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हर सवाल का एक जवाब, ‘उच्च स्तर तक पहुंचा देंगे बात’
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:35 AM IST
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हर सवाल का एक जवाब, ‘उच्च स्तर तक पहुंचा देंगे बात’
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
दो दिवसीय दौरे पर आए प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सुधीर गर्ग जीएसटी पर व्यापारियों के सवालों की बौछार पर निरुत्तर नजर आए। उन्होंने एक ही जवाब दिया कि आपकी समस्या जायज लग रही है, हम इसे उच्चस्तर तक पहुंचा देंगे। वही से समाधान होगा। इससे व्यापारी स्वयं को ठगा सा महसूस करते नजर आए।
सोमवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई बैठक में उठाए गए प्रमुख सवाल
सवाल : एक से पांच तारीख के बीच जीएसटीआर वन दाखिल करना होता है। मैंने अपने सीए को 30 अगस्त को ही सारा डिटेल दे दिया था। उसने एक तारीख को कागजात दाखिल भी कर दिए, लेकिन मुझे एक से लेकर नौ तारीख तक हर रोज दो घंटे वाणिज्यकर एडवोकेट के यहां डिटेल समझाने में देने पड़े। हर माह ऐसा करना है। इस बीच हमें माल भी लाना है, दुकान भी खोलनी है और आवश्यक काम भी करने हैं। कैसे करें?
जवाब : नई व्यवस्था है। समझने में थोड़ा समय तो लगेगा ही। धीरे-धीरे सबकुछ सामान्य हो जाएगा।
सवाल : आईटीसी में एक्सपोर्टर टैक्स क्यों लगाया जा रहा है। जबकि उनका टैक्स पूरा रिटर्न होना है। आईडी नंबर देगा और जीएसटी नंबर देगा तो उसे बार-बार टैक्स के झंझट में फंसाने की क्या तुक है?
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जवाब : हम आपकी समस्या उच्चस्तर तक पहुंचा देंगे।
सवाल : रिवर्स चार्ज के मामले में एक ही दिन पास हुए दो क्लाज पहेली बने हुए हैं। पहले क्लाज में व्यापारी ने यदि 750 रुपये से ज्यादा की सर्विस ली है तो उसे पांच प्रतिशत रिवर्स चार्ज देना होगा। वही दूसरे क्लाज के अनुसार व्यापारी को पांच हजार तक की सर्विस पर रिवर्स चार्ज नहीं देना है। उससे ऊपर चार्ज लगेगा। कौन सा प्रावधान मानें। जब बिल की एंट्री हो रही है और अगले महीने आईटीसी में उसे वापस ही करना है तो टैक्स लगाने का क्या तुक है?
जवाब : समस्या को उच्चस्तर तक पहुंचा दिया जाएगा। वहीं से समाधान हो सकेगा।
सवाल : जीएसटी से पहले हम देश भर में दो फीसदी पर माल बेचने ले जाते थे। जो दो प्रतिशत टैक्स होता था, कभी-कभी पेमेंट में देरी पर उसे अपने पास से जमा कर देते थे। लेकिन अब 18 से 28 फीसदी टैक्स है और समय भी पूरे महीने का नहीं मिल पा रहा है। यह लिमिट 60 दिन की होनी चाहिए।
जवाब : इस समस्या को भी उच्चस्तर तक पहुंचा दिया जाएगा।
सवाल : हार्डवेयर आइटमों पर 28 प्रतिशत टैक्स है। लोहे के आइटम चूंकि ज्यादातर गरीबों के लिए उपयोगी हैं अत: उन पर पांच फीसदी, जस्ते पर 12 फीसदी एवं पीतल पर 18 फीसदी टैक्स लगाया जाए।
जवाब : आपका सुझाव केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
दो दिवसीय दौरे पर आए प्रमुख सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण सुधीर गर्ग जीएसटी पर व्यापारियों के सवालों की बौछार पर निरुत्तर नजर आए। उन्होंने एक ही जवाब दिया कि आपकी समस्या जायज लग रही है, हम इसे उच्चस्तर तक पहुंचा देंगे। वही से समाधान होगा। इससे व्यापारी स्वयं को ठगा सा महसूस करते नजर आए।
सोमवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई बैठक में उठाए गए प्रमुख सवाल
सवाल : एक से पांच तारीख के बीच जीएसटीआर वन दाखिल करना होता है। मैंने अपने सीए को 30 अगस्त को ही सारा डिटेल दे दिया था। उसने एक तारीख को कागजात दाखिल भी कर दिए, लेकिन मुझे एक से लेकर नौ तारीख तक हर रोज दो घंटे वाणिज्यकर एडवोकेट के यहां डिटेल समझाने में देने पड़े। हर माह ऐसा करना है। इस बीच हमें माल भी लाना है, दुकान भी खोलनी है और आवश्यक काम भी करने हैं। कैसे करें?
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जवाब : नई व्यवस्था है। समझने में थोड़ा समय तो लगेगा ही। धीरे-धीरे सबकुछ सामान्य हो जाएगा।
सवाल : आईटीसी में एक्सपोर्टर टैक्स क्यों लगाया जा रहा है। जबकि उनका टैक्स पूरा रिटर्न होना है। आईडी नंबर देगा और जीएसटी नंबर देगा तो उसे बार-बार टैक्स के झंझट में फंसाने की क्या तुक है?
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जवाब : हम आपकी समस्या उच्चस्तर तक पहुंचा देंगे।
सवाल : रिवर्स चार्ज के मामले में एक ही दिन पास हुए दो क्लाज पहेली बने हुए हैं। पहले क्लाज में व्यापारी ने यदि 750 रुपये से ज्यादा की सर्विस ली है तो उसे पांच प्रतिशत रिवर्स चार्ज देना होगा। वही दूसरे क्लाज के अनुसार व्यापारी को पांच हजार तक की सर्विस पर रिवर्स चार्ज नहीं देना है। उससे ऊपर चार्ज लगेगा। कौन सा प्रावधान मानें। जब बिल की एंट्री हो रही है और अगले महीने आईटीसी में उसे वापस ही करना है तो टैक्स लगाने का क्या तुक है?
जवाब : समस्या को उच्चस्तर तक पहुंचा दिया जाएगा। वहीं से समाधान हो सकेगा।
सवाल : जीएसटी से पहले हम देश भर में दो फीसदी पर माल बेचने ले जाते थे। जो दो प्रतिशत टैक्स होता था, कभी-कभी पेमेंट में देरी पर उसे अपने पास से जमा कर देते थे। लेकिन अब 18 से 28 फीसदी टैक्स है और समय भी पूरे महीने का नहीं मिल पा रहा है। यह लिमिट 60 दिन की होनी चाहिए।
जवाब : इस समस्या को भी उच्चस्तर तक पहुंचा दिया जाएगा।
सवाल : हार्डवेयर आइटमों पर 28 प्रतिशत टैक्स है। लोहे के आइटम चूंकि ज्यादातर गरीबों के लिए उपयोगी हैं अत: उन पर पांच फीसदी, जस्ते पर 12 फीसदी एवं पीतल पर 18 फीसदी टैक्स लगाया जाए।
जवाब : आपका सुझाव केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा।