गांव मच्छरों का प्रकोप शुरू हो गया है। ऐसे में निजी और सरकारी अस्पतालों में पीड़ितों की लाइन लग रही हैं। सबसे अधिक बुखार, सर्दी, जुकाम के रोगी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों और वृद्धों की संख्या अधिक है। काफी संख्या में बच्चों को अस्पतालों में भर्ती भी किया जा रहा है।
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पुराना डाकखाना गली निवासी आशिक की चार वर्षीय बेटी आयशा को दो दिन पहले बुखार आया था। आशिक के मुताबिक, बच्ची का उपचार निजी डॉक्टर से कराया गया, लेकिन आयशा की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। शुक्रवार की तड़के करीब साढ़े तीन बजे उसकी तबियत अचानक अधिक खराब हो गई। परिजन बच्ची को एक निजी डॉक्टर के पास ले गए, लेकिन डॉक्टर ने वहां बच्ची को मृत घोषित कर दिया। इससे परिजनों में कोहराम मचा रहा।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण बच्चे जल्द ही मौसमी बदलाव की चपेट में आते हैं, इसलिए बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं। उनके खान-पान का ध्यान रखें। इस मौसम में ठंडी चीजें नहीं दें। झोलाछापों पर नहीं, बल्कि योग्य डॉक्टर पर ही उपचार कराएं।
-डॉ. दानवीर सिंह, सीएचसी प्रभारी