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विश्व रैबीज दिवस: पिल्ला ही तो है कहकर टाल गए, नहीं लगवाया टीका, चली गई रैबीज से जान

Tue, 28 Sep 2021 12:35 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 28 Sep 2021 12:35 AM IST
सार

मरीजों को मामूली घाव, खरोंच को नजरअंदाज करना पड़ा भारी, जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना जानवर काटे के 180 से 200 मरीज आ रहे हैं, इनमें स्कूल खुलने के बाद बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई है।

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World Anti Rabies Day 2021: Take Vaccine After Bite Dog And Monkey And Save Life
पालतू कुत्ता - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

घर से निकले और पिल्ले ने काट लिया। घाव मामूली या खरोंच देख नजरअंदाज कर दिया। परिजनों ने एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) लगवाने को कहा भी, लेकिन पिल्ला ही तो है कहते हुए टाल गए। यह लापरवाही भारी पड़ी, पिल्ला संक्रमित होने पर रैबीज की बीमारी लग गई और मौत हो गई। जिला अस्पताल में महीने में एक या दो ऐसे मामले आ रहे हैं। 
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 जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. एके अग्रवाल ने बताया कि एआरवी क्लीनिक में 45-50 वाइल रोज लग रही हैं। एक वाइल से चार मरीजों को टीका लगता है। ऐसे में औसतन रोजान 180 से 200 मरीज आ रहे हैं। स्कूल खुलने के बाद बंदर-कुत्ता काटे के मरीजों में बच्चों की संख्या इस महीने में दोगुनी हो गई है। इनमें कुत्ता काटने के 70 ये 80 फीसदी मरीज रहते हैं। रैबीज मरीजों की बात करें तो महीने में एक-दो मामले मिल रहे हैं। पूछताछ में इन्होंने पिल्ला के काटने पर एआरवी नहीं लगवाया। ऐसे बच्चे भी रहे, जिन्होंने डर के चलते परिजनों को कुत्ता काटने के बारे में नहीं बताया। लक्षण आने पर परिजनों को इसका पता चला।
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इसलिए मनाया जाता है रैबीज दिवस
लोक स्वर संस्था के राजीव गुप्ता ने बताया कि फ्रांस के सूक्ष्म जीव विज्ञानी लुई पाश्चर ने रैबीज का टीका बनाया था। उनकी पुण्यतिथि पर 28 सितंबर को विश्व रैबीज दिवस मनाया जाता है। लोगों से अपील है कि वह अपने बच्चों को कुत्तों से छेड़छाड़ न करने दें। पालने का शौक है तो उसका टीकाकरण जरूर करवाएं।
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रैबीज मरीज को हो जाता है हाइड्रोफोबिया: डॉ. पृथ्वी सिंह 
नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डॉॅ. पृथ्वी सिंह डांगुर ने बताया कि रैबीज पनपने से मरीज गुस्सा करना, काटने दौड़ना, लार अधिक टपकाता है। पानी से डर भी लगता है। इसे हाइड्रोफोबिया कहते हैं। यह सबसे खतरनाक स्थिति है। इससे प्री-स्टेज में मरीज अंधेरे में रहने, कोने में बैठने और पानी से डरता है। इसमें तीन दिन से 12 सप्ताह में लक्षण नजर आने लगते हैं। 

कुत्ता-बंदर पालने वाले जरूर लगवाएं टीका
पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि कुत्ता, बिल्ली, बंदर पालने वाले लोगों को एक महीने में दो और फिर सालाना बूस्टर डोज लगाया जाता है। ऐसे ही जानवर का बच्चा 21 दिन का होने पर टीका लगाते हैं, एक महीने बाद और फिर सालाना टीका लगाया जाता है। जानवर पालने के शौकीन लोग अपना और जानवरों का टीकाकरण जरूर करवाएं।

केस एक: रेलवे कॉलोनी में 11 साल के बच्चे को पास के ही कुत्ता ने काट लिया। बच्चे ने डर के चलते घर वालों को नहीं बताया। धीरे-धीरे बच्चे को परेशानी होने लगी, इलाज कराने के डेढ़ साल में दम तोड़ दिया।
केस दो: बाह में सात साल की बच्ची को कुत्ता ने काट लिया। सीएचसी पर एआरवी नहीं मिलने पर परिजनों ने टीका लगवाने में देरी कर दी। बच्ची के छह-सात दिन बाद हालत बिगड़ी, एसएन में इसकी मौत हो गई। 

 

यह हैं लक्षण: 
- पानी से भयभीत होते हैं, पानी नहीं पी पाते हैं।
- बुखार आना, सिर में दर्द होना।
- मुंह में लार अधिक बनना।
- मांसपेशियों में दर्द, मानसिक भ्रम होना।

यह करें प्राथमिक उपाय:
- 24 घंटे से पहले लग जाए। 
- कार्बोनिक एसिड वाले साबुन से पानी तेज धार से घाव को साफ करें।  
- टिटनेस का टीका लगवाएं और एंटी रैबीज वैक्सीन जरूर लगवा लें।  
- एआरवी काटने के वक्त, फिर तीसरे दिन, पांचवें दिन, सातवें दिन, 11वें दिन लगेगा।

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