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विश्व फार्मासिस्ट दिवस: जब अपनों की थी जरूरत, तब मरीजों की सेवा को बनाया धर्म

Fri, 25 Sep 2026 03:19 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 03:19 AM IST
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World Pharmacists Day: When one needed their own loved ones, they made serving patients their calling.
लेडी रॉयल अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट डॉक्टर लोकेट सत्संगी
आगरा। सरकारी अस्पताल में काम करने वाले तमाम स्वास्थ्यकर्मी महज अपनी नौकरी नहीं निभाते, बल्कि फर्ज की ऐसी इबारत लिखते हैं जो मिसाल बन जाती है। विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर ऐसे ही कर्मठ फार्मासिस्टों की दास्तान सामने आई है, जिन्होंने अपने पिता, पत्नी और भाई के कोरोना संक्रमण, परिवार पर टूटे दुखों के पहाड़ और व्यक्तिगत त्रासदियों को दरकिनार कर हमेशा मरीजों की जान और उनकी उम्मीदों को सर्वोपरि रखा।
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पिता, पत्नी और भाई कोरोना संक्रमित थे, फिर भी मरीजों के लिए डटे रहे डॉ. राणा
एसएन मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2006 से सेवाएं दे रहे फार्मेसी के सह प्रभारी अधिकारी डॉ. रवींद्र सिंह राणा के समर्पण की मिसाल अनूठी है। अस्पताल का सरकारी समय सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक है लेकिन वे रोज शाम 6 बजे तक रुकते हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले बेबस और बुजुर्ग मरीजों को दवा, जांच और उनके घर तक पहुंचने में मदद मिल सके। डॉ. राणा बताते हैं, कोरोना काल में जब मेरे पिता, पत्नी और बड़े भाई एक साथ संक्रमित थे, तब भी मैंने अस्पताल के मरीजों को प्राथमिकता दी।
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हाथरस हादसे में दिन-रात संभाली इमरजेंसी, खुद ठीक होकर फिर लौटे प्रवीण
डिप्लोमा फार्मासिस्ट
एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष प्रवीण कुमार जून 2006 से एसएन मेडिकल कॉलेज में कार्यरत हैं, बताते हैं कि वर्ष 2024 में जब हाथरस में साकार विश्व हरि के सत्संग के दौरान भगदड़ हुई थी तब इमरजेंसी में भारी अफरा-तफरी का माहौल था। उस दौरान वे बिना दिन-रात इमरजेंसी ड्यूटी में डटे रहे। जब तक सभी घायलों का इलाज, मृतकों के शव परिजन के सुपुर्द नहीं कर दिए वो घर नहीं गए। इससे पहले कोविड काल में जब वो खुद संक्रमित हो गए। ठीक होते ही बिना समय गंवाए दोबारा मरीजों की सेवा में फिर से जुट गए।
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बड़े भाई के निधन के बाद भी निभाया फर्ज डॉ. मुकेश

लेडी लायल अस्पताल में वर्ष 2016 से कार्यरत डॉ. मुकेश सत्संगी ने भी निष्ठा का अनोखा उदाहरण पेश किया। कोरोना महामारी के दौरान जब उनके बड़े भाई का अचानक निधन हो गया, तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक तरफ घर में गहरा शोक था, तो दूसरी तरफ अस्पताल में मरीजों की आस। डॉ. सत्संगी ने व्यक्तिगत पीड़ा भूल अस्पताल परिसर में अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हुए लगातार सेवाएं दीं। संवाद

लेडी रॉयल अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट डॉक्टर लोकेट सत्संगी

लेडी रॉयल अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट डॉक्टर लोकेट सत्संगी

लेडी रॉयल अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट डॉक्टर लोकेट सत्संगी

लेडी रॉयल अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट डॉक्टर लोकेट सत्संगी

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