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आगरा में 480.6 फीट पर पहुंचा यमुना का जलस्तर, आधे शहर पर मंडराया जल संकट
Fri, 22 Nov 2019 12:31 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 22 Nov 2019 12:31 AM IST
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यमुना नदी में गिर रहा गंगाजल (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा के जीवनी मंडी वाटर वर्क्स पर यमुना नदी में पानी न्यूनतम स्तर पर आ गया है। ओखला और गोकुल बैराज से पानी कम छोड़ने के कारण यमुना नदी में जीवनी मंडी पर जलस्तर 480.6 फीट पर है, जबकि 480 फीट पर पंपिंग करने में दिक्कत आने लगेगी। सप्लाई पर संकट देखते हुए जलकल विभाग ने सिंचाई विभाग से ओखला और गोकुल बैराज से पानी छोड़ने की मांग की है।
जीवनी मंडी जल संस्थान से पुराने शहर को 135 एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन यमुना नदी में पानी की कमी के कारण सप्लाई पर संकट खड़ा हो सकता है। जीवनी मंडी वाटरवर्क्स पर पानी के शोधन में भारी मात्रा में केमिकल मिलाने पड़ रहे हैं।
प्रदूषण बढ़ने के कारण पानी का रंग भी पीला चल रहा है। क्लोरीन की मात्रा ज्यादा होने के कारण घरों तक गंध पहुंच रही है। मई और जून के बाद जलकल के सामने अब कच्चे पानी की कमी सामने आई है। वैकल्पिक इंतजाम के लिए जलकल ने यमुना नदी में ड्रेजिंग की तैयारी कर ली है।
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जीवनी मंडी जल संस्थान से पुराने शहर को 135 एमएलडी पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन यमुना नदी में पानी की कमी के कारण सप्लाई पर संकट खड़ा हो सकता है। जीवनी मंडी वाटरवर्क्स पर पानी के शोधन में भारी मात्रा में केमिकल मिलाने पड़ रहे हैं।
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प्रदूषण बढ़ने के कारण पानी का रंग भी पीला चल रहा है। क्लोरीन की मात्रा ज्यादा होने के कारण घरों तक गंध पहुंच रही है। मई और जून के बाद जलकल के सामने अब कच्चे पानी की कमी सामने आई है। वैकल्पिक इंतजाम के लिए जलकल ने यमुना नदी में ड्रेजिंग की तैयारी कर ली है।
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38 पीपीएम क्लोरीन, 85 पीपीएम एलम से शोधन
यमुना नदी में जलस्तर कम होने के कारण प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ रही है। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स के पंप से लिए जा रहे कच्चे पानी के शोधन में 38 पीपीएम क्लोरीन और 85 पीपीएम एलम मिलानी पड़ रही है। आधा घंटे की जगह क्लोरीन के लिए ढाई घंटे का समय लिया जा रहा है, ताकि पानी साफ हो सके।
अगर यमुना में जलस्तर और कम हुआ तो पानी में क्लोरीन और एलम की मात्रा शोधन के लिए और ज्यादा मिलानी पड़ेगी। जलकल 25 जगहों पर पानी की चेकिंग कर रहा है, जिसमें क्लोरीन की मात्रा हर दिन जांची जा रही है।
यमुना नदी में ड्रेजर से बनाना होगा चैनल
जीवनी मंडी जल संस्थान के पंप तक पानी पहुंचाने के लिए यमुना नदी में चैनल बना हुआ है, लेकिन जलस्तर 480 फीट पर पहुंचने के बाद यहां चैनल में पानी आना बंद हो जाएगा। इसके बाद जलकल विभाग को चीनी का रोजा के सामने से चैनल की ड्रेजिंग करनी होगी।
रेत निकालकर इस चैनल को एक से डेढ़ फुट तक गहरा करना होगा, तब नदी का पानी पंप तक पहुंच पाएगा। इसमें प्रदूषण की मात्रा न केवल बढ़ेगी, बल्कि एल्गी समेत सिल्ट भी ज्यादा पहुंचने लगेगी।
अगर यमुना में जलस्तर और कम हुआ तो पानी में क्लोरीन और एलम की मात्रा शोधन के लिए और ज्यादा मिलानी पड़ेगी। जलकल 25 जगहों पर पानी की चेकिंग कर रहा है, जिसमें क्लोरीन की मात्रा हर दिन जांची जा रही है।
यमुना नदी में ड्रेजर से बनाना होगा चैनल
जीवनी मंडी जल संस्थान के पंप तक पानी पहुंचाने के लिए यमुना नदी में चैनल बना हुआ है, लेकिन जलस्तर 480 फीट पर पहुंचने के बाद यहां चैनल में पानी आना बंद हो जाएगा। इसके बाद जलकल विभाग को चीनी का रोजा के सामने से चैनल की ड्रेजिंग करनी होगी।
रेत निकालकर इस चैनल को एक से डेढ़ फुट तक गहरा करना होगा, तब नदी का पानी पंप तक पहुंच पाएगा। इसमें प्रदूषण की मात्रा न केवल बढ़ेगी, बल्कि एल्गी समेत सिल्ट भी ज्यादा पहुंचने लगेगी।
सिकंदरा पर गंगाजल मिल रहा कम
सिकंदरा स्थित 144 एमएलडी के एमबीबीआर प्लांट को गंगाजल की मात्रा कम मिल रही है। पालड़ा फाल से मथुरा और सिकंदरा स्थित वाटरवर्क्स तक पानी की पाइप लाइन आ रही है। सिकंदरा से एक लाइन जीवनी मंडी के लिए निकली है।
सिकंदरा पर गंगाजल की मात्रा का कम उपयोग होने पर इसे कैलाश मंदिर के पास यमुना नदी में डाला जा रहा था, जिससे प्रदूषण में कमी हो रही थी, लेकिन अब गंगाजल की मात्रा कम होने के कारण अब आधा पानी यमुना का मिलाकर सिकंदरा में आपूर्ति की जा रही है।
जलकल विभाग के महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि यमुना जल न्यूनतम स्तर पर है, इससे पंपिंग पूरी क्षमता से नहीं हो पा रही है और निचले स्तर के कारण प्रदूषण की मात्रा भी ज्यादा है, जिससे शोधन में ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं। सिंचाई विभाग से हमने यमुना नदी में पानी मांगा है।
सिकंदरा पर गंगाजल की मात्रा का कम उपयोग होने पर इसे कैलाश मंदिर के पास यमुना नदी में डाला जा रहा था, जिससे प्रदूषण में कमी हो रही थी, लेकिन अब गंगाजल की मात्रा कम होने के कारण अब आधा पानी यमुना का मिलाकर सिकंदरा में आपूर्ति की जा रही है।
जलकल विभाग के महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि यमुना जल न्यूनतम स्तर पर है, इससे पंपिंग पूरी क्षमता से नहीं हो पा रही है और निचले स्तर के कारण प्रदूषण की मात्रा भी ज्यादा है, जिससे शोधन में ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं। सिंचाई विभाग से हमने यमुना नदी में पानी मांगा है।
ग्रीन गैस कंपनी को जलकल ने दी चेतावनी
शहर में चल रहे जल संकट के बीच हलवाई की बगीची में गैस पाइप लाइन डालने के लिए ग्रीन गैस कंपनी द्वारा की गई खोदाई में मंदिर के सामने पानी की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई।
इस पर जलकल महाप्रबंधक आरएस यादव ने ग्रीन गैस लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर को चेतावनी दी है कि अब जहां भी पाइप लाइन बिछाने का काम किया जाए, जलकल विभाग के उस क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर से संपर्क कर लिया जाए और उन्हीं की मौजूदगी में खोदाई कराई जाए।
इस पर जलकल महाप्रबंधक आरएस यादव ने ग्रीन गैस लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर को चेतावनी दी है कि अब जहां भी पाइप लाइन बिछाने का काम किया जाए, जलकल विभाग के उस क्षेत्र के जूनियर इंजीनियर से संपर्क कर लिया जाए और उन्हीं की मौजूदगी में खोदाई कराई जाए।