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यहां थाने में कदम रखने के लिए देने पड़ते हैं दस रुपये
Updated Thu, 22 Jun 2017 12:51 AM IST
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यहां थाने में कदम रखने के लिए देने पड़ते हैं दस रुपये
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
जी हां, जनपद में दो थाने ऐसे भी हैं, जहां प्रवेश करने पर पीड़ित को दस रुपये का भुगतान करना पड़ता है। इन थानों का ऐसा नक्शा बनाया गया है, जिसमें दोनों का मैन गेट प्लेटफार्म नंबर दो की ओर है। यहां आने वाले हर एक शख्स को पहले रेलवे से दस रुपये की प्लेटफार्म टिकट लेनी पड़ेगी। उसके बाद ही वह पुलिस को अपनी परेशानी से अवगत करा पाएगा।
जनपद में महिला थाने को मिलाकर 27 थाने हैं। वहीं जीआरपी व आरपीएफ थाने को मिलाकर 29 थाने होते हैं। यह दो थाने एक मात्र ऐसे हैं, जहां बाहरी व्यक्ति केस के संबंध में, पुराने मामले में मुलाकात, पीड़ित के परिजनों या अन्य काम से आने वाले लोगों को दस रुपये का भुगतान रेलवे को करना पड़ता है। पुलिस व थाने के द्वारा जनता के लिए 24 घंटे खुले होते हैं, लेकिन यहां बगैर प्लेटफार्म टिकट लिए स्टेशन पर प्र्रवेश नहीं कर सकते। इसका कारण एक यह भी है कि इन दोनों थाने का मैन गेट प्लेटफार्म की तरफ है और थानों का एक गेट होने की वजह से लोगों को इस सिस्टम से गुजरना पड़ता है। इससे प्रतीत होता है कि थानों के निर्माण के समय रेल अधिकारियों का शायद इस ओर ध्यान नहीं गया।
कई बार भूल जाते हैं टिकट लेना
जल्दबाजी और भागदौड़ में कई लोग व पीड़ित के परिजन जल्दबाजी में टिकट लेना भूल जाते हैं। जब वह टीसी के हत्थे चढ़ते हैं, तो उन्हें जुर्माने का सामना भी करना पड़ जाता है। रेलवे स्टेशन प्रतिबंधित क्षेत्र है, जिसमें नियमों के मुताबिक हर खामी पर जुर्माना व सजा का प्रावधान है। चाहे वह रेल पटरी क्रास करने का मामला क्यों न हो।
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वर्जन
रेलवे अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। यहां हर किसी को ऐसे ही प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। पहले तो मुसाफिर के पास ट्रेन की टिकट होती है। यदि उनके परिजन या बाहरी व्यक्ति को स्टेशन पर आना होता, तो उन्हें नियम के मुताबिक प्लेटफार्म टिकट लेनी पड़ेगी। क्यों कि थाने का एक गेट है, जो प्लेटफार्म नंबर दो से है।
नवल किशोर, आरपीएफ थाना प्रभारी
-------------
रेल में हुई घटना के मामले में पीड़ित कभी आ जा सकता है। लेकिन उनके साथ बाहर से आने वाले लोगों को नियम के मुताबिक प्लेटफार्म टिकट लेना पड़ेगा, तभी वह थाने में प्रवेश कर सकते हैं। क्योंकि थाने का मुख्य द्वार ही प्लेटफार्म नंबर एक से है। अन्य कोई गेट इस थाने के लिए नहीं हैं।
- सत्यप्रकाश, थाना जीआरपी प्रभारी
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
जी हां, जनपद में दो थाने ऐसे भी हैं, जहां प्रवेश करने पर पीड़ित को दस रुपये का भुगतान करना पड़ता है। इन थानों का ऐसा नक्शा बनाया गया है, जिसमें दोनों का मैन गेट प्लेटफार्म नंबर दो की ओर है। यहां आने वाले हर एक शख्स को पहले रेलवे से दस रुपये की प्लेटफार्म टिकट लेनी पड़ेगी। उसके बाद ही वह पुलिस को अपनी परेशानी से अवगत करा पाएगा।
जनपद में महिला थाने को मिलाकर 27 थाने हैं। वहीं जीआरपी व आरपीएफ थाने को मिलाकर 29 थाने होते हैं। यह दो थाने एक मात्र ऐसे हैं, जहां बाहरी व्यक्ति केस के संबंध में, पुराने मामले में मुलाकात, पीड़ित के परिजनों या अन्य काम से आने वाले लोगों को दस रुपये का भुगतान रेलवे को करना पड़ता है। पुलिस व थाने के द्वारा जनता के लिए 24 घंटे खुले होते हैं, लेकिन यहां बगैर प्लेटफार्म टिकट लिए स्टेशन पर प्र्रवेश नहीं कर सकते। इसका कारण एक यह भी है कि इन दोनों थाने का मैन गेट प्लेटफार्म की तरफ है और थानों का एक गेट होने की वजह से लोगों को इस सिस्टम से गुजरना पड़ता है। इससे प्रतीत होता है कि थानों के निर्माण के समय रेल अधिकारियों का शायद इस ओर ध्यान नहीं गया।
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कई बार भूल जाते हैं टिकट लेना
जल्दबाजी और भागदौड़ में कई लोग व पीड़ित के परिजन जल्दबाजी में टिकट लेना भूल जाते हैं। जब वह टीसी के हत्थे चढ़ते हैं, तो उन्हें जुर्माने का सामना भी करना पड़ जाता है। रेलवे स्टेशन प्रतिबंधित क्षेत्र है, जिसमें नियमों के मुताबिक हर खामी पर जुर्माना व सजा का प्रावधान है। चाहे वह रेल पटरी क्रास करने का मामला क्यों न हो।
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रेलवे अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। यहां हर किसी को ऐसे ही प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। पहले तो मुसाफिर के पास ट्रेन की टिकट होती है। यदि उनके परिजन या बाहरी व्यक्ति को स्टेशन पर आना होता, तो उन्हें नियम के मुताबिक प्लेटफार्म टिकट लेनी पड़ेगी। क्यों कि थाने का एक गेट है, जो प्लेटफार्म नंबर दो से है।
नवल किशोर, आरपीएफ थाना प्रभारी
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रेल में हुई घटना के मामले में पीड़ित कभी आ जा सकता है। लेकिन उनके साथ बाहर से आने वाले लोगों को नियम के मुताबिक प्लेटफार्म टिकट लेना पड़ेगा, तभी वह थाने में प्रवेश कर सकते हैं। क्योंकि थाने का मुख्य द्वार ही प्लेटफार्म नंबर एक से है। अन्य कोई गेट इस थाने के लिए नहीं हैं।
- सत्यप्रकाश, थाना जीआरपी प्रभारी