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जिला अस्पताल में एंटी रैबीज को लेकर किल्लत, नहीं होने के पोस्टर चिपकाए
Updated Thu, 02 Aug 2018 02:08 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
दो महीने के बाद भी मलखान सिंह जिला अस्पताल में कुत्ते के काटने के बाद लगाए जाने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शन आम लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बुधवार को इसके चलते मरीजों को बेहद असुविधा का सामना करना पड़ा। मरीजों के रुख को देखते हुए संबंधित चिकित्सक ने कक्ष के बाहर पोस्ट चिपका दिया है कि इंजेक्शन नहीं हैं।
पिछले दो महीने से सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं हैं। इसके चलते मरीजों को भटकाव की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों द्वारा दावा किया गया था कि 20 जुलाई के आसपास तक आपूर्ति सुचारु हो जाएगी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
केवल जिला अस्पताल में ही प्रतिदिन 225 से 250 मरीज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल खुद स्वीकार करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आने वालों की भीड़ बहुत बढ़ गई।
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मरीजों को बार-बार समझाया गया कि अभी इंजेक्शन नहीं उपलब्ध हो रहे हैं, लेकिन मरीजों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन इंजेक्शन जानबूझ कर नहीं दे रहा है।
इस बात को लेकर नोकझोंक की स्थिति भी बनी। बाद में एक पोस्टर चिपकाया गया, जिस पर लिखा हुआ था कि अस्पताल में कुत्ते के काटने के इंजेक्शन, एआरबी समाप्त हो गए हैं। पुन: आपूर्ति होने पर इंजेक्शन लगाए जाएंगे। इसके बाद ही मरीजों का आक्रोश कुछ शांत हो सका।
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दो महीने के बाद भी मलखान सिंह जिला अस्पताल में कुत्ते के काटने के बाद लगाए जाने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शन आम लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। बुधवार को इसके चलते मरीजों को बेहद असुविधा का सामना करना पड़ा। मरीजों के रुख को देखते हुए संबंधित चिकित्सक ने कक्ष के बाहर पोस्ट चिपका दिया है कि इंजेक्शन नहीं हैं।
पिछले दो महीने से सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं हैं। इसके चलते मरीजों को भटकाव की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों द्वारा दावा किया गया था कि 20 जुलाई के आसपास तक आपूर्ति सुचारु हो जाएगी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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केवल जिला अस्पताल में ही प्रतिदिन 225 से 250 मरीज एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आते हैं। सीएमओ डॉ. एमएल अग्रवाल खुद स्वीकार करते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आने वालों की भीड़ बहुत बढ़ गई।
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मरीजों को बार-बार समझाया गया कि अभी इंजेक्शन नहीं उपलब्ध हो रहे हैं, लेकिन मरीजों का आरोप था कि अस्पताल प्रशासन इंजेक्शन जानबूझ कर नहीं दे रहा है।
इस बात को लेकर नोकझोंक की स्थिति भी बनी। बाद में एक पोस्टर चिपकाया गया, जिस पर लिखा हुआ था कि अस्पताल में कुत्ते के काटने के इंजेक्शन, एआरबी समाप्त हो गए हैं। पुन: आपूर्ति होने पर इंजेक्शन लगाए जाएंगे। इसके बाद ही मरीजों का आक्रोश कुछ शांत हो सका।