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थैंक्स अमर उजाला आपकी वजह से मिल गया मेरा बेटा
Updated Sun, 14 Jan 2018 01:29 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
थैंक्स अमर उजाला आपकी वजह से मुझे मेरा बेटा मिल गया। एक माह तक अपने छह वर्षीय बेटे की याद में तड़पती रही रेशमा की खुशी उसके शब्दों में झलकती नजर आती है। बरसती आंखों से वह समाचार पत्र के प्रति कृतज्ञ नजर आई तो वहां मौजूद लोग भी इस दृश्य को देखकर पलकें गीली होने से नहीं रोक पाए।
उड़ान सोसायटी द्वारा संचालित चाइल्ड लाइन को थाना क्वार्सी से दो जनवरी को एक छहवर्षीय बालक रिजवान प्राप्त हुआ था। पता चला कि यह बालक महेशपुर निवासी नईम सलमान जहीर को सात दिसंबर को बूढ़े बाबा की पुलिया के निकट मिला था, जिसे वह अपने घर ले गए थे।
बाद में बालक के माता पिता का कोई सुराग न मिलने पर यह लोग उसे थाना क्वार्सी लेकर आ गए। जहां बालक रिजवान को चाइल्ड लाइन की सुपुर्दगी में दे दिया गया।
चाइल्ड लाइन की टीम बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार रिजवान के माता पिता की खोज धोर्रा के आसपास के स्थानों पर कर रही थी। कोई खोज खबर न मिलने पर उड़ान सोसाइटी के अध्यक्ष व चाइल्ड लाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने अमर उजाला को सूचना दी।
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11 जनवरी के अंक में बालक के विषय में फोटो सहित खबर प्रकाशित की तो रिजवान के पड़ोस में रहने वाली बालिका भारती ने खबर को पढ़ा और दिए गए नंबर पर ज्ञानेंद्र मिश्रा से संपर्क किया।
शनिवार को बालक की मां रेशमा अखबार की प्रति लेकर अन्य महिलाओं के साथ चाइल्ड लाइन के कार्यालय पहुंची। अपने बच्चे को एक माह बाद पाकर रेशमा की आंखें छलक आईं तो नन्हा रिजवान भी मां से लिपट गया।
बाल कल्याण समिति के सदस्य मटरूमल व साधना गुप्ता ने आवश्यक कार्यवाही कर बालक को मां के सुपुर्द कर दिया। क्वार्सी गली नंबर दो की रहने वाली रेशमा ने बताया कि उसके पति लियाकत का देहांत तीन वर्ष पूर्व हो चुका है।
वह मिथराज हास्पिटल में साफ -सफाई का कार्य कर परिवार का पोषण करती है। सात दिसंबर की शाम को वह परिवार के सदस्यों के साथ ग्लोबल रेजीडेंसी में लगे मेले में गई थी।
वहां रिजवान परिवार से बिछुड़ गया। तब से वह बालक की तलाश कर रही थी। वह क्वार्सी थाने में बालक की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने भी गई, लेकिन रिजवान के विषय में कोई पता नहीं चल सका।
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थैंक्स अमर उजाला आपकी वजह से मुझे मेरा बेटा मिल गया। एक माह तक अपने छह वर्षीय बेटे की याद में तड़पती रही रेशमा की खुशी उसके शब्दों में झलकती नजर आती है। बरसती आंखों से वह समाचार पत्र के प्रति कृतज्ञ नजर आई तो वहां मौजूद लोग भी इस दृश्य को देखकर पलकें गीली होने से नहीं रोक पाए।
उड़ान सोसायटी द्वारा संचालित चाइल्ड लाइन को थाना क्वार्सी से दो जनवरी को एक छहवर्षीय बालक रिजवान प्राप्त हुआ था। पता चला कि यह बालक महेशपुर निवासी नईम सलमान जहीर को सात दिसंबर को बूढ़े बाबा की पुलिया के निकट मिला था, जिसे वह अपने घर ले गए थे।
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बाद में बालक के माता पिता का कोई सुराग न मिलने पर यह लोग उसे थाना क्वार्सी लेकर आ गए। जहां बालक रिजवान को चाइल्ड लाइन की सुपुर्दगी में दे दिया गया।
चाइल्ड लाइन की टीम बाल कल्याण समिति के आदेशानुसार रिजवान के माता पिता की खोज धोर्रा के आसपास के स्थानों पर कर रही थी। कोई खोज खबर न मिलने पर उड़ान सोसाइटी के अध्यक्ष व चाइल्ड लाइन के निदेशक ज्ञानेंद्र मिश्रा ने अमर उजाला को सूचना दी।
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11 जनवरी के अंक में बालक के विषय में फोटो सहित खबर प्रकाशित की तो रिजवान के पड़ोस में रहने वाली बालिका भारती ने खबर को पढ़ा और दिए गए नंबर पर ज्ञानेंद्र मिश्रा से संपर्क किया।
शनिवार को बालक की मां रेशमा अखबार की प्रति लेकर अन्य महिलाओं के साथ चाइल्ड लाइन के कार्यालय पहुंची। अपने बच्चे को एक माह बाद पाकर रेशमा की आंखें छलक आईं तो नन्हा रिजवान भी मां से लिपट गया।
बाल कल्याण समिति के सदस्य मटरूमल व साधना गुप्ता ने आवश्यक कार्यवाही कर बालक को मां के सुपुर्द कर दिया। क्वार्सी गली नंबर दो की रहने वाली रेशमा ने बताया कि उसके पति लियाकत का देहांत तीन वर्ष पूर्व हो चुका है।
वह मिथराज हास्पिटल में साफ -सफाई का कार्य कर परिवार का पोषण करती है। सात दिसंबर की शाम को वह परिवार के सदस्यों के साथ ग्लोबल रेजीडेंसी में लगे मेले में गई थी।
वहां रिजवान परिवार से बिछुड़ गया। तब से वह बालक की तलाश कर रही थी। वह क्वार्सी थाने में बालक की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने भी गई, लेकिन रिजवान के विषय में कोई पता नहीं चल सका।