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यूपी-हरियाणा सीमा विवाद-अब कोर्स तकनीकी से होगी पिलर की मानीटरिंग

Wed, 12 Dec 2018 02:11 AM IST
Updated Wed, 12 Dec 2018 02:11 AM IST
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यूपी-हरियाणा सीमा विवाद-अब कोर्स तकनीकी से होगी पिलर की मानीटरिंग
डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
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करीब 22-23 वर्षों से चल रहे यूपी हरियाणा सीमा विवाद हल होने के करीब नजर आ रहा है। इस मामले में मंगलवार को दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में हरियाणा सरकार की मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में दोनों राज्यों के अफसरों ने अपना प्रस्तुतीकरण दिया। तय किया गया कि दोनों राज्यों की हदबंदी के लिए लागू दीक्षित अवार्ड को हटाकर नई कोर्स तकनीकी का इस्तेमाल हदबंदी के लिए किया जाय। साथ ही सर्वे आफ इंडिया से नए सिरे से सर्वे कराकर दोनों राज्यों की सीमाएं दोबारा से तय कर ली जाय। यमुना की धारा बदलने के चलते अलीगढ़ की करीब 2816 एकड़ भूमि हरियाणा सीमा में चली गई है, जबकि वहां की करीब 1200 एकड़ भूमि यहां के किसानों के हिस्से में आ गई है। विवाद की जड़ बनी इस जमीन को लेकर अब तक न तो जन प्रतिनिधि ही कोई हल निकाल पाए और न ही प्रशासन। मंगलवार को इस मामले में नया मोड़ आ गया है। दिल्ली के हरियाणा भवन में हरियाणा की अतिरिक्त मुख्य सचिव केशानी आनंद अरोरा एवं कमिश्नर जी अनुपमा की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के अफसरों की महत्वपूर्ण बैठक हुई।

बैठक में भाग लेकर लौटे एडीएम वित्त एवं राजस्व उदय सिंह ने बताया कि इस मौके पर तहसीलदार खैर कौशल कुमार ने अलीगढ़ के किसानों की ओर से अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि हरियाणा के पलवल प्रशासन ने हरियाणा की ओर गई अलीगढ़ की जमीन की चकबंदी कर वहां के काश्तकारों को दे दी थी। इस जमीनों को वापस कराया जाय। दीक्षित अवार्ड का मसला भी उठा। निर्णय लिया गया कि चूंकि जमीनों की हदबंदी के लिए लागू दीक्षित अवार्ड तकनीकी काफी पुरानी है। अत: नई तकनीकी कोर्स के जरिये दोबारा से हदबंदी की जाय और सर्वे आफ इंडिया से दोबारा से सर्वे कराकर हदबंदी की जाय। इस मौके पर दोनों राज्यों के उच्चाधिकारी मौजूद थे।
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‘कोर्स’ तकनीकी से मोबाइल से पता लगेगा कि कहां है पिलर
अलीगढ़। तहसीलदार खैर कौशल कुमार ने बताया कि कोर्स तकनीकी एडवांस तकनीकी है। इस तकनीकी में पिलर के बजाय मोबाइल की तरह टावर लगाए जाते हैं। इन टावरों के माध्यम से मोबाइल से ही पता चल जाता है कि पिलर कहां है। इससे किसी के द्वारा पिलर उखाड़ने अथवा नदी की धारा के साथ पिलर के बह जाने के बावजूद भी हदबंदी का सही आंकलन हो सकेगा।
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