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वैध होंगी चार दर्जन से अधिक अवैध कालोनियां
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 03 Jun 2015 02:11 AM IST
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शहर की सवा दो सौ से अधिक अवैध कालोनियों में से बहुत सी कालोनियों के वैध होने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। राज्य सरकार के सकारात्मक रुख के बाद सबसे पहले उन 54 कालोनियों के नियमित होने की संभावना बढ़ गई है, जिन्हें आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) पहले ही वैध करने के लिए कवायद शुरू कर चुका है। हालांकि शहर में 63 कालोनियां ऐसी हैं, जो वैध करार नहीं दी जा सकतीं।
बता दें कि राज्य सरकार जल्द ही अवैध कॉलोनियों को वैध करने की नीति लाने जा रही है। विकास प्राधिकरणों को शहरों में बनी अवैध कालोनियों को वैध करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत प्रदेश की 2,567 अवैध कालोनियों में 20 प्रतिशत 513 को वित्तीय वर्ष 2015-16 में वैध किया जाएगा। शहर में भी एडीए 234 कालोनियों को अवैध घोषित कर चुका है। इसमें से 63 कालोनियां ऐसी हैं, जिनको वैध नहीं किया जा सकता। 54 कालोनियों को वैध करने के लिए काफी पहले ही कवायद शुरू हो चुकी है। इनमें अधिकांश वह कालोनियां हैं, जहां क्षेत्र के विकास के नियमों का अधिक से अधिक ध्यान रखा गया है।
बता दें कि शहर में 587 कालोनियां एडीए से स्वीकृत हैं। इनमें से अधिकतर प्राइवेट बिल्डरों ने विकसित की हैं। गौरतलब है कि प्रमुख सचिव आवास सदाकांत की ओर से जारी शासनादेश में विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि 35 शहरों में बढ़ते हुए क्षेत्रफल के आधार पर संशोधित या फिर नया मास्टर प्लान तैयार किया जाए, ताकि सुनियोजित तरीके से शहर का विकास हो सके। ऐसे में यदि अवैध कालोनियों को वैध किया जाता है तो इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी लाभ मिलेगा। न सिर्फ यहां विकास कार्य कराए जाने के रास्ते खुल जाएंगे बल्कि बैंकों से होम लोन लेने में भी आसानी हो जाएगी।
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इनसेट
खुलेंगे विकास के रास्ते
तमाम कालोनियां शहर में होने के बावजूद विकास कार्यों की दृष्टि से काफी पिछड़ी हुई हैं। कई कालोनियों की हालत गांवों जैसी है। गलियां तक पक्की नहीं हैं। घरों का पानी नाली के बजाय सड़क पर बहता है। ऐसे में यदि कालोनियां वैध होती हैं तो विकास कार्य कराए जाएंगे। हालांकि जो कालोनियां वैध भी हैं, वहां भी हालात ज्यादा ठीक नहीं हैं।
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बता दें कि राज्य सरकार जल्द ही अवैध कॉलोनियों को वैध करने की नीति लाने जा रही है। विकास प्राधिकरणों को शहरों में बनी अवैध कालोनियों को वैध करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत प्रदेश की 2,567 अवैध कालोनियों में 20 प्रतिशत 513 को वित्तीय वर्ष 2015-16 में वैध किया जाएगा। शहर में भी एडीए 234 कालोनियों को अवैध घोषित कर चुका है। इसमें से 63 कालोनियां ऐसी हैं, जिनको वैध नहीं किया जा सकता। 54 कालोनियों को वैध करने के लिए काफी पहले ही कवायद शुरू हो चुकी है। इनमें अधिकांश वह कालोनियां हैं, जहां क्षेत्र के विकास के नियमों का अधिक से अधिक ध्यान रखा गया है।
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बता दें कि शहर में 587 कालोनियां एडीए से स्वीकृत हैं। इनमें से अधिकतर प्राइवेट बिल्डरों ने विकसित की हैं। गौरतलब है कि प्रमुख सचिव आवास सदाकांत की ओर से जारी शासनादेश में विकास प्राधिकरण उपाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि 35 शहरों में बढ़ते हुए क्षेत्रफल के आधार पर संशोधित या फिर नया मास्टर प्लान तैयार किया जाए, ताकि सुनियोजित तरीके से शहर का विकास हो सके। ऐसे में यदि अवैध कालोनियों को वैध किया जाता है तो इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी लाभ मिलेगा। न सिर्फ यहां विकास कार्य कराए जाने के रास्ते खुल जाएंगे बल्कि बैंकों से होम लोन लेने में भी आसानी हो जाएगी।
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खुलेंगे विकास के रास्ते
तमाम कालोनियां शहर में होने के बावजूद विकास कार्यों की दृष्टि से काफी पिछड़ी हुई हैं। कई कालोनियों की हालत गांवों जैसी है। गलियां तक पक्की नहीं हैं। घरों का पानी नाली के बजाय सड़क पर बहता है। ऐसे में यदि कालोनियां वैध होती हैं तो विकास कार्य कराए जाएंगे। हालांकि जो कालोनियां वैध भी हैं, वहां भी हालात ज्यादा ठीक नहीं हैं।