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अलीगढ़ में किसान बोले, कर्ज माफी के नाम पर धोखा
Updated Sun, 18 Jun 2017 01:31 AM IST
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बोले किसान... कर्ज माफी के नाम पर धोखाधड़ी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एक तरफ सरकार ऋण वसूली न होने के चलते एनपीए वाले खाताधारकों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ फसली ऋण का ब्याज चुकाने वाले किसानों को ऋण माफी के लिए अपात्र ठहराया जा रहा है।
ऐसा लगता है कि वोट लेने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख तक का कर्जा माफ करने का सब्जबाग दिखाकर अपना उल्लू सीधा किया। यह कहना है किसानों का। वह सरकार से खफा हैं। आंदोलन की तैयारी में हैं।
ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त की कुराना शाखा द्वारा ग्राम में लगाए गए ऋण माफी को लेकर शिविर में मौजूद जिकरपुर के किसान मुनीम सिंह के यह शब्द ऋण माफी की हकीकत को बयां करने के लिए काफी हैं।
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उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी 18 बीघा जमीन पर खेती के लिए एक सितंबर 2014 को बैंक की कुराना शाखा से 2.90 लाख का फसली ऋण लिया था। सात अप्रैल 2015, फिर 28 अप्रैल 2016 तथा 26 सितंबर 2016 को लोन का ब्याज अदा किया।
गुरुवार को बैंक द्वारा लगाए गए कैंप में बैंक मैनेजर विनोद यादव एवं फील्ड अफसर से जब ऋण माफी के बारे में जानकारी की, तो उन्होंने टका सा जवाब दिया कि यदि आपने ब्याज चुकाया है तो आप ऋण माफी के दायरे में नहीं आते। यह कहां का इंसाफ है..? एक तो किसान कर्ज का ब्याज चुका रहा है और उसी को ही ऋण माफी के दायरे से बाहर किया जा रहा है। गांव के ज्यादातर किसानों की यही स्थिति है।
किसान नवाब सिंह, पप्पन, विजेंद्र, सत्यवती, राजवीर एवं तेजपाल भी इस नियम से क्षुब्ध दिखे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से धोखाधड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ किसान आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। जल्द ही सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा जाएगा।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
एक तरफ सरकार ऋण वसूली न होने के चलते एनपीए वाले खाताधारकों के खिलाफ अभियान चलाने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ फसली ऋण का ब्याज चुकाने वाले किसानों को ऋण माफी के लिए अपात्र ठहराया जा रहा है।
ऐसा लगता है कि वोट लेने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख तक का कर्जा माफ करने का सब्जबाग दिखाकर अपना उल्लू सीधा किया। यह कहना है किसानों का। वह सरकार से खफा हैं। आंदोलन की तैयारी में हैं।
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ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त की कुराना शाखा द्वारा ग्राम में लगाए गए ऋण माफी को लेकर शिविर में मौजूद जिकरपुर के किसान मुनीम सिंह के यह शब्द ऋण माफी की हकीकत को बयां करने के लिए काफी हैं।
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उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी 18 बीघा जमीन पर खेती के लिए एक सितंबर 2014 को बैंक की कुराना शाखा से 2.90 लाख का फसली ऋण लिया था। सात अप्रैल 2015, फिर 28 अप्रैल 2016 तथा 26 सितंबर 2016 को लोन का ब्याज अदा किया।
गुरुवार को बैंक द्वारा लगाए गए कैंप में बैंक मैनेजर विनोद यादव एवं फील्ड अफसर से जब ऋण माफी के बारे में जानकारी की, तो उन्होंने टका सा जवाब दिया कि यदि आपने ब्याज चुकाया है तो आप ऋण माफी के दायरे में नहीं आते। यह कहां का इंसाफ है..? एक तो किसान कर्ज का ब्याज चुका रहा है और उसी को ही ऋण माफी के दायरे से बाहर किया जा रहा है। गांव के ज्यादातर किसानों की यही स्थिति है।
किसान नवाब सिंह, पप्पन, विजेंद्र, सत्यवती, राजवीर एवं तेजपाल भी इस नियम से क्षुब्ध दिखे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों से धोखाधड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ किसान आंदोलन की रणनीति बना रहे हैं। जल्द ही सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा जाएगा।