{"_id":"5cbccb04bdec2214374a9622","slug":"151555876612-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज अमर उजाला की गोद में आएगी वट वृक्ष","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज अमर उजाला की गोद में आएगी वट वृक्ष
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
पृथ्वी दिवस पर आज सोमवार को अमर उजाला दशकों पुराने बरगद के पेड़ को गोद लेगा। ये वट वृक्ष जवाहर भवन के परिसर में निर्वाचन कार्यालय के ठीक सामने गर्व से खड़ा है। इस वट वृक्ष की उम्र तकरीबन 80 वर्ष के आसपास आंकी गई है। जिसकी घनी छांव तले ही लोकसभा चुनाव 2019 मतदान तक पहुंचा है। खैर, अमर उजाला नगर निगम के सहयोग से आगामी पांच वर्ष तक इसकी देखभाल करेगा।
आम जागरूकता से जिले भर के वट वृक्षों को बचाने की मुहिम भी साथ चलेगी। आज दोपहर 12 बजे होने वाले कार्यक्रम में नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल, मेयर मो. फुरकान और पर्यावरण विद सुबोध नंदन शर्मा इस सराहनीय पहल के गवाह बनेंगे। आइए आप भी इस महत्वपूर्ण सार्थक पहल के साक्षी बने। कुछ जानकारी वट वृक्ष के बाबत..
1-अमेरिका के हावर्ड यूनिवर्सिटी के मेहमान शिक्षक डा. अशोक शर्मा ने बरगद के औषधीय महत्व बताए। उन्होंने कहा कि भारतीय बरगद के पेड़ का वैज्ञानिक नाम फायकस बेंघालेंसिस है। इस पेड़ के वैज्ञानिक औषधीय शोध में पाया गया है कि इसमें बॉयोएक्टिव मॉडयूल मौजूद होते हैं।
विज्ञापन
जिसमें फेल्वोनायडस, फेनोलिक एसिड, एल्कालायडस, टेननिंस, ग्लायक्वायडस, कमेंडिंस, टिटर पेनायडस, स्टेरायल्स और विटामिन ई शामिल हैै। बरगद स्ट्रांग एंटी ऑक्सीडेंट के गुण रखने के साथ ही एंटी डायबिटीक गुणों से भरपूर है। जिससे मनुष्य के शरीर में इंसुलिन का प्राकृतिक स्राव बढ़ता है और डायबिटीज की बीमारी में बड़ी राहत मिलती है।
इसमें बेहतरीन दर्द निवारक और घाव भरने की गुण भी मौजूद हैं। अवसाद को कम कर याददाश्त और शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है। इसकी पत्तियां मच्छरों के लार्वा को पनपने नहीं देती है।
2-जिला वन अधिकारी श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि बरगद की गिनती अलग से तो नहीं कराई गई है, लेकिन अनुमान के मुताबिक 1700 के करीब बरगद के पेड़ अलीगढ़ में हैं। देश का सबसे बड़े क्षेत्रफल वाला बरगद जगदीश चंद्र बोस इंडियन बॉटेनिकल गार्डन हावड़ा कोलकाता में है। जिसकी शिखाओं से तकरीबन 1100 बरगद उगे हैं। ये वर्ल्ड रिकार्ड में शुमार है। इसकी औसत आयु लगभग 400 वर्ष आंकी जाती है।
3-जिला उद्यान अधिकारी नंद किशोर सिहांनिया ने बताया कि बरगद का पेड़ पूरे पर्यावरण तंत्र और मानव सभ्यता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है। ये सबसे ज्यादा छांव और अत्यधिक आक्सीजन देने वाला पेड़ है। अलीगढ़ के तकरीबन सभी गांव में एक बरगद है। एक बरगद लगभग एक हजार गज के क्षेत्र में छांव और ठंडक देता है।
4-वन विभाग के पूर्व रेंजर अशोक निमेष के अनुसार लगभग सभी गांव में एक बरगद और एक पीपल का पेड़ है, क्योंकि इन दोनों पेड़ों का धार्मिक और सामाजिक महत्व है। पुराने जमाने में बरगद के पेड़ के नीचे ही गांव की चौपाल लगा करती थी।
5-अमेरिका में एप्पल कंपनी की उच्च पदस्थ नौकरी छोड़ कर खैर के जरारा गांव में प्राकृतिक खेती को बढ़वा दे रहे अभिनव गोस्वामी ने बताया कि बरगद का महत्व नई पीढ़ी को समझाना जरूरी है। जिससे इन महत्वपूर्ण वृक्षों की संख्या बढ़ाई जा सके। ये पर्यावरण तंत्र के लिए बेहद जरूरी है। अभिनव ने जरारा में अपने घर के पास के तीन वट वृक्षों को संरक्षित किया है।
6-ज्योतिषाचार्य हृदयरंजन शर्मा ने बताया कि सती सावित्री की कथा में उल्लेख है कि तप के बाद सावित्री ने यमराज से पति के अमर होने का वरदान मांगा था। जिस पर यमराज ने उनको वट वृक्ष की पूजा करने को कहा। ये भी कहा कि उसी वृक्ष की उम्र के बराबर पति की आयु होगी। इसीलिए वट सावित्री व्रत में इस वृक्ष की पूजा आज भी होती है।
विज्ञापन
पृथ्वी दिवस पर आज सोमवार को अमर उजाला दशकों पुराने बरगद के पेड़ को गोद लेगा। ये वट वृक्ष जवाहर भवन के परिसर में निर्वाचन कार्यालय के ठीक सामने गर्व से खड़ा है। इस वट वृक्ष की उम्र तकरीबन 80 वर्ष के आसपास आंकी गई है। जिसकी घनी छांव तले ही लोकसभा चुनाव 2019 मतदान तक पहुंचा है। खैर, अमर उजाला नगर निगम के सहयोग से आगामी पांच वर्ष तक इसकी देखभाल करेगा।
आम जागरूकता से जिले भर के वट वृक्षों को बचाने की मुहिम भी साथ चलेगी। आज दोपहर 12 बजे होने वाले कार्यक्रम में नगर आयुक्त सत्य प्रकाश पटेल, मेयर मो. फुरकान और पर्यावरण विद सुबोध नंदन शर्मा इस सराहनीय पहल के गवाह बनेंगे। आइए आप भी इस महत्वपूर्ण सार्थक पहल के साक्षी बने। कुछ जानकारी वट वृक्ष के बाबत..
विज्ञापन
1-अमेरिका के हावर्ड यूनिवर्सिटी के मेहमान शिक्षक डा. अशोक शर्मा ने बरगद के औषधीय महत्व बताए। उन्होंने कहा कि भारतीय बरगद के पेड़ का वैज्ञानिक नाम फायकस बेंघालेंसिस है। इस पेड़ के वैज्ञानिक औषधीय शोध में पाया गया है कि इसमें बॉयोएक्टिव मॉडयूल मौजूद होते हैं।
विज्ञापन
जिसमें फेल्वोनायडस, फेनोलिक एसिड, एल्कालायडस, टेननिंस, ग्लायक्वायडस, कमेंडिंस, टिटर पेनायडस, स्टेरायल्स और विटामिन ई शामिल हैै। बरगद स्ट्रांग एंटी ऑक्सीडेंट के गुण रखने के साथ ही एंटी डायबिटीक गुणों से भरपूर है। जिससे मनुष्य के शरीर में इंसुलिन का प्राकृतिक स्राव बढ़ता है और डायबिटीज की बीमारी में बड़ी राहत मिलती है।
इसमें बेहतरीन दर्द निवारक और घाव भरने की गुण भी मौजूद हैं। अवसाद को कम कर याददाश्त और शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है। इसकी पत्तियां मच्छरों के लार्वा को पनपने नहीं देती है।
2-जिला वन अधिकारी श्रीधर त्रिपाठी ने बताया कि बरगद की गिनती अलग से तो नहीं कराई गई है, लेकिन अनुमान के मुताबिक 1700 के करीब बरगद के पेड़ अलीगढ़ में हैं। देश का सबसे बड़े क्षेत्रफल वाला बरगद जगदीश चंद्र बोस इंडियन बॉटेनिकल गार्डन हावड़ा कोलकाता में है। जिसकी शिखाओं से तकरीबन 1100 बरगद उगे हैं। ये वर्ल्ड रिकार्ड में शुमार है। इसकी औसत आयु लगभग 400 वर्ष आंकी जाती है।
3-जिला उद्यान अधिकारी नंद किशोर सिहांनिया ने बताया कि बरगद का पेड़ पूरे पर्यावरण तंत्र और मानव सभ्यता के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी है। ये सबसे ज्यादा छांव और अत्यधिक आक्सीजन देने वाला पेड़ है। अलीगढ़ के तकरीबन सभी गांव में एक बरगद है। एक बरगद लगभग एक हजार गज के क्षेत्र में छांव और ठंडक देता है।
4-वन विभाग के पूर्व रेंजर अशोक निमेष के अनुसार लगभग सभी गांव में एक बरगद और एक पीपल का पेड़ है, क्योंकि इन दोनों पेड़ों का धार्मिक और सामाजिक महत्व है। पुराने जमाने में बरगद के पेड़ के नीचे ही गांव की चौपाल लगा करती थी।
5-अमेरिका में एप्पल कंपनी की उच्च पदस्थ नौकरी छोड़ कर खैर के जरारा गांव में प्राकृतिक खेती को बढ़वा दे रहे अभिनव गोस्वामी ने बताया कि बरगद का महत्व नई पीढ़ी को समझाना जरूरी है। जिससे इन महत्वपूर्ण वृक्षों की संख्या बढ़ाई जा सके। ये पर्यावरण तंत्र के लिए बेहद जरूरी है। अभिनव ने जरारा में अपने घर के पास के तीन वट वृक्षों को संरक्षित किया है।
6-ज्योतिषाचार्य हृदयरंजन शर्मा ने बताया कि सती सावित्री की कथा में उल्लेख है कि तप के बाद सावित्री ने यमराज से पति के अमर होने का वरदान मांगा था। जिस पर यमराज ने उनको वट वृक्ष की पूजा करने को कहा। ये भी कहा कि उसी वृक्ष की उम्र के बराबर पति की आयु होगी। इसीलिए वट सावित्री व्रत में इस वृक्ष की पूजा आज भी होती है।