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Agra News: चंबल में मगरमच्छों के कुनबे के बीच बेखौफ नहा रहे युवा

Thu, 21 May 2026 02:53 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Thu, 21 May 2026 02:53 AM IST
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Youths bathing fearlessly amidst a family of crocodiles in the Chambal.
चंबल नदी में बेखौफ होकर स्नान कर रहे लोग, जलीय जीवों और डूबने से जान का खतरा - फोटो : samvad
पिनाहट। बीते दिनों आगरा के कमला नगर क्षेत्र में यमुना नदी घाट पर नहाने गए युवक-युवतियों के डूबने की दर्दनाक घटना से प्रशासनिक अमले में अफरातफरी मच गई थी। रेस्क्यू ऑपरेशन से कुछ जिंदगियां तो बचा ली गईं, लेकिन कुछ युवाओं को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इस घटना के बाद उच्चाधिकारियों ने नदी घाटों पर स्नान न करने के निर्देश दिए थे। चंबल के घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए। पुलिस प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों को जागरूक किया। प्रशासन ने साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि कोई भी गहरे पानी में न उतरे, लेकिन पिनाहट चंबल घाट पर प्रशासन की चेतावनी बेअसर नजर आ रही है।
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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित पिनाहट के चंबल नदी घाट पर युवा लगातार गहरे पानी में कूदकर नहाते हुए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि घाटों पर युवाओं को रोकने के लिए प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा मौके पर तैनात नहीं है। नियमों के मुताबिक, इन संवेदनशील घाटों पर वन विभाग और स्थानीय पुलिस के कर्मचारियों की मुस्तैदी होनी चाहिए, जो युवाओं को गहरे पानी में जाने से रोक सकें, लेकिन यहां पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है।
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और आक्रामक हो चुके हैं मगरमच्छ

चंबल नदी राष्ट्रीय घड़ियाल अभयारण्य (सेंचुरी) का हिस्सा है। यह मगरमच्छों, घड़ियालों व दुर्लभ कछुओं के लिए संरक्षित क्षेत्र है। भीषण गर्मी के इस मौसम में यहां जलीय जीवों की नेस्टिंग और हैचिंग (अंडे देने और बच्चे निकलने का समय) की प्रक्रिया चल रही है। मादा मगरमच्छ और घड़ियाल अपने अंडों की सुरक्षा के लिए चंबल के रेतीले किनारों पर डेरा जमाए बैठी हैं। इस दौरान ये जलीय जीव बेहद आक्रामक हो जाते हैं और इंसानों पर हमला करने से नहीं चूकते। ऐसे में नदी में नहाने पहुंच रहे युवा सीधे तौर पर इन आक्रामक जीवों का शिकार बन सकते हैं।
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हादसों से नहीं सीखा सबक, अजयराज ने बचाई थी पिता की जान



उच्चाधिकारियों के सख्त आदेश के बावजूद पिनाहट चंबल घाट पर उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश, किसी भी सीमा की तरफ चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। चंबल सेंचुरी वन विभाग को यहां तुरंत ऐसे बोर्ड लगाने चाहिए, जिन पर साफ लिखा हो कि आगे जलीय जीव आक्रामक हैं, यहां नहाना जानलेवा हो सकता है। बता दें कि पिछले वर्ष मध्य प्रदेश की सीमा वाले घाट पर अंत्येष्टि में शामिल होने आए एक युवक को मगरमच्छ खींच ले गया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इसके अलावा एक महिला पर भी मगरमच्छ ने जानलेवा हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। हाल में झरनापुरा में एक मगरमच्छ ने बुजुर्ग पर हमला किया था, जहां उनके बेटे अजय राज ने सूझबूझ से अपने पिता की जान बचाई। अजय राज की इस बहादुरी के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। इन तमाम बड़े हादसों के बावजूद प्रशासन की ढील और युवाओं की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
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