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धर्म परिवर्तन से खुद को अलग बता रहे परिजन
Updated Sat, 11 Aug 2018 02:04 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरदुआगंज (अलीगढ़)।
रिश्वत के मामले में दोषी पाए गए पंजाब में तैनात आईपीएस अधिकारी देशराज सिंह के बौद्ध धर्म अपनाने के फैसले से हरदुआगंज क्षेत्र के सपेरा भानपुर में रहने वाली आईपीएस की मां और भाई खुद को अलग बता रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार के किसी अन्य सदस्य के मन में बौद्ध धर्म अपनाने की बात बिल्कुल नहीं हैं। देशराज सिंह खुद समझदार हैं। वह जो भी निर्णय लेंगे, सोच समझकर लेंगे।
आईपीएस देशरात सिंह के भाई छत्रपाल सिंह ने बताया कि देशराज सिंह का डीआरडीओ में चयन हो गया था, लेकिन पिता का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और आईपीएस बने। वह शुरू से ही मेहनती, ईमानदार और धार्मिक प्रवृत्ति वाले रहे। उनकी उपलब्धियों से चिढ़कर कुछ विरोधियों ने उन्हें फंसाते हुए आज उनकी छवि को धूमिल किया है। इससे वह आहत हैं।
परिजनों का कहना है कि सम्मान व न्याय पाने के लिए वह ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। देशराज सिंह के ऊपर लगे दाग को मिटाएंगे। छत्रपाल सिंह ने कहा कि ऊपरी न्यायालय से न्याय मिला तो दोबारा देशराज सिंह को भारतीय पुलिस सेवा में नहीं जाने देंगे। सपेरा भानपुर में देशराज सिंह की मां, बडे़ भाई छत्रपाल सिंह, सत्यवीर सिंह व ओमवीर सिंह रहते हैं, जबकि दो अन्य भाई नौकरी के चलते गांव से बाहर रहते हैं।
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2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के शांतिपूर्ण कराए थे चुनाव
भाई छत्रपाल सिंह ने बताया कि पंजाब में एसपी का पद ग्रहण करने के बाद देशराज सिंह ने पहली बार पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनावों को शांतिपूर्वक संपन्न कराया था। इसी उपलब्धि पर उन्हें चंडीगढ़ में स्वतंत्रता दिवस पर होने वाली परेड को संचालित करने की कमान भी सौंपी गई थी।
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रिश्वत के मामले में दोषी पाए गए पंजाब में तैनात आईपीएस अधिकारी देशराज सिंह के बौद्ध धर्म अपनाने के फैसले से हरदुआगंज क्षेत्र के सपेरा भानपुर में रहने वाली आईपीएस की मां और भाई खुद को अलग बता रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार के किसी अन्य सदस्य के मन में बौद्ध धर्म अपनाने की बात बिल्कुल नहीं हैं। देशराज सिंह खुद समझदार हैं। वह जो भी निर्णय लेंगे, सोच समझकर लेंगे।
आईपीएस देशरात सिंह के भाई छत्रपाल सिंह ने बताया कि देशराज सिंह का डीआरडीओ में चयन हो गया था, लेकिन पिता का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और आईपीएस बने। वह शुरू से ही मेहनती, ईमानदार और धार्मिक प्रवृत्ति वाले रहे। उनकी उपलब्धियों से चिढ़कर कुछ विरोधियों ने उन्हें फंसाते हुए आज उनकी छवि को धूमिल किया है। इससे वह आहत हैं।
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परिजनों का कहना है कि सम्मान व न्याय पाने के लिए वह ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। देशराज सिंह के ऊपर लगे दाग को मिटाएंगे। छत्रपाल सिंह ने कहा कि ऊपरी न्यायालय से न्याय मिला तो दोबारा देशराज सिंह को भारतीय पुलिस सेवा में नहीं जाने देंगे। सपेरा भानपुर में देशराज सिंह की मां, बडे़ भाई छत्रपाल सिंह, सत्यवीर सिंह व ओमवीर सिंह रहते हैं, जबकि दो अन्य भाई नौकरी के चलते गांव से बाहर रहते हैं।
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2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के शांतिपूर्ण कराए थे चुनाव
भाई छत्रपाल सिंह ने बताया कि पंजाब में एसपी का पद ग्रहण करने के बाद देशराज सिंह ने पहली बार पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनावों को शांतिपूर्वक संपन्न कराया था। इसी उपलब्धि पर उन्हें चंडीगढ़ में स्वतंत्रता दिवस पर होने वाली परेड को संचालित करने की कमान भी सौंपी गई थी।