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World Aids Day 2022: एड्स से टूटे जाति-धर्म के बंधन, बन गए एकदूजे के हमसफर
Thu, 01 Dec 2022 07:45 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 01 Dec 2022 07:45 AM IST
सार
एलिन ओमांश सोसाइटी की अध्यक्ष बॉबी शर्मा ने बताया कि संस्था एड्स रोगी के साथ सामान्य महिला-पुरुष विवाह से कतराते हैं। ऐसे में एड्स मरीजो को पंजीकृत करके एकदूसरे से शादी के लिए विकल्प रखते हैं।
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एचआईवी एड्स
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विस्तार
जांच में एड्स मिला तो मानों जिंदगी ही खत्म हो गई। काउंसलिंग से हिम्मत बंधी और इलाज शुरू कर दिया। बात घर बसाने की आई तो समाज से उलाहने सुनने को मिले। ऐसे में किसी की परवाह न कर एड्स रोगी एकदूजे के हमसफर बन गए। जाति-धर्म के बंधन तोड़ इस साल ऐसे 30 मरीजों ने अपनी दुनिया बसा ली है।
एलिन ओमांश सोसाइटी की अध्यक्ष बॉबी शर्मा ने बताया कि संस्था एड्स रोगी के साथ सामान्य महिला-पुरुष विवाह से कतराते हैं। ऐसे में एड्स मरीजो को पंजीकृत करके एकदूसरे से शादी के लिए विकल्प रखते हैं। इसमें सभी जाति-धर्म के मरीज हैं। एक दूसरे की रजामंदी से वह बिना धर्म या जाति का भेदभाव किए जीवनसाथी का चुनाव कर रहे हैं। इनमें कई रिश्ते ऐसे भी हुए हैं, जिनमें मरीजों के परिवार का साथ भी मिला है। अभी तक संक्रमित 135 ने अपने हमसफर चुने हैं। इस साल 15 शादियां हुई हैं।
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एलिन ओमांश सोसाइटी की अध्यक्ष बॉबी शर्मा ने बताया कि संस्था एड्स रोगी के साथ सामान्य महिला-पुरुष विवाह से कतराते हैं। ऐसे में एड्स मरीजो को पंजीकृत करके एकदूसरे से शादी के लिए विकल्प रखते हैं। इसमें सभी जाति-धर्म के मरीज हैं। एक दूसरे की रजामंदी से वह बिना धर्म या जाति का भेदभाव किए जीवनसाथी का चुनाव कर रहे हैं। इनमें कई रिश्ते ऐसे भी हुए हैं, जिनमें मरीजों के परिवार का साथ भी मिला है। अभी तक संक्रमित 135 ने अपने हमसफर चुने हैं। इस साल 15 शादियां हुई हैं।
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रोजगार और पढ़ाई के लिए भी करते हैं प्रोत्साहित
आगरा पाजिटिव पीपल वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष अनिल राठौर ने बताया कि संस्था में 6093 मरीज पंजीकृत हैं। इनमें 160 बच्चे हैं, जिनके मां-पिता नहीं रहे। उनको पढ़ाने का भी जिम्मा उठाते हैं। 445 दंपति हैं, जिनमें एक साथी निगेटिव और दूसरा पॉजिटिव है। इनको उपचार के साथ रोजगार के लिए भी मदद करते हैं।
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