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विश्व हाथी दिवस 2023: यहां आजाद जिंदगी जी रहे हैं 'गजराज', ऐसे की जाती है इनकी देखभाल
Fri, 11 Aug 2023 06:15 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 11 Aug 2023 06:15 PM IST
सार
World Elephant Day 2023: दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चुरमुरा हाथी संरक्षण केंद्र यमुना किनारे है। जहां हाथियों की देखभाल की जाती है। यहां मदमस्त होकर हाथी घूमते हैं।
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World Elephant Day 2023
- फोटो : wildlife sos
विस्तार
विश्व हाथी दिवस हर साल 12 अगस्त को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हाथियों की रक्षा करना है। इसके साथ ही उनके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना भी है। इस ही उद्देश्य को प्राथमिकता देते हुए, वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में रह रहे हाथियों की देखभाल और वृद्ध हाथियों को प्रदान किए जाने वाली पशु चिकित्सा उपचार एक एहम भूमिका निभाती है। आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चुरमुरा हाथी संरक्षण ऐसा ही केंद्र है जहां हाथियों की देखभाल की जाती है और यहां मदमस्त होकर हाथी घूमते हैं।
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तीन हाथी पुनर्वास सुविधाओं का प्रबंधन और संचालन करते हुए, वाइल्डलाइफ एसओएस अब तक 50 से अधिक हाथियों की मदद करने में कामयाब रहा है। इन हाथियों को दुर्व्यवहार, क्रूरता और शारीरिक और मानसिक यातना की भयानक स्थितियों से बचाया गया है। पुनर्वास के बाद भी ये हाथी अपने दैनिक जीवन के लिए मनुष्यों पर निर्भर रहते हैं।
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वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में रह रहे नीना, भोला, हौली और सूज़ी ऐसे कुछ वृद्ध हाथी हैं, जिन्हें विशेष पशु चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। 70 वर्ष से अधिक उम्र की सूज़ी मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण केंद्र में सबसे उम्रदराज़ हथनी है। उसकी दोनों आंखों की रोशनी पूरी तरह खत्म हो गई है और उसके दांत भी नहीं है।
इन स्वास्थ्य समस्याओं का ध्यान रखने के लिए, उसकी देखभाल करने वाले सदस्य सूज़ी का विशेष ध्यान रखते हैं, जब भी वो केंद्र से बाहर सैर पर जाती है तो यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी कंकड़ या बाधा को उसके नाज़ुक फुटपैड से दूर रखे और रास्ता साफ करते हैं। सूज़ी को खाने में वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा टीम फलों का पेस्ट बना कर देती है, जिसे 'सूज़ी स्मूथी' के रूप में भी जाना जाता है।
लगभग 60 वर्ष की आयु वाला भोला एक बूढ़ा नर हाथी है, जो दृष्टिहीन है और जिसकी पूंछ पर घाव भी हैं। उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, भोला के बाड़े के लेआउट और व्यवस्था में कभी बदलाव नहीं किया जाता। बाड़े में कोई नुकीला किनारा नहीं है। इसी तरह वाइल्डलाइफ एसओएस के रखरखाव में रह रही नीना एक 60 वर्षीय बुजुर्ग हथनी है, जो गंभीर रूप से अर्थराइटिस से पीड़ित है। वह पूरी तरह से अंधी भी है, जो संभवत: अंकुश जैसे नुकीले अस्त्रों के लगातार प्रयोग का परिणाम है।
उप निदेशक- पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. एस. इलियाराजा ने बताया कि 'पशु चिकित्सा टीम जोड़ों से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए सावधानीपूर्वक लेजर थेरेपी और मसाज करती है, जिससे नीना को काफी राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त, दर्द से निजात के लिए दवा, मल्टीविटामिन की खुराक और लीवर टॉनिक के साथ-साथ स्वस्थ और पौष्टिक आहार नीना की दिनचर्या में शामिल है।'
वाइल्डलाइफ एस.ओ.एस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “नीना, भोला और सूज़ी की तरह, जब हमने ऐसे और भी वृद्ध हाथियों को रेस्क्यू किया तब वह बेहद ही कमजोर, कुपोषित और घायल थे। हमारी देखरेख में काफी समय बिताने के बाद, आज वे अपने अतीत की यातनाओं से बाहर आ रहे हैं। विश्व हाथी दिवस पर, हम इस बात को बढ़ावा देना चाहते हैं, कि व्यावसायिक रूप से शोषित हाथियों के जीवन को कैसे बेहतर बनाया जा सके एवं उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाली पशु चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा सके। आज अनुमान है, कि भारत में करीब 2,600 से अधिक बंदी हाथी हैं और इनको सहायता प्रदान करने के लिए बहुत ही अधिक संसाधनों की आवश्यकता है। हम एक ऐसा भविष्य देखना चाहते हैं, जहां सड़कों पर हाथियों से भीख मंगवाना बंद हो सके।''