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गर्भनिरोधकों को लेकर बढ़ गया जागरूकता स्तर
Updated Thu, 15 Feb 2018 01:36 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
पिछले पांच वर्षों में महिलाओं में गर्भनिरोधकों के प्रयोग को लेकर 60 फीसदी तक जागरूकता स्तर बढ़ा है। मोहन लाल गौतम जिला महिला चिकित्सालय में आए मामलों में इस रुझान का पता लगा है। खास बात यह है कि महिला के साथ-साथ परिजन भी इसको आसानी से स्वीकार कर रहे हैं। इससे महिलाओं के एनीमिया होने के केसों में भी काफी कमी आई है।
मोहनलाल गौतम महिला चिकित्सालय की सीएमएस के अनुसार प्रसव के बाद ही महिला व उसके परिजनों की सहमति पर गर्भनिरोधक का प्रयोग कराया जाता है।
यह महिला बच्चे व परिवार सभी के हित में रहता है। इसमें सबसे अधिक संख्या कॉपर-टी के प्रयोग करने वालों की है। इसके बाद नसबंदी के मामले हैं। दूसरी ओर सबसे कम दर पुरुष नसबंदी के मामलों में रहती है।
उन्होंने बताया कि प्रसव के समय ही गर्भनिरोधक को महिला में इंप्लांट करना आसान होता है। इसके लिए महिला और उसके परिजनों की पहले ही काउंसलिंग कर दी जाती है।
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परिजनों को बता दिया जाता है कि दो बच्चों में अंतर रहने और परिवार के सीमित रहने से महिला का स्वास्थ्य ठीक रहेगा तो बच्चों की परवरिश भी अच्छी हो सकेगी।
- हमारे यहां पर महीने में एक हजार से डेढ़ हजार तक प्रसव होते हैं। काउंसलिंग के बाद महिलाओं को पीपीआईसीडी के तहत महिला को पहले काउंलिंग और ट्रीट किया जाता है। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।
- डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
महिला अस्पताल में एक महीने से गर्भनिरोधक नहीं
पिछले एक महीने से मोहन लाल गौतम जिला महिला चिकित्सालय में गर्भनिरोधक नहीं है। इससे अस्पताल आने वाली महिलाओं को बेहद असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मामला सामने आने के बाद अब सीएमओ जल्द ही गर्भनिरोधकों की आपूर्ति करने की बात कह रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में एक दिन में 35 से 40 प्रसव होते हैं। साथ ही करीब 400 महिलाओं की ओपीडी भी होती है।
महिला के गर्भ धारण करने से लेकर प्रसव के बाद टीकाकरण तक महिला को अस्पताल में लाया जाता है। साथ ही महिला को प्रसव के बाद 5 हजार रुपये भी प्रदान किए जाते हैं।
इसी के साथ दो बच्चों के जन्म में अंतर रखने के लिए गर्भ निरोधक भी दिए जाते हैं। इनमें से पिछले एक महीने से अस्पताल में माला डी गर्भ निरोधक गोलियां, निरोध और कापर टी आदि नहीं हैं।
इससे यहां पर आ रही महिलाओं को बेहद असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं यह गर्भनिरोधक सीएमओ कार्यालय से प्रदान किए जाते हैं। वहां से इनकी उपलब्धता अस्पताल को नहीं हो पा रही है।
- हमने जिला महिला अस्पताल को कह रखा है कि जब भी उनके पास एक महीने का स्टाक बचा हो तो हमें सूचना दे दें। सामान भेजने में चार पांच दिन का समय लगता है। जब पूरा सामान खत्म हो गया तब हमें सूचित किया गया। अब मैं मंगलवार तक सामान की उपलब्धता करा दूंगा।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ
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पिछले पांच वर्षों में महिलाओं में गर्भनिरोधकों के प्रयोग को लेकर 60 फीसदी तक जागरूकता स्तर बढ़ा है। मोहन लाल गौतम जिला महिला चिकित्सालय में आए मामलों में इस रुझान का पता लगा है। खास बात यह है कि महिला के साथ-साथ परिजन भी इसको आसानी से स्वीकार कर रहे हैं। इससे महिलाओं के एनीमिया होने के केसों में भी काफी कमी आई है।
मोहनलाल गौतम महिला चिकित्सालय की सीएमएस के अनुसार प्रसव के बाद ही महिला व उसके परिजनों की सहमति पर गर्भनिरोधक का प्रयोग कराया जाता है।
यह महिला बच्चे व परिवार सभी के हित में रहता है। इसमें सबसे अधिक संख्या कॉपर-टी के प्रयोग करने वालों की है। इसके बाद नसबंदी के मामले हैं। दूसरी ओर सबसे कम दर पुरुष नसबंदी के मामलों में रहती है।
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उन्होंने बताया कि प्रसव के समय ही गर्भनिरोधक को महिला में इंप्लांट करना आसान होता है। इसके लिए महिला और उसके परिजनों की पहले ही काउंसलिंग कर दी जाती है।
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परिजनों को बता दिया जाता है कि दो बच्चों में अंतर रहने और परिवार के सीमित रहने से महिला का स्वास्थ्य ठीक रहेगा तो बच्चों की परवरिश भी अच्छी हो सकेगी।
- हमारे यहां पर महीने में एक हजार से डेढ़ हजार तक प्रसव होते हैं। काउंसलिंग के बाद महिलाओं को पीपीआईसीडी के तहत महिला को पहले काउंलिंग और ट्रीट किया जाता है। इसके अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।
- डॉ. गीता प्रधान, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
महिला अस्पताल में एक महीने से गर्भनिरोधक नहीं
पिछले एक महीने से मोहन लाल गौतम जिला महिला चिकित्सालय में गर्भनिरोधक नहीं है। इससे अस्पताल आने वाली महिलाओं को बेहद असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। मामला सामने आने के बाद अब सीएमओ जल्द ही गर्भनिरोधकों की आपूर्ति करने की बात कह रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में एक दिन में 35 से 40 प्रसव होते हैं। साथ ही करीब 400 महिलाओं की ओपीडी भी होती है।
महिला के गर्भ धारण करने से लेकर प्रसव के बाद टीकाकरण तक महिला को अस्पताल में लाया जाता है। साथ ही महिला को प्रसव के बाद 5 हजार रुपये भी प्रदान किए जाते हैं।
इसी के साथ दो बच्चों के जन्म में अंतर रखने के लिए गर्भ निरोधक भी दिए जाते हैं। इनमें से पिछले एक महीने से अस्पताल में माला डी गर्भ निरोधक गोलियां, निरोध और कापर टी आदि नहीं हैं।
इससे यहां पर आ रही महिलाओं को बेहद असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल की सीएमएस डॉ. गीता प्रधान कहती हैं यह गर्भनिरोधक सीएमओ कार्यालय से प्रदान किए जाते हैं। वहां से इनकी उपलब्धता अस्पताल को नहीं हो पा रही है।
- हमने जिला महिला अस्पताल को कह रखा है कि जब भी उनके पास एक महीने का स्टाक बचा हो तो हमें सूचना दे दें। सामान भेजने में चार पांच दिन का समय लगता है। जब पूरा सामान खत्म हो गया तब हमें सूचित किया गया। अब मैं मंगलवार तक सामान की उपलब्धता करा दूंगा।
- डॉ. एमएल अग्रवाल, सीएमओ