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UP: वन्य जीव संरक्षण का मिशन बन चुका है वाइल्ड लाइफ एसओएस, 30 वर्षों का रहा ऐसा सफर

Thu, 12 Feb 2026 09:05 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 12 Feb 2026 09:05 AM IST
सार

वाइल्ड लाइफ एसओएस  पिछले तीस वर्षों में हजारों वन्य जीवों की जान बचा चुका है। चाहे वो कलंदर के हाथों नाचते भालू हों या फिर बाबाओं के वेश में महावतों के साथ भीख मांगते हाथी।

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Wildlife SOS Completes 30 Years of Rescue Mission
वन्य जीव संरक्षण - फोटो : wildlife sos

विस्तार

चाहे वो कलंदर के हाथों नाचते भालू हों या फिर बाबाओं के वेश में महावतों के साथ भीख मांगते हाथी। देश में वन्य जीवों को क्रूरता से बचाने के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस एक मिशन की तरह काम कर रहा है। देश में वाइल्ड लाइफ एसओएस ने संरक्षण और पुनर्वास के तीन दशक पूरे कर लिए हैं।
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एक छोटे से संकल्प के साथ शुरू हुआ प्रयास पिछले 30 वर्षों में मिशन में तब्दील हो चुका है। जहां स्वयंसेवकों की फौज सांप से लेकर मॉनिटर लिजर्ड, मगरमच्छ से लकड़बग्घे तक तमाम जंगली जीवों की रक्षा के लिए 24 घंटे मुस्तैद रहती है। वाइल्ड लाइफ एसओएस के देश भर में 17 रेस्क्यू सेंटर संचालित हैं। आगरा में दुनिया का सबसे बड़ा स्लॉथ भालू बचाव केंद्र और बंगलूरू, भोपाल और पुरुलिया में स्लॉथ भालुओं के तीन अन्य केंद्र शामिल हैं।
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संस्था ने करीब 150 भालुओं को रेस्क्यू किया। देश का पहला हाथी अस्पताल और हाथी देखभाल केंद्र मथुरा में स्थापित किया। वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण बताते हैं कि एसओएस, देश के पहला मोबाइल हाथी क्लीनिक का भी संचालन कर रही है, जो मौके पर जाकर ही हाथियों को उचित चिकित्सा और उपचार प्रदान करती है।
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सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने बताया कि महाराष्ट्र के मानिकदोह स्थित तेंदुआ संरक्षण केंद्र में 50 से अधिक तेंदुओं की देखभाल की जा रही है। डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी. कहते हैं कि विभिन्न प्रदेशों के वन विभाग के साथ साझेदारी हमारी सबसे बड़ी ताकत रही है। इन तीन दशकों में हमने हजारों बेजुबानों की जान बचाने के साथ उन्हें प्राकृतिक रहवास तक पहुंचने में मदद की है।
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