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UP: छह महीनों में मिलीं इतनी बड़ी 50 छिपकली, जो जहरीली नहीं...वाइल्ड लाइफ एसओएस ने बचाई जान
Fri, 15 Aug 2025 08:36 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 15 Aug 2025 08:36 AM IST
सार
आपने अपने घर में तो छिपकली बहुत देखी होंगी। लेकिन कुछ बड़ी छिपकली भी हैं, जिन्हें देखकर लोग डर जाते हैं। अक्सर इन्हें मार दिया जाता है।
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मॉनिटर लिजर्ड
- फोटो : Wildlife SOS
विस्तार
मॉनिटर लिजर्ड यानि गोह। छिपकली जैसी आकृति वाले इस विशाल जीव को देखकर लोग अक्सर घबरा जाते हैं। कई बार जहरीला मानकर लोग उन्हें मार देते हैं लेकिन देश में पाई जाने वाली बंगाल मॉनिटर लिजर्ड (गोह) वास्तव में गैर-विषैली सरीसृपों में से एक है। वाइल्ड लाइफ एसओएस की क्विक रिस्पांस टीम ने पिछले छह महीने में करीब 50 मॉनिटर लिजर्ड को शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से रेस्क्यू किया है।
वाइल्ड लाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण बताते हैं कि हर साल 14 अगस्त को वर्ल्ड लिजर्ड डे मनाया जाता है। मॉनिटर लिजर्ड इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि यह चूहे जैसे जीवों की आबादी को नियंत्रित रखती हैं। बावजूद इसके लोग जहरीला समझकर उन्हें मार देते हैं। उन्होंने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची में माॅनिटर लिजर्ड को मारना दंडनीय अपराध है।
संगठन के डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी और भारी वर्षा जैसी परिस्थितियों में ये जीव अपने प्राकृतिक रहवास से बाहर निकल सुरक्षित आवास की तलाश में इंसानी बस्तियों में आ जाते हैं और लोगों का शिकार हो जाते हैं। बताया कि लोग तुलनात्मक रूप से जागरूक हुए हैं। अब वो मारने के बजाय वाइल्ड लाइफ एसओएस को कॉल कर सूचना दे रहें हैं। तभी 50 मॉनिटर लिजर्ड को प्रशिक्षित रैपिड रिस्पांस यूनिट ने रेस्क्यू किया है।
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वाइल्ड लाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण बताते हैं कि हर साल 14 अगस्त को वर्ल्ड लिजर्ड डे मनाया जाता है। मॉनिटर लिजर्ड इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि यह चूहे जैसे जीवों की आबादी को नियंत्रित रखती हैं। बावजूद इसके लोग जहरीला समझकर उन्हें मार देते हैं। उन्होंने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची में माॅनिटर लिजर्ड को मारना दंडनीय अपराध है।
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संगठन के डायरेक्टर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी और भारी वर्षा जैसी परिस्थितियों में ये जीव अपने प्राकृतिक रहवास से बाहर निकल सुरक्षित आवास की तलाश में इंसानी बस्तियों में आ जाते हैं और लोगों का शिकार हो जाते हैं। बताया कि लोग तुलनात्मक रूप से जागरूक हुए हैं। अब वो मारने के बजाय वाइल्ड लाइफ एसओएस को कॉल कर सूचना दे रहें हैं। तभी 50 मॉनिटर लिजर्ड को प्रशिक्षित रैपिड रिस्पांस यूनिट ने रेस्क्यू किया है।
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