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भूकंप के चौथे जोन में अलीगढ़ : प्रो. माहेश्वरी
Updated Sun, 23 Sep 2018 02:13 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
आईआईटी रुड़की के भूकंप इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. वीके माहेश्वरी ने कहा कि देश को भूकंप के मामले में पांच जोन में बांटा गया है। इसमें अलीगढ़ दूसरे सबसे ज्यादा हाई रिस्क चौथे जोन में है।
शनिवार को वह एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में हुई विश्वसनीयता व संरचनात्मक सुरक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल होने आए थे। प्रो. माहेश्वरी ने अमर उजाला को बताया कि यूं तो भूकंप को न तो रोका जा सकता है और न ही भूकंप के आने की भविष्यवाणी की जा सकती है। अलबत्ता, इससे होने वाले जान-माल में सुदृढ़ भवन संरचनाओं से कमी लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारा पूरा फोकस इमारत के ऊपरी हिस्से भूकंपरोधी डिजाइन पर होता है, लेकिन नींव की संरचना को नजरअंदाज कर देते हैं, जो मुनासिब नहीं है। नींव के मिट्टी में पानी मिलने से वह गीला हो जाता है, जो भूकंप के दौरान जमीनी सतह से इमारत हिलने लगती है। इसलिए फाउंडेशन के डिजाइन पर भी खास तवज्जो देना चाहिए।
प्रो. माहेश्वरी ने कहा कि रेक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.0 का पता ही नहीं चलता है। हालांकि, 5.0 से ऊपर की तीव्रता जान-माल की नुकसान की ओर बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ चौथे जोन में होने के चलते यहां के बिल्ंिडग डिजाइन पर ज्यादा नजर रखने की जरूरत है। बिल्ंिडग के ऊपर व सतह के हिस्से को भूकंपरोधी डिजाइन करानी चाहिए।
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आईआईटी रुड़की के भूकंप इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. वीके माहेश्वरी ने कहा कि देश को भूकंप के मामले में पांच जोन में बांटा गया है। इसमें अलीगढ़ दूसरे सबसे ज्यादा हाई रिस्क चौथे जोन में है।
शनिवार को वह एएमयू के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में हुई विश्वसनीयता व संरचनात्मक सुरक्षा पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल होने आए थे। प्रो. माहेश्वरी ने अमर उजाला को बताया कि यूं तो भूकंप को न तो रोका जा सकता है और न ही भूकंप के आने की भविष्यवाणी की जा सकती है। अलबत्ता, इससे होने वाले जान-माल में सुदृढ़ भवन संरचनाओं से कमी लायी जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारा पूरा फोकस इमारत के ऊपरी हिस्से भूकंपरोधी डिजाइन पर होता है, लेकिन नींव की संरचना को नजरअंदाज कर देते हैं, जो मुनासिब नहीं है। नींव के मिट्टी में पानी मिलने से वह गीला हो जाता है, जो भूकंप के दौरान जमीनी सतह से इमारत हिलने लगती है। इसलिए फाउंडेशन के डिजाइन पर भी खास तवज्जो देना चाहिए।
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प्रो. माहेश्वरी ने कहा कि रेक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.0 का पता ही नहीं चलता है। हालांकि, 5.0 से ऊपर की तीव्रता जान-माल की नुकसान की ओर बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ चौथे जोन में होने के चलते यहां के बिल्ंिडग डिजाइन पर ज्यादा नजर रखने की जरूरत है। बिल्ंिडग के ऊपर व सतह के हिस्से को भूकंपरोधी डिजाइन करानी चाहिए।
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