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अलीगढ़ से प्राचार्य की नियुक्ति में एपीआई की बाध्यता हटाने की मांग
Updated Thu, 29 Jun 2017 02:47 AM IST
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प्राचार्यों की नियुक्ति में एपीआई की बाध्यता हटाए
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
आगरा विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के सदस्य डॉ. एमपी सिंह ने अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति में शैक्षिक प्रदर्शन सूचक (एपीआई) एवं प्रतियोगी परीक्षा की बाध्यता को निरस्त करने की मांग मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से की है।
डॉ. एमपी सिंह का कहना है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग इलाहाबाद द्वारा अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए 284 पदों के लिए विज्ञापन संख्या 48 निर्गत हुआ है।
प्राचार्य पद पर नियुक्ति के लिए शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षा पास करनी होगी। साथ ही शैक्षिक प्रदर्शन सूचक (एपीआई) की बाध्यता है। जबकि इसके विपरीत राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति विभागीय पदोन्नति समिति अर्थात डीपीसी के माध्यम से होती है।
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यहां पर इस बार 15 वर्षों का शिक्षण अनुभव भी आवश्यक किया गया है जबकि यह 10 वर्ष का होना चाहिए। डॉ. सिंह का कहना है कि दोहरे मापदंड अपनाकर शिक्षकों को अपमानित किया जा रहा है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
आगरा विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के सदस्य डॉ. एमपी सिंह ने अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति में शैक्षिक प्रदर्शन सूचक (एपीआई) एवं प्रतियोगी परीक्षा की बाध्यता को निरस्त करने की मांग मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से की है।
डॉ. एमपी सिंह का कहना है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग इलाहाबाद द्वारा अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति के लिए 284 पदों के लिए विज्ञापन संख्या 48 निर्गत हुआ है।
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प्राचार्य पद पर नियुक्ति के लिए शिक्षकों को प्रतियोगी परीक्षा पास करनी होगी। साथ ही शैक्षिक प्रदर्शन सूचक (एपीआई) की बाध्यता है। जबकि इसके विपरीत राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों की नियुक्ति विभागीय पदोन्नति समिति अर्थात डीपीसी के माध्यम से होती है।
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यहां पर इस बार 15 वर्षों का शिक्षण अनुभव भी आवश्यक किया गया है जबकि यह 10 वर्ष का होना चाहिए। डॉ. सिंह का कहना है कि दोहरे मापदंड अपनाकर शिक्षकों को अपमानित किया जा रहा है।