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कैलाश से ताज तक आते आते दम तोड़ रही यमुना
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 06 Jan 2016 02:24 AM IST
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यमुना को बदहाल करने में दिल्ली-हरियाणा के साथ अपने शहर के लोग भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कैलाश घाट से शहर में प्रवेश करने के बाद कालिंदी ताजमहल तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती है। कैलाश घाट की अपेक्षा ताज के पास यमुना का रहा-बचा पानी ज्यादा दूषित है। यह जलीय जंतुओं के लिए भी अच्छे संकेत नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कैलाश घाट पर यमुना के पानी में 10 नवंबर, 2015 को बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) 12.5 मिग्रा/लीटर पाई गई। इसी दिन ताज के आसपास बीओडी 26 मिग्रा/लीटर थी। यह 10 मिग्रा/लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कैलाश घाट पर आक्सीजन डिमांड (डीओ) 6.7 मिग्रा/लीटर व ताज पर 4.5 मिग्रा/लीटर थी। बता दें डीओ 4 मिग्रा/लीटर से कम हो तो जलीय जीवजंतुओं का जीवन खतरे में पड़ जाता है। वर्तमान में नदी के जो हालात हैं, तो इसके पानी में डीओ कभी भी मानक से नीचे पहुंच सकता है। 26 दिसंबर, 2015 को कैलाश घाट पर बीओडी 10.5 मिग्रा/लीटर व ताज पर 28 मिग्रा/लीटर पाई गई। यहां भी मानक से लगभग तीन गुना बीओडी है। इधर, कैलाश पर डीओ 8 मिग्रा/लीटर व ताज पर 5.9 मिग्रा/लीटर निकला। इन आंकड़ों से साफ है कि नदी का पानी दिन प्रतिदिन दूषित होता जा रहा है।
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यही पानी हो रहा सप्लाई
शहर में जल संस्थान इसी पानी को शोधन के बाद सप्लाई कर रहा है। जो पानी जलीय जीवजंतुओं के लिए हानिकारक होता जा रहा है, उसे शोधन के बाद लोगों को सप्लाई किया जा रहा है। यह पानी इतना दूषित है कि जल संस्थान को किसी-किसी दिन इसके शोधन में मानक से अधिक केमिकल प्रयोग करने पड़ रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कैलाश घाट पर यमुना के पानी में 10 नवंबर, 2015 को बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) 12.5 मिग्रा/लीटर पाई गई। इसी दिन ताज के आसपास बीओडी 26 मिग्रा/लीटर थी। यह 10 मिग्रा/लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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कैलाश घाट पर आक्सीजन डिमांड (डीओ) 6.7 मिग्रा/लीटर व ताज पर 4.5 मिग्रा/लीटर थी। बता दें डीओ 4 मिग्रा/लीटर से कम हो तो जलीय जीवजंतुओं का जीवन खतरे में पड़ जाता है। वर्तमान में नदी के जो हालात हैं, तो इसके पानी में डीओ कभी भी मानक से नीचे पहुंच सकता है। 26 दिसंबर, 2015 को कैलाश घाट पर बीओडी 10.5 मिग्रा/लीटर व ताज पर 28 मिग्रा/लीटर पाई गई। यहां भी मानक से लगभग तीन गुना बीओडी है। इधर, कैलाश पर डीओ 8 मिग्रा/लीटर व ताज पर 5.9 मिग्रा/लीटर निकला। इन आंकड़ों से साफ है कि नदी का पानी दिन प्रतिदिन दूषित होता जा रहा है।
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यही पानी हो रहा सप्लाई
शहर में जल संस्थान इसी पानी को शोधन के बाद सप्लाई कर रहा है। जो पानी जलीय जीवजंतुओं के लिए हानिकारक होता जा रहा है, उसे शोधन के बाद लोगों को सप्लाई किया जा रहा है। यह पानी इतना दूषित है कि जल संस्थान को किसी-किसी दिन इसके शोधन में मानक से अधिक केमिकल प्रयोग करने पड़ रहे हैं।