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भाजपा के लिए आसान नहीं 2019 की राह
Updated Wed, 12 Dec 2018 02:07 AM IST
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डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव के रुझान पर राजनीति के विशेषज्ञ नजर गड़ाए हुए हैं। अब तक जो चुनाव परिणाम एवं रुझान सामने आए हैं, उससे यह तय हो गया है कि 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए उतना आसान नहीं हैं, जितना लोग समझ रहे हैं। यह भी स्पष्ट हो गया है कि चुनाव परिणाम या रुझान अप्रत्याशित नहीं है। प्रस्तुत है राजनीति विज्ञान के एक्सपर्ट का आंकलन...
मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में 15-15 साल से बीजेपी की सरकार थी। चुनाव परिणाम एवं रुझान का असर लोकसभा चुनाव 2019 पर भी देखने को मिलेगी। 2019 का चुनाव भाजपा के लिए उतना आसान नहीं होगा, जितना लोग सोच रहे हैं। कांग्रेस एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आई है। मध्य प्रदेश में अनुकूल परिणाम आया तो राहुल गांधी प्रधानमंत्री के प्रबल दावेदार के रूप में उभरकर सामने आएंगे। जो लोग कांग्रेस से हाथ मिलाने से कतरा रहे थे, वो अब निकट आएंगे। यह भी तय हो गया कि भाजपा का हेट पालिटिक्स (घृणा की राजनीति) फेल हो गई। चुनाव में राम जन्म भूमि के बदले बुनियादी सवाल हावी रहें। कांग्रेस ने किसानों को बहुत सपने दिखाएं हैं। किसानों से जुड़े मुद्दे प्रभावशाली तरीके से सामने आए। राजस्थान सहित अन्य राज्यों में जीएसटी, नोटबंदी, किसानों की आत्महत्या आदि के मुद्दे प्रभावी रहे।
- प्रो. आफताब आलम, एएमयू राजनीति विज्ञान विभाग
राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश में एंटी इनकंबेसी (सत्ता विरोधी लहर) रही। छत्तीसगढ़ को छोड़कर अन्य प्रदेशों के रुझान में कोई नाटकीय परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है। लोग अनुमान लगा रहे थे कि छत्तीसगढ़ फिर बीजेपी के खाते में जाएगी। लेकिन वहां बिल्कुल उल्टा हुआ। मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के रुझान वैसे ही हैं, जैसा लोग सोच रहे थे। राजस्थान में पांच साल बाद सरकार बदल जाती है। ऐसा ट्रेंड कई सालों से देखा जा रहा है। जनता को जज्बाती बनाकर वोट लेने की नीति विधान सभा चुनाव में विफल साबित हुई। मतदाताओं ने रियल लाइफ इसू को तवज्जो दिया। ऐसा लगता है कि नोटबंदी एवं जीएसटी का असर जनता अब महसूस कर रही है। नौकरी एवं आय में कमी आया होगा। जनता ने उन चीजों को महत्व दिया, जिससे उनकी जिंदगी प्रभावित हो रही थी।
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- प्रो. असमर बेग, एएमयू राजनीति विज्ञान विभाग
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राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश सहित पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव के रुझान पर राजनीति के विशेषज्ञ नजर गड़ाए हुए हैं। अब तक जो चुनाव परिणाम एवं रुझान सामने आए हैं, उससे यह तय हो गया है कि 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए उतना आसान नहीं हैं, जितना लोग समझ रहे हैं। यह भी स्पष्ट हो गया है कि चुनाव परिणाम या रुझान अप्रत्याशित नहीं है। प्रस्तुत है राजनीति विज्ञान के एक्सपर्ट का आंकलन...
मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में 15-15 साल से बीजेपी की सरकार थी। चुनाव परिणाम एवं रुझान का असर लोकसभा चुनाव 2019 पर भी देखने को मिलेगी। 2019 का चुनाव भाजपा के लिए उतना आसान नहीं होगा, जितना लोग सोच रहे हैं। कांग्रेस एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरकर सामने आई है। मध्य प्रदेश में अनुकूल परिणाम आया तो राहुल गांधी प्रधानमंत्री के प्रबल दावेदार के रूप में उभरकर सामने आएंगे। जो लोग कांग्रेस से हाथ मिलाने से कतरा रहे थे, वो अब निकट आएंगे। यह भी तय हो गया कि भाजपा का हेट पालिटिक्स (घृणा की राजनीति) फेल हो गई। चुनाव में राम जन्म भूमि के बदले बुनियादी सवाल हावी रहें। कांग्रेस ने किसानों को बहुत सपने दिखाएं हैं। किसानों से जुड़े मुद्दे प्रभावशाली तरीके से सामने आए। राजस्थान सहित अन्य राज्यों में जीएसटी, नोटबंदी, किसानों की आत्महत्या आदि के मुद्दे प्रभावी रहे।
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- प्रो. आफताब आलम, एएमयू राजनीति विज्ञान विभाग
राजस्थान, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश में एंटी इनकंबेसी (सत्ता विरोधी लहर) रही। छत्तीसगढ़ को छोड़कर अन्य प्रदेशों के रुझान में कोई नाटकीय परिवर्तन देखने को नहीं मिल रहा है। लोग अनुमान लगा रहे थे कि छत्तीसगढ़ फिर बीजेपी के खाते में जाएगी। लेकिन वहां बिल्कुल उल्टा हुआ। मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के रुझान वैसे ही हैं, जैसा लोग सोच रहे थे। राजस्थान में पांच साल बाद सरकार बदल जाती है। ऐसा ट्रेंड कई सालों से देखा जा रहा है। जनता को जज्बाती बनाकर वोट लेने की नीति विधान सभा चुनाव में विफल साबित हुई। मतदाताओं ने रियल लाइफ इसू को तवज्जो दिया। ऐसा लगता है कि नोटबंदी एवं जीएसटी का असर जनता अब महसूस कर रही है। नौकरी एवं आय में कमी आया होगा। जनता ने उन चीजों को महत्व दिया, जिससे उनकी जिंदगी प्रभावित हो रही थी।
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- प्रो. असमर बेग, एएमयू राजनीति विज्ञान विभाग