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अलीगढ़ में मुआवजे के लिए दर्ज कराता दुष्कर्म, छेड़खानी
Updated Fri, 14 Jul 2017 02:06 AM IST
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ये तो मुआवजे के लिए दर्ज कराता दुष्कर्म और छेड़खानी
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
दलित उत्पीड़न के मुकदमे दर्ज कराकर मुआवजा लेने तक कार्रवाई के लिए लड़ने वाले इगलास हस्तपुर के विष्णु ने आखिरकार डीएम-एसएसपी को एससीएसटी आयोग के समक्ष पेश करा ही दिया। हालांकि डीएम-एसएसपी ने उसकी पैरोकारी से अब तक दर्ज मुकदमों की पूरी फेहरिस्त आयोग के समक्ष पेश करते हुए हकीकत बता दी कि यह कितना मुआवजा ले चुका है।
ताजा प्रकरण भी उसके परिवार की महिला की ओर से ही दर्ज कराया गया है, जिसके पीछे दो मंशा बताई। पहली मुआवजा लेना और दूसरी अपने विरोधियों पर कार्रवाई कराकर उन पर समझौते का दबाव बनाना। आयोग ने अधिकारियों के यह साक्ष्य देख विष्णु पर कार्रवाई के लिए कहा है।
एससीएसटी आयोग के चेयरमैन ने डीएम ऋषिकेष भाष्कर याशोद, एसएसपी राजेश पांडेय बुधवार को दिल्ली स्थित आयोग कार्यालय में तलब किए थे। मसला था इगलास के सलेमपुर की एक महिला की ओर से दर्ज दुष्कर्म व छेड़खानी के वर्ष 2016 के मुकदमे में आज तक आरोपियों पर कार्रवाई न होने का।
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इस पर दोनों अधिकारियों ने बताया कि यह महिला इगलास के ही सलेमपुर के पास के गांव हस्तपुर निवासी विष्णु के परिवार से ताल्लुक रखती है। विष्णु दलित उत्पीड़न के मुकदमे दर्ज कराकर उनका अनुचित लाभ लेने का आदी है। यह मुकदमा भी विष्णु ने इसी पेशबंदी में दर्ज कराया है। पहले विष्णु पर उसके विरोधी ने मुकदमा दर्ज कराया था। फिर विष्णु ने इस महिला को आगे कर अपने विरोधियों पर दलित उत्पीड़न व दुष्कर्म आदि दर्ज कराए हैं। यहां आयोग को विष्णु व उसके परिवार द्वारा अब तक दर्ज कराए गए मुकदमे, उनके ऐवज में वसूले गए मुआवजे आदि की फेहरिस्त भी पेश की।
-विष्णु इस तरह के मुकदमे दर्ज कराकर मुआवजा वसूलने का आदि है। इसी तरह की पेशबंदी में उसने अपने परिवार से जुड़ी महिला को आगे कर यह मुकदमा दर्ज कराया था। आयोग को हकीकत बता दी गई है। आयोग ने भी तथ्य यह देख हैरानी जताई और कहा कि यह शासन को बदनाम करने का प्रयास है। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।-राजेश पांडेय एसएसपी
पहले भी भेजा था आयोग को ब्योरा
इससे पहले एक अन्य मामले में विष्णु की पत्नी की ओर से आयोग को शिकायत भेजी गई थी। उस समय भी एसएसपी से जवाब तलब हुआ था। उस समय भी एसएसपी ने पूरा ब्योरा जनवरी में आयोग को भेजा था।
अब तक मुआवजे में वसूले 3 लाख 61 सौ रुपये
1-वर्ष 2010 में विष्णु की तरफ से दर्ज कराए लूट के मुकदमे में 6200-6200 के रुपये के दो मुआवजे मिले।
2-वर्ष 2012 में विष्णु की मां चंद्रवती की ओर से लिखवाये गये मुकदमे के मुआवजे में 6200 रुपये मिले हैं।
3-वर्र्ष 2013 में विष्णु ने मुकदमा लिखवाया, जिसमें 1 लाख 52 हजार 500 रुपये मुआवजे के रूप में मिले।
4-वर्ष 2013 में विष्णु की मां चंद्रवती द्वारा दर्ज मुकदमे में 15-15 हजार रुपये मुआवजा दोे सदस्यों को मिला।
5-वर्ष 2014 में विष्णु के पिता चंद्रपाल ने मुकदमा लिखवाया, जिसमें दो लोगों को 15-15 हजार रुपये मिले।
6-वर्ष 2015 में विष्णु ने एक और मुकदमा लिखवाया जिसमें 30 हजार रुपये का भी मुआवजा मिला है।
7-वर्ष 2015 में विष्णु की बहन हस्ती देवी ने यह मुकदमा लिखवाया तो 15 हजार रुपये का मुआवजा मिला।
8-वर्ष 2015 में विष्णु की बहन ने फिर मुकदमा लिखवाया, जिसमें 15-15 हजार रुपये के दो मुआवजे मिले।
9-वर्ष 2016 में विष्णु की पत्नी रूबी ने एक मुकदमा और लिखवाया, जिसे दौरान जांच खारिज कर दिया गया।
10-वर्ष 2016 में विष्णु की पत्नी रूबी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर एक अन्य मुकदमा अभी तक लंबित पड़ा है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
दलित उत्पीड़न के मुकदमे दर्ज कराकर मुआवजा लेने तक कार्रवाई के लिए लड़ने वाले इगलास हस्तपुर के विष्णु ने आखिरकार डीएम-एसएसपी को एससीएसटी आयोग के समक्ष पेश करा ही दिया। हालांकि डीएम-एसएसपी ने उसकी पैरोकारी से अब तक दर्ज मुकदमों की पूरी फेहरिस्त आयोग के समक्ष पेश करते हुए हकीकत बता दी कि यह कितना मुआवजा ले चुका है।
ताजा प्रकरण भी उसके परिवार की महिला की ओर से ही दर्ज कराया गया है, जिसके पीछे दो मंशा बताई। पहली मुआवजा लेना और दूसरी अपने विरोधियों पर कार्रवाई कराकर उन पर समझौते का दबाव बनाना। आयोग ने अधिकारियों के यह साक्ष्य देख विष्णु पर कार्रवाई के लिए कहा है।
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एससीएसटी आयोग के चेयरमैन ने डीएम ऋषिकेष भाष्कर याशोद, एसएसपी राजेश पांडेय बुधवार को दिल्ली स्थित आयोग कार्यालय में तलब किए थे। मसला था इगलास के सलेमपुर की एक महिला की ओर से दर्ज दुष्कर्म व छेड़खानी के वर्ष 2016 के मुकदमे में आज तक आरोपियों पर कार्रवाई न होने का।
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इस पर दोनों अधिकारियों ने बताया कि यह महिला इगलास के ही सलेमपुर के पास के गांव हस्तपुर निवासी विष्णु के परिवार से ताल्लुक रखती है। विष्णु दलित उत्पीड़न के मुकदमे दर्ज कराकर उनका अनुचित लाभ लेने का आदी है। यह मुकदमा भी विष्णु ने इसी पेशबंदी में दर्ज कराया है। पहले विष्णु पर उसके विरोधी ने मुकदमा दर्ज कराया था। फिर विष्णु ने इस महिला को आगे कर अपने विरोधियों पर दलित उत्पीड़न व दुष्कर्म आदि दर्ज कराए हैं। यहां आयोग को विष्णु व उसके परिवार द्वारा अब तक दर्ज कराए गए मुकदमे, उनके ऐवज में वसूले गए मुआवजे आदि की फेहरिस्त भी पेश की।
-विष्णु इस तरह के मुकदमे दर्ज कराकर मुआवजा वसूलने का आदि है। इसी तरह की पेशबंदी में उसने अपने परिवार से जुड़ी महिला को आगे कर यह मुकदमा दर्ज कराया था। आयोग को हकीकत बता दी गई है। आयोग ने भी तथ्य यह देख हैरानी जताई और कहा कि यह शासन को बदनाम करने का प्रयास है। ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।-राजेश पांडेय एसएसपी
पहले भी भेजा था आयोग को ब्योरा
इससे पहले एक अन्य मामले में विष्णु की पत्नी की ओर से आयोग को शिकायत भेजी गई थी। उस समय भी एसएसपी से जवाब तलब हुआ था। उस समय भी एसएसपी ने पूरा ब्योरा जनवरी में आयोग को भेजा था।
अब तक मुआवजे में वसूले 3 लाख 61 सौ रुपये
1-वर्ष 2010 में विष्णु की तरफ से दर्ज कराए लूट के मुकदमे में 6200-6200 के रुपये के दो मुआवजे मिले।
2-वर्ष 2012 में विष्णु की मां चंद्रवती की ओर से लिखवाये गये मुकदमे के मुआवजे में 6200 रुपये मिले हैं।
3-वर्र्ष 2013 में विष्णु ने मुकदमा लिखवाया, जिसमें 1 लाख 52 हजार 500 रुपये मुआवजे के रूप में मिले।
4-वर्ष 2013 में विष्णु की मां चंद्रवती द्वारा दर्ज मुकदमे में 15-15 हजार रुपये मुआवजा दोे सदस्यों को मिला।
5-वर्ष 2014 में विष्णु के पिता चंद्रपाल ने मुकदमा लिखवाया, जिसमें दो लोगों को 15-15 हजार रुपये मिले।
6-वर्ष 2015 में विष्णु ने एक और मुकदमा लिखवाया जिसमें 30 हजार रुपये का भी मुआवजा मिला है।
7-वर्ष 2015 में विष्णु की बहन हस्ती देवी ने यह मुकदमा लिखवाया तो 15 हजार रुपये का मुआवजा मिला।
8-वर्ष 2015 में विष्णु की बहन ने फिर मुकदमा लिखवाया, जिसमें 15-15 हजार रुपये के दो मुआवजे मिले।
9-वर्ष 2016 में विष्णु की पत्नी रूबी ने एक मुकदमा और लिखवाया, जिसे दौरान जांच खारिज कर दिया गया।
10-वर्ष 2016 में विष्णु की पत्नी रूबी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र पर एक अन्य मुकदमा अभी तक लंबित पड़ा है।