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26 नाले यमुना में घोल रहे जहर, बंद किया सिर्फ एक
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sat, 05 Sep 2015 02:24 AM IST
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सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली देखिए। यमुना में सीधे गिर रहे सिर्फ उसी नाले को बंद किया, जिसकी याचिकाकर्ता ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में शिकायत की थी। बाकी उन 25 नालों की तरफ देखा भी नहीं, जिनको तीन महीने पहले खुद यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने चिह्नित किया था। ये लगातार यमुना नदी में जहर घोल रहे हैं।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक गत 26 मई को हुई थी। इसमें यमुना में गिरती गंदगी रोकने पर भी मंथन हुआ। यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक पीके अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक खालिद अहमद व एमके बंसल ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में कहा था कि आगरा में 50 में से 24 नाले टेप किए गए हैं। इन नालों का बहाव सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को शोधन के लिए जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी माना गया था कि 26 नाले टेप नहीं और सीधे यमुना में गिर रहे हैं।
इधर, पर्यावरणविद डीके जोशी ने हाल ही में यमुना को मूलस्वरूप में लाने संबंधी जनहित याचिका एनजीटी में दायर की थी। इसमें उन्होंने यमुना के लिए संकट बने नालों पर भी सवाल खड़े किए थे। बतौर साक्ष्य दयालबाग स्थित राजश्री एस्टेट के पास के सीधे यमुना में गिरते नाले की तस्वीर पेश की थी। 27 अगस्त को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इस नाले को बंद करने के आदेश दिए। जल निगम ने इसे तो बंद करा दिया लेकिन न तो एनजीटी को अन्य नालों की जानकारी दी और न ही इन्हें टेप किया।
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इनसेट
‘अनाथ’ नाले को एडीए ने उखाड़ फेंका
सरकारी कार्यप्रणाली का एक नमूना और। जल निगम द्वारा ट्रिब्यूनल के आदेश पर आनन-फानन में दयालबाग क्षेत्र के नाले को रात में ही बंद तो कर दिया, लेकिन न तो क्षेत्रीय लोगों का ध्यान रखा गया और न ही सरकारी धन की बर्बादी का। शुक्रवार को एडीए ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए, नाले के पाइप ही उखाड़ फेंके। मगर यह कोई बताने को तैयार नहीं है कि जब नाला नियम विरुद्ध था तो बनवाया किस विभाग ने। एनजीटी का शिकंजा कसते देख सरकारी विभागों ने इस नाले को ‘अनाथ’ छोड़ दिया। पहले लोगों की सहूलियत के नाम पर नाला निर्माण पर करोड़ों बहाए और अब इसे जड़ से खत्म कर दिया गया।
दस कालोनियों को नोटिस
एनजीटी के आदेश के बाद कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में हुए फैसले के मुताबिक इंद्रधनुष कालोनी, राहुल विहार, संत नगर, जयराम बाग, राहुल ग्रीन, ट्यूलिप पैराडाइज, अमर विहार, मैत्री बाग, फ्रेंड्स विहार, राधा बल्लभ इंटर कालेज को नोटिस भेजे जा रहे हैं। वजह, इनका सीवर दयालबाग, राजश्री एस्टेट स्थित नाले के माध्यम से यमुना में जा रहा था। 9 सितंबर तक कालोनियों के प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा। इसके आधार पर जल निगम और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 10 सितंबर को एनजीटी में जवाब दाखिल करेंगे।
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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अनुश्रवण समिति की बैठक गत 26 मई को हुई थी। इसमें यमुना में गिरती गंदगी रोकने पर भी मंथन हुआ। यमुना प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक पीके अग्रवाल, परियोजना प्रबंधक खालिद अहमद व एमके बंसल ने अपनी संयुक्त रिपोर्ट में कहा था कि आगरा में 50 में से 24 नाले टेप किए गए हैं। इन नालों का बहाव सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) को शोधन के लिए जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी माना गया था कि 26 नाले टेप नहीं और सीधे यमुना में गिर रहे हैं।
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इधर, पर्यावरणविद डीके जोशी ने हाल ही में यमुना को मूलस्वरूप में लाने संबंधी जनहित याचिका एनजीटी में दायर की थी। इसमें उन्होंने यमुना के लिए संकट बने नालों पर भी सवाल खड़े किए थे। बतौर साक्ष्य दयालबाग स्थित राजश्री एस्टेट के पास के सीधे यमुना में गिरते नाले की तस्वीर पेश की थी। 27 अगस्त को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने इस नाले को बंद करने के आदेश दिए। जल निगम ने इसे तो बंद करा दिया लेकिन न तो एनजीटी को अन्य नालों की जानकारी दी और न ही इन्हें टेप किया।
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‘अनाथ’ नाले को एडीए ने उखाड़ फेंका
सरकारी कार्यप्रणाली का एक नमूना और। जल निगम द्वारा ट्रिब्यूनल के आदेश पर आनन-फानन में दयालबाग क्षेत्र के नाले को रात में ही बंद तो कर दिया, लेकिन न तो क्षेत्रीय लोगों का ध्यान रखा गया और न ही सरकारी धन की बर्बादी का। शुक्रवार को एडीए ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए, नाले के पाइप ही उखाड़ फेंके। मगर यह कोई बताने को तैयार नहीं है कि जब नाला नियम विरुद्ध था तो बनवाया किस विभाग ने। एनजीटी का शिकंजा कसते देख सरकारी विभागों ने इस नाले को ‘अनाथ’ छोड़ दिया। पहले लोगों की सहूलियत के नाम पर नाला निर्माण पर करोड़ों बहाए और अब इसे जड़ से खत्म कर दिया गया।
दस कालोनियों को नोटिस
एनजीटी के आदेश के बाद कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में हुए फैसले के मुताबिक इंद्रधनुष कालोनी, राहुल विहार, संत नगर, जयराम बाग, राहुल ग्रीन, ट्यूलिप पैराडाइज, अमर विहार, मैत्री बाग, फ्रेंड्स विहार, राधा बल्लभ इंटर कालेज को नोटिस भेजे जा रहे हैं। वजह, इनका सीवर दयालबाग, राजश्री एस्टेट स्थित नाले के माध्यम से यमुना में जा रहा था। 9 सितंबर तक कालोनियों के प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा। इसके आधार पर जल निगम और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 10 सितंबर को एनजीटी में जवाब दाखिल करेंगे।