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देश के 50 सेंटरों में दूसरे स् थान पर एएमयू का डीआईएससी
Updated Tue, 22 May 2018 01:48 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इंटरडिसिप्लीनरी बायाटेक्नोलॉजी यूनिट के डिस्ट्रीब्यूटिड इनफोरमेशन सब सेंटर (डीआईएससी) को बायोइंफोरमेटिक शोध के क्षेत्र में प्रोत्साहन अवार्ड से नवाजते हुए देश के दूसरे नंबर का सेंटर घोषित किया है।
सेंटर के निदेशक प्रो. असद उल्लाह खां ने बताया है कि एएमयू में इंटरडिसीप्लीनरी बॉयोटेक्नोलॉजी यूनिट के डिस्ट्रीब्यूटिड इनफोरमेशन सब सेंटर की स्थापना वर्ष 1989-90 में की गई थी, जहां बायोइंफारमेटिक में छात्र एमएससी, एमफिल और पीएचडी का कोर्स कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एएमयू के सेंटर को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने देश में मौजूदा 50 डीआईएससी सेंटरों में दूसरा स्थान प्रदान किया है और सेंटर को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा बायोइंफोरमेटिक में शोध के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया है।
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उन्होंने बताया है कि डीआईएससी डेडीकेटिड एफटीटीएच कनेक्शन के साथ ही यूनिवर्सिटी इंटरनेट सुविधा, सर्वर और सिस्टम से पूरी तरह लैस है। यहां पर देश और विदेश के शोधार्थियों और युवा शिक्षकों के लियए बायोइंफोरमेटिक पर हरेक वर्ष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है।
प्रो. असद ने माडर्न बायोलोजी और बायोइंफोरमेटिक के क्षेत्र में रिसर्च को मजबूती प्रदान करने के लिए नए टूल, वैब सर्वर और डाटा बेस विकसित किए हैं।
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भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इंटरडिसिप्लीनरी बायाटेक्नोलॉजी यूनिट के डिस्ट्रीब्यूटिड इनफोरमेशन सब सेंटर (डीआईएससी) को बायोइंफोरमेटिक शोध के क्षेत्र में प्रोत्साहन अवार्ड से नवाजते हुए देश के दूसरे नंबर का सेंटर घोषित किया है।
सेंटर के निदेशक प्रो. असद उल्लाह खां ने बताया है कि एएमयू में इंटरडिसीप्लीनरी बॉयोटेक्नोलॉजी यूनिट के डिस्ट्रीब्यूटिड इनफोरमेशन सब सेंटर की स्थापना वर्ष 1989-90 में की गई थी, जहां बायोइंफारमेटिक में छात्र एमएससी, एमफिल और पीएचडी का कोर्स कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि एएमयू के सेंटर को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने देश में मौजूदा 50 डीआईएससी सेंटरों में दूसरा स्थान प्रदान किया है और सेंटर को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा बायोइंफोरमेटिक में शोध के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया है।
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उन्होंने बताया है कि डीआईएससी डेडीकेटिड एफटीटीएच कनेक्शन के साथ ही यूनिवर्सिटी इंटरनेट सुविधा, सर्वर और सिस्टम से पूरी तरह लैस है। यहां पर देश और विदेश के शोधार्थियों और युवा शिक्षकों के लियए बायोइंफोरमेटिक पर हरेक वर्ष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है।
प्रो. असद ने माडर्न बायोलोजी और बायोइंफोरमेटिक के क्षेत्र में रिसर्च को मजबूती प्रदान करने के लिए नए टूल, वैब सर्वर और डाटा बेस विकसित किए हैं।